सेमीकॉन 2.0 को मिले ₹1 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव, अश्विनी वैष्णव बोले — 2-3 साल में ज़मीन पर उतरेंगे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 'सेमीकॉन इंडिया 2026' सम्मेलन में बताया कि केंद्र सरकार के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण 'सेमीकॉन 2.0' के तहत 11 से 12 अरब डॉलर (लगभग ₹92,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़) के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। मंत्री ने कहा कि ये प्रतिबद्धताएँ अगले दो से तीन वर्षों में धरातल पर उतरने की उम्मीद है।
किन क्षेत्रों से आए निवेश प्रस्ताव
वैष्णव के अनुसार, ये निवेश प्रस्ताव सेमीकंडक्टर उपकरण, मटेरियल्स, गैस, केमिकल्स और सब्सट्रेट्स जैसे सहायक क्षेत्रों से जुड़े हैं — यानी चिप निर्माण की आपूर्ति शृंखला के उन हिस्सों से जो भारत में अब तक लगभग अनुपस्थित थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजनाओं के लिए स्थान चुनना कंपनियों का विशेषाधिकार है और यह निर्णय नीतिगत स्थिरता, सरकारी सहयोग और औद्योगिक इकोसिस्टम की मज़बूती पर निर्भर करता है।
मंत्री ने कहा, 'उद्योग यह तय करता है कि वह किस स्थान को चुनेगा। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें कहाँ अधिक सहजता महसूस होती है, कितनी नीतिगत निश्चितता दिखाई देती है और सरकार व अन्य क्षेत्रों से किस तरह का सहयोग मिलता है।'
सेमीकॉन 2.0 की रूपरेखा
₹1.27 लाख करोड़ के परिव्यय के साथ अनुमोदित सेमीकॉन 2.0 का लक्ष्य चिप डिज़ाइन, उपकरण एवं मटेरियल्स, फैब इकाइयाँ, एडवांस्ड पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और प्रतिभा विकास को बढ़ावा देना है। सिलिकॉन फैब परियोजनाओं के लिए 40% पूंजीगत व्यय सहायता का प्रावधान है, जबकि R&D और प्रतिभा विकास पहलों पर केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर 75% तक सहायता प्रदान कर सकती हैं।
हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 संभावित रूप से ₹4 लाख करोड़ तक का निवेश आकर्षित कर सकती है और योजना अवधि में ₹2 लाख करोड़ के सेमीकंडक्टर उत्पादन को सक्षम बना सकती है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के अहम समझौते
सम्मेलन के दौरान टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने एसेन्डास फर्स्टस्पेस के साथ एक महत्त्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत गुजरात के धोलेरा में कंपनी की सेमीकंडक्टर फैब यूनिट के आसपास 363 एकड़ का वेंडर पार्क बनाया जाएगा। यह पार्क आपूर्तिकर्ता इकोसिस्टम को केंद्रित और संगठित करने का काम करेगा।
इसके अलावा टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने जापानी कंपनी फुजीफिल्म के साथ महत्त्वपूर्ण सेमीकंडक्टर मटेरियल्स के स्थानीयकरण को लेकर, तथा JSR कॉरपोरेशन के साथ फोटोरेजिस्ट और उन्नत रसायनों की आपूर्ति को लेकर समझौते किए हैं। ये सामग्रियाँ धोलेरा फैब परियोजनाओं में उपयोग की जाएंगी।
आम जनता और उद्योग पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की होड़ में है और अमेरिका, यूरोप, ताइवान व दक्षिण कोरिया के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है। गौरतलब है कि धोलेरा में टाटा की फैब यूनिट और असम के मोरीगाँव में माइक्रोन की पैकेजिंग सुविधा पहले से प्रगति पर है — और सेमीकॉन 2.0 के निवेश इन्हें घेरने वाली आपूर्ति शृंखला तैयार करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
यदि घोषित निवेश समयसीमा के भीतर साकार होते हैं, तो भारत न केवल चिप असेंबली बल्कि चिप-निर्माण सामग्री के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा — जो अभी तक पूरी तरह आयात पर निर्भर है। अगले चरण में क्षेत्रीय कार्यान्वयन योजनाओं और निवेशकों के साथ अनुबंधों की जानकारी सार्वजनिक होने की उम्मीद है।