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सेमीकॉन 2.0 को मिले ₹1 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव, अश्विनी वैष्णव बोले — 2-3 साल में ज़मीन पर उतरेंगे

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सेमीकॉन 2.0 को मिले ₹1 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव, अश्विनी वैष्णव बोले — 2-3 साल में ज़मीन पर उतरेंगे

सारांश

सेमीकॉन 2.0 को पहले ही 11-12 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं — और धोलेरा में 363 एकड़ का वेंडर पार्क, फुजीफिल्म व JSR के साथ टाटा के समझौते बताते हैं कि भारत चिप की राजनीति से आगे बढ़कर अब चिप की आपूर्ति शृंखला की ज़मीन तैयार कर रहा है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 सितंबर 2026 को बताया कि सेमीकॉन 2.0 के तहत 11-12 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
निवेश प्रस्ताव सेमीकंडक्टर उपकरण, मटेरियल्स, गैस, केमिकल्स और सब्सट्रेट्स क्षेत्रों से हैं; अगले 2-3 वर्षों में क्रियान्वयन अपेक्षित।
₹1.27 लाख करोड़ के परिव्यय वाली सेमीकॉन 2.0 योजना में सिलिकॉन फैब के लिए 40% और R&D/प्रतिभा विकास के लिए 75% तक सरकारी सहायता।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने गुजरात के धोलेरा में 363 एकड़ का वेंडर पार्क बनाने के लिए एसेन्डास फर्स्टस्पेस के साथ समझौता किया।
टाटा ने फुजीफिल्म और JSR कॉरपोरेशन के साथ मटेरियल्स व फोटोरेजिस्ट आपूर्ति के लिए अलग-अलग समझौते किए।
एक रिपोर्ट के अनुसार सेमीकॉन 2.0 संभावित रूप से ₹4 लाख करोड़ तक का निवेश आकर्षित कर सकती है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 'सेमीकॉन इंडिया 2026' सम्मेलन में बताया कि केंद्र सरकार के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण 'सेमीकॉन 2.0' के तहत 11 से 12 अरब डॉलर (लगभग ₹92,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़) के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। मंत्री ने कहा कि ये प्रतिबद्धताएँ अगले दो से तीन वर्षों में धरातल पर उतरने की उम्मीद है।

किन क्षेत्रों से आए निवेश प्रस्ताव

वैष्णव के अनुसार, ये निवेश प्रस्ताव सेमीकंडक्टर उपकरण, मटेरियल्स, गैस, केमिकल्स और सब्सट्रेट्स जैसे सहायक क्षेत्रों से जुड़े हैं — यानी चिप निर्माण की आपूर्ति शृंखला के उन हिस्सों से जो भारत में अब तक लगभग अनुपस्थित थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजनाओं के लिए स्थान चुनना कंपनियों का विशेषाधिकार है और यह निर्णय नीतिगत स्थिरता, सरकारी सहयोग और औद्योगिक इकोसिस्टम की मज़बूती पर निर्भर करता है।

मंत्री ने कहा, 'उद्योग यह तय करता है कि वह किस स्थान को चुनेगा। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें कहाँ अधिक सहजता महसूस होती है, कितनी नीतिगत निश्चितता दिखाई देती है और सरकार व अन्य क्षेत्रों से किस तरह का सहयोग मिलता है।'

सेमीकॉन 2.0 की रूपरेखा

₹1.27 लाख करोड़ के परिव्यय के साथ अनुमोदित सेमीकॉन 2.0 का लक्ष्य चिप डिज़ाइन, उपकरण एवं मटेरियल्स, फैब इकाइयाँ, एडवांस्ड पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और प्रतिभा विकास को बढ़ावा देना है। सिलिकॉन फैब परियोजनाओं के लिए 40% पूंजीगत व्यय सहायता का प्रावधान है, जबकि R&D और प्रतिभा विकास पहलों पर केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर 75% तक सहायता प्रदान कर सकती हैं।

हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 संभावित रूप से ₹4 लाख करोड़ तक का निवेश आकर्षित कर सकती है और योजना अवधि में ₹2 लाख करोड़ के सेमीकंडक्टर उत्पादन को सक्षम बना सकती है।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के अहम समझौते

सम्मेलन के दौरान टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने एसेन्डास फर्स्टस्पेस के साथ एक महत्त्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत गुजरात के धोलेरा में कंपनी की सेमीकंडक्टर फैब यूनिट के आसपास 363 एकड़ का वेंडर पार्क बनाया जाएगा। यह पार्क आपूर्तिकर्ता इकोसिस्टम को केंद्रित और संगठित करने का काम करेगा।

इसके अलावा टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने जापानी कंपनी फुजीफिल्म के साथ महत्त्वपूर्ण सेमीकंडक्टर मटेरियल्स के स्थानीयकरण को लेकर, तथा JSR कॉरपोरेशन के साथ फोटोरेजिस्ट और उन्नत रसायनों की आपूर्ति को लेकर समझौते किए हैं। ये सामग्रियाँ धोलेरा फैब परियोजनाओं में उपयोग की जाएंगी।

आम जनता और उद्योग पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की होड़ में है और अमेरिका, यूरोप, ताइवान व दक्षिण कोरिया के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है। गौरतलब है कि धोलेरा में टाटा की फैब यूनिट और असम के मोरीगाँव में माइक्रोन की पैकेजिंग सुविधा पहले से प्रगति पर है — और सेमीकॉन 2.0 के निवेश इन्हें घेरने वाली आपूर्ति शृंखला तैयार करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

यदि घोषित निवेश समयसीमा के भीतर साकार होते हैं, तो भारत न केवल चिप असेंबली बल्कि चिप-निर्माण सामग्री के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा — जो अभी तक पूरी तरह आयात पर निर्भर है। अगले चरण में क्षेत्रीय कार्यान्वयन योजनाओं और निवेशकों के साथ अनुबंधों की जानकारी सार्वजनिक होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि ये 'प्रस्ताव' कब और कितनी तेज़ी से वास्तविक निवेश में बदलते हैं — भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा में घोषणा और क्रियान्वयन के बीच की खाई पहले भी चुनौती रही है। धोलेरा वेंडर पार्क और फुजीफिल्म-JSR समझौते आपूर्ति शृंखला के स्थानीयकरण की दिशा में ठोस कदम हैं, परंतु 40% पूंजीगत व्यय सहायता की तुलना में ताइवान और दक्षिण कोरिया की 50-60% सब्सिडी व्यवस्था को देखते हुए आलोचक इसे अपर्याप्त मानते हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि सेमीकंडक्टर उत्पादन चक्र लंबा होता है — 2-3 वर्षों की समयसीमा तकनीकी रूप से महत्त्वाकांक्षी है, खासकर तब जब वैश्विक चिप बाज़ार में अगले दो वर्षों में नई आपूर्ति क्षमता आने की संभावना है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेमीकॉन 2.0 क्या है और इसके तहत कितना निवेश मिला है?
सेमीकॉन 2.0 भारत सरकार का सेमीकंडक्टर कार्यक्रम का दूसरा चरण है, जिसे ₹1.27 लाख करोड़ के परिव्यय के साथ मंज़ूरी दी गई है। 17 सितंबर 2026 को 'सेमीकॉन इंडिया 2026' सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस चरण के तहत अब तक 11 से 12 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।
सेमीकॉन 2.0 के तहत कंपनियों को क्या सहायता मिलती है?
सिलिकॉन फैब परियोजनाओं के लिए 40% पूंजीगत व्यय सहायता उपलब्ध है। R&D और प्रतिभा विकास पहलों पर केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर 75% तक सहायता दे सकती हैं। योजना में चिप डिज़ाइन, फैब इकाइयाँ, एडवांस्ड पैकेजिंग और आपूर्ति शृंखला सभी क्षेत्र शामिल हैं।
धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का वेंडर पार्क क्या है?
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने एसेन्डास फर्स्टस्पेस के साथ मिलकर गुजरात के धोलेरा में 363 एकड़ का वेंडर पार्क विकसित करने का समझौता किया है। यह पार्क टाटा की सेमीकंडक्टर फैब यूनिट के निकट आपूर्तिकर्ता इकोसिस्टम तैयार करेगा, जिससे स्थानीय आपूर्ति शृंखला को मज़बूती मिलेगी।
निवेश प्रस्ताव कब तक साकार होंगे?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, ये निवेश प्रतिबद्धताएँ अगले दो से तीन वर्षों में ज़मीन पर उतरने की उम्मीद है। एक रिपोर्ट के मुताबिक योजना अवधि में कुल ₹4 लाख करोड़ तक का निवेश आकर्षित किया जा सकता है।
सेमीकॉन 2.0 भारत के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, ऑटोमोबाइल और दूरसंचार का आधार हैं, और भारत अभी तक इनके लिए आयात पर निर्भर है। सेमीकॉन 2.0 न केवल चिप निर्माण बल्कि उपकरण, सामग्री और आपूर्ति शृंखला के स्थानीयकरण के ज़रिए इस निर्भरता को कम करने और वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर भारत को स्थापित करने का लक्ष्य रखती है।
राष्ट्र प्रेस
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