31 अगस्त 2026
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सेमीकॉन 2.0: केंद्र सरकार ने अधिसूचित की ₹1.27 लाख करोड़ की चिप योजना, PSA-NSA की संयुक्त अध्यक्षता में बनेगा उच्चस्तरीय पैनल

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सेमीकॉन 2.0: केंद्र सरकार ने अधिसूचित की ₹1.27 लाख करोड़ की चिप योजना, PSA-NSA की संयुक्त अध्यक्षता में बनेगा उच्चस्तरीय पैनल

सारांश

केंद्र सरकार ने ₹1.27 लाख करोड़ की सेमीकॉन 2.0 योजना अधिसूचित की — यह केवल फैक्ट्रियों का वादा नहीं, बल्कि चिप डिजाइन से लेकर पैकेजिंग तक पूरी मूल्य शृंखला को घरेलू बनाने का दांव है। PSA और NSA की संयुक्त अध्यक्षता में बनने वाला पैनल इसे रणनीतिक राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंडे से सीधे जोड़ता है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 31 अगस्त 2026 को ₹1.27 लाख करोड़ की सेमीकॉन 2.0 योजना अधिसूचित की।
योजना को छह घटकों में विभाजित किया गया है — चिप डिजाइन, पूंजीगत उपकरण निर्माण, फैब्रिकेशन, असेंबली, पैकेजिंग और परीक्षण।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) की संयुक्त अध्यक्षता में उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की घोषणा की।
सरकार का लक्ष्य सेंसर जैसे उत्पादों में घरेलू जरूरतों का लगभग 100 प्रतिशत उत्पादन स्वयं करना है।
योजना का उद्देश्य विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटाते हुए एक आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।

केंद्र सरकार ने 31 अगस्त 2026 को ₹1.27 लाख करोड़ के परिव्यय वाली सेमीकॉन 2.0 योजना को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है, जिसका लक्ष्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिजाइन का प्रमुख केंद्र बनाना है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसके साथ ही एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन की घोषणा की, जो रणनीतिक सेमीकंडक्टर उत्पादों की पहचान करेगी।

योजना की संरचना और छह प्रमुख घटक

सरकारी अधिसूचना के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 को छह प्रमुख घटकों में विभाजित किया गया है। इनमें भारतीय कंपनियों द्वारा चिप डिजाइन, चिप निर्माण के लिए पूंजीगत उपकरणों का उत्पादन, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाइयाँ, चिप असेंबली, पैकेजिंग, परीक्षण और संबंधित औद्योगिक गतिविधियाँ सम्मिलित हैं। योजना के तहत उद्योग के प्रत्येक स्तर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार के अनुसार यह योजना केवल विनिर्माण क्षमता विस्तार तक सीमित नहीं है — इसका व्यापक उद्देश्य अनुसंधान, डिजाइन, निर्माण, परीक्षण, पैकेजिंग और विशेष उपकरण उत्पादन को एकीकृत करते हुए एक आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।

उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन

मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि सरकार एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन करेगी, जिसकी संयुक्त अध्यक्षता प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) करेंगे। यह समिति राष्ट्रीय महत्व, रणनीतिक आवश्यकताओं और दीर्घकालिक औद्योगिक प्राथमिकताओं के आधार पर उन चिप्स और सेमीकंडक्टर उत्पादों की पहचान करेगी जिन्हें योजना के तहत विशेष प्रोत्साहन मिलेगा।

वैष्णव ने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी निवेश उन क्षेत्रों में केंद्रित हो जहाँ देश की तकनीकी और रणनीतिक जरूरतें सर्वाधिक हैं।

आत्मनिर्भरता और विदेशी निर्भरता में कमी

वैष्णव ने यह भी रेखांकित किया कि सेमीकॉन 2.0 भारत की विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता को उल्लेखनीय रूप से कम करेगी। उन्होंने विशेष रूप से सेंसर जैसे उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में भारत अपनी घरेलू जरूरतों का लगभग 100 प्रतिशत उत्पादन स्वयं करने में सक्षम हो सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब COVID-19 महामारी के दौरान और उसके बाद वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं ने ऑटोमोबाइल से लेकर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स तक हर क्षेत्र को प्रभावित किया था। भारत ने उसके बाद से इस क्षेत्र को रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में चिन्हित किया है।

सेमीकंडक्टर की रणनीतिक अहमियत

गौरतलब है कि सेमीकंडक्टर आज इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), औद्योगिक स्वचालन और उपभोक्ता उपकरणों जैसे लगभग हर आधुनिक क्षेत्र की आधारभूत आवश्यकता बन चुके हैं। सेमीकॉन 2.0 इसी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मजबूत करने का प्रयास है, जिसमें अमेरिका, चीन, ताइवान और यूरोपीय देश भी अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं।

सेमीकॉन 2.0 के क्रियान्वयन की दिशा में अगले चरण में क्षेत्रवार दिशानिर्देश और आवेदन प्रक्रिया जारी होने की उम्मीद है, जो यह तय करेगी कि यह महत्वाकांक्षी योजना ज़मीन पर कितनी तेज़ी से आकार लेती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पिछली सेमीकॉन 1.0 योजना में अनुपस्थित था। परंतु असली कसौटी यह है कि क्या इस बार वित्तीय सहायता उत्पादन और रोजगार के सत्यापन-योग्य मील के पत्थरों से जुड़ेगी, क्योंकि सेमीकॉन 1.0 के तहत घोषित फैब परियोजनाएँ अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकीं। वैश्विक सेमीकंडक्टर प्रतिस्पर्धा में अमेरिका, चीन और ताइवान दशकों की बढ़त रखते हैं — भारत की 'संपूर्ण मूल्य शृंखला' रणनीति सही दिशा में है, लेकिन क्रियान्वयन की गति और पारदर्शिता ही यह तय करेगी कि यह घोषणा इतिहास में मील का पत्थर बनती है या महज एक और नीतिगत दस्तावेज।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेमीकॉन 2.0 योजना क्या है?
सेमीकॉन 2.0 केंद्र सरकार की ₹1.27 लाख करोड़ की सेमीकंडक्टर नीति है, जिसे 31 अगस्त 2026 को अधिसूचित किया गया। इसका उद्देश्य चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, असेंबली, पैकेजिंग और परीक्षण सहित पूरी मूल्य शृंखला में भारत की घरेलू क्षमता विकसित करना है।
सेमीकॉन 2.0 के तहत उच्चस्तरीय पैनल क्या करेगा?
यह पैनल प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) की संयुक्त अध्यक्षता में काम करेगा। यह राष्ट्रीय महत्व, रणनीतिक जरूरतों और दीर्घकालिक औद्योगिक प्राथमिकताओं के आधार पर उन चिप्स और सेमीकंडक्टर उत्पादों की पहचान करेगा जिन्हें विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।
सेमीकॉन 2.0 के छह घटक कौन-से हैं?
योजना के छह घटकों में भारतीय कंपनियों द्वारा चिप डिजाइन, चिप निर्माण के लिए पूंजीगत उपकरणों का उत्पादन, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाइयाँ, चिप असेंबली, पैकेजिंग एवं परीक्षण, और संबंधित औद्योगिक गतिविधियाँ शामिल हैं।
यह योजना भारत की विदेशी निर्भरता कैसे कम करेगी?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 के तहत सेंसर जैसे उत्पादों में भारत भविष्य में अपनी घरेलू जरूरतों का लगभग 100 प्रतिशत उत्पादन स्वयं करने में सक्षम हो सकता है। यह योजना आपूर्ति शृंखला में विदेशी स्रोतों पर निर्भरता को व्यवस्थित रूप से घटाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की यह पहल वैश्विक संदर्भ में कहाँ खड़ी है?
वैश्विक स्तर पर अमेरिका, चीन, ताइवान और यूरोपीय देश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं। COVID-19 महामारी के बाद आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं के बाद भारत ने इसे रणनीतिक प्राथमिकता घोषित किया था, और सेमीकॉन 2.0 उसी दिशा में अब तक का सबसे बड़ा नीतिगत कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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