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सेमीकॉन 2.0 से ₹5 लाख करोड़ से अधिक निजी निवेश की संभावना: आईईएसए

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सेमीकॉन 2.0 से ₹5 लाख करोड़ से अधिक निजी निवेश की संभावना: आईईएसए

सारांश

₹1.27 लाख करोड़ की सेमीकॉन 2.0 योजना अधिसूचित होते ही उद्योग जगत ने ₹5 लाख करोड़ से अधिक के निजी निवेश का अनुमान जताया। 6 स्तंभों पर टिकी यह योजना चिप डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन तक पूरी मूल्य शृंखला को कवर करती है — और भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा को नई धार देती है।

मुख्य बातें

सरकार ने 31 अगस्त को ₹1.27 लाख करोड़ परिव्यय वाली सेमीकॉन 2.0 योजना औपचारिक रूप से अधिसूचित की।
आईईएसए के अनुसार, योजना अगले 5 से 7 वर्षों में ₹5 लाख करोड़ से अधिक का संचयी निजी निवेश आकर्षित कर सकती है।
योजना सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला के 6 प्रमुख स्तंभों — चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, असेंबली, परीक्षण, पैकेजिंग और आरएंडडी — को एकीकृत करती है।
पहले चरण में 12 परियोजनाओं को मंजूरी और 100 से अधिक डिजाइन स्टार्टअप को सहयोग दिया जा चुका है।
पीएसए और एनएसए की संयुक्त अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति रणनीतिक सेमीकंडक्टर उत्पादों की पहचान करेगी।
सेमीकॉन 2.0 को ईसीएमएस, एमपीएमएस और ईएमसी जैसी योजनाओं के साथ समन्वित रूप से लागू करने की सिफारिश की गई है।

इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) ने कहा है कि सरकार द्वारा अधिसूचित ₹1.27 लाख करोड़ परिव्यय वाली सेमीकॉन 2.0 योजना अगले पाँच से सात वर्षों में ₹5 लाख करोड़ से अधिक का संचयी निजी निवेश आकर्षित करने की क्षमता रखती है। 31 अगस्त को इस योजना के औपचारिक अधिसूचन के बाद इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण (ईएसडीएम) उद्योग ने इसे भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को नई मजबूती देने वाला ऐतिहासिक कदम बताया है।

योजना का दायरा और संरचना

आईईएसए के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 पहले से चल रहे सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम का विस्तार है और सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला के 6 प्रमुख स्तंभों को कवर करती है। इनमें चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, असेंबली, परीक्षण, पैकेजिंग, उपकरण एवं सामग्री निर्माण, अनुसंधान एवं विकास तथा कुशल मानव संसाधन विकास शामिल हैं। आईईएसए ने कहा कि इस व्यापकता के कारण यह योजना संपूर्ण मूल्य शृंखला को एकीकृत करती है, जो पहले के कार्यक्रमों में अनुपस्थित था।

पहले चरण की उपलब्धियाँ

उद्योग संगठन ने बताया कि सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के पहले चरण ने पहले ही एक मजबूत आधार तैयार किया है। अब तक 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, 100 से अधिक डिजाइन स्टार्टअप को सहयोग प्रदान किया गया है और शैक्षणिक संस्थानों में इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) उपकरणों तक पहुँच बढ़ाई गई है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला पुनर्गठन के दौर से गुजर रही है और भारत एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने की कोशिश में है।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

आईईएसए के अध्यक्ष अशोक चंदक ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 की आधिकारिक अधिसूचना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के तुरंत बाद योजना को अधिसूचित करने की सरकार की गति नीति निरंतरता, प्रभावी क्रियान्वयन और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के प्रति गंभीरता दर्शाती है। चंदक ने यह भी रेखांकित किया कि सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश आमतौर पर 10 से 15 वर्षों के दीर्घकालिक नजरिए से किया जाता है, इसलिए नीतिगत स्थिरता निवेशकों के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके अनुसार, इससे घरेलू और वैश्विक दोनों निवेशकों का भारत पर भरोसा और मजबूत होगा।

रणनीतिक उच्चस्तरीय समिति

उद्योग ने सरकार के उस निर्णय का भी स्वागत किया है जिसके तहत प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) की संयुक्त अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति रणनीतिक महत्व वाले सेमीकंडक्टर उत्पादों की पहचान करेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रोत्साहन उन्हीं क्षेत्रों को मिले जो राष्ट्रीय जरूरतों और सुरक्षा प्राथमिकताओं के लिए अनिवार्य हैं। गौरतलब है कि यह प्रावधान सेमीकंडक्टर नीति को रक्षा और सामरिक क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल है।

व्यापक औद्योगिक प्रभाव और आगे की राह

चंदक ने कहा कि सरकार की वित्तीय सहायता को केवल सब्सिडी के रूप में नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित करने वाले उत्प्रेरक के रूप में देखा जाना चाहिए। सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार से मशीनरी, विशेष रसायन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और उच्च कौशल वाले मानव संसाधनों की माँग भी बढ़ेगी। आईईएसए ने यह भी कहा कि सेमीकॉन 2.0 को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस), मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (ईएमसी) जैसी योजनाओं के साथ मिलाकर देखा जाना चाहिए, क्योंकि इनके संयुक्त प्रभाव से घरेलू मूल्य संवर्धन और आत्मनिर्भर विनिर्माण को उल्लेखनीय बढ़ावा मिल सकता है। उद्योग संगठन ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अमितेश कुमार सिन्हा और पूरी मंत्रालयी टीम को इस पहल के सफल क्रियान्वयन के लिए बधाई दी है। भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा अब केवल नीतिगत दस्तावेजों तक सीमित नहीं रही — अगले कुछ वर्षों में फैब्रिकेशन इकाइयों और एटीएमपी सुविधाओं में वास्तविक निवेश की गति ही इस योजना की असली कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹5 लाख करोड़ निजी निवेश का अनुमान उद्योग संगठन का अपना प्रक्षेपण है — सरकारी गारंटी नहीं। असली परीक्षा यह है कि फैब्रिकेशन इकाइयाँ, जो दशकों की तकनीकी परिपक्वता और भारी पूँजी माँगती हैं, वास्तव में कितनी जल्दी जमीन पर उतरती हैं। पहले चरण की 12 मंजूर परियोजनाओं और 100 स्टार्टअप के आँकड़े उत्साहजनक हैं, पर ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से तुलना बताती है कि सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में पीढ़ियाँ लगती हैं। पीएसए-एनएसए समिति द्वारा रणनीतिक उत्पादों की पहचान एक सही कदम है, लेकिन क्रियान्वयन की पारदर्शिता और स्वतंत्र ऑडिट के बिना यह नीतिगत इरादा कागज़ पर ही रह सकता है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेमीकॉन 2.0 योजना क्या है और इसे कब अधिसूचित किया गया?
सेमीकॉन 2.0 भारत सरकार की ₹1.27 लाख करोड़ परिव्यय वाली सेमीकंडक्टर योजना है, जिसे 31 अगस्त 2026 को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया गया। यह पहले से चल रहे सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम का विस्तार है और चिप डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, परीक्षण और मानव संसाधन विकास तक की पूरी मूल्य शृंखला को कवर करती है।
सेमीकॉन 2.0 से ₹5 लाख करोड़ निवेश का अनुमान कैसे लगाया गया?
यह अनुमान आईईएसए ने मौजूदा निवेश पाइपलाइन और योजना के विस्तारित दायरे के आधार पर लगाया है। इसमें फैब्रिकेशन इकाइयों, एटीएमपी और ओसैट सुविधाओं, उपकरण एवं सामग्री निर्माण, आरएंडडी, चिप डिजाइन और आपूर्ति शृंखला से जुड़े क्षेत्रों में अगले 5 से 7 वर्षों में आने वाले निवेश को जोड़ा गया है।
सेमीकॉन 2.0 के तहत रणनीतिक उत्पादों की पहचान कौन करेगा?
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) की संयुक्त अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति रणनीतिक महत्व वाले सेमीकंडक्टर उत्पादों की पहचान करेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रोत्साहन राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक प्राथमिकताओं से जुड़े क्षेत्रों को मिले।
सेमीकॉन इंडिया के पहले चरण में क्या हासिल हुआ?
पहले चरण में 12 परियोजनाओं को सरकारी मंजूरी मिली, 100 से अधिक डिजाइन स्टार्टअप को सहयोग प्रदान किया गया और शैक्षणिक संस्थानों में इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) उपकरणों तक पहुँच बढ़ाई गई। आईईएसए के अनुसार, इन कदमों ने उद्योग में विश्वास और एक ठोस आधार तैयार किया है।
सेमीकॉन 2.0 को किन अन्य योजनाओं के साथ मिलाकर देखना चाहिए?
आईईएसए ने सिफारिश की है कि सेमीकॉन 2.0 को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस), मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (ईएमसी) के साथ समन्वित रूप से लागू किया जाए। इन पहलों के संयुक्त प्रभाव से घरेलू मूल्य संवर्धन, तकनीकी विकास और आत्मनिर्भर विनिर्माण को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिल सकता है।
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