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सेमिकॉन 2.0 से पाँच वर्षों में 2 लाख रोज़गार संभव, ₹1.27 लाख करोड़ की योजना को मंजूरी

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सेमिकॉन 2.0 से पाँच वर्षों में 2 लाख रोज़गार संभव, ₹1.27 लाख करोड़ की योजना को मंजूरी

सारांश

सेमिकॉन 2.0 सिर्फ एक नीतिगत घोषणा नहीं — यह भारत की असेंबली-लाइन पहचान को बदलने का दाँव है। ₹1.27 लाख करोड़ के परिव्यय और 2 लाख रोज़गार के अनुमान के साथ, यह योजना देश को चिप डिजाइन और इनोवेशन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षा रखती है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1.27 लाख करोड़ के परिव्यय के साथ सेमिकॉन 2.0 योजना को मंजूरी दी।
उद्योग जगत के अनुसार अगले पाँच वर्षों में 1.5 लाख से 2 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित हो सकते हैं।
2030 तक सेमीकंडक्टर क्षेत्र के 70% पदों की प्रकृति बदलेगी; GCC की संख्या में 25-30% वृद्धि संभव — एनएलबी सर्विसेज ।
सरकार अब तक 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है, कुल निवेश ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक।
सेमिकॉन 1.0 के तहत $20 अरब से अधिक के प्रोजेक्ट आकर्षित हुए — IESA ।
योजना के 6 स्तंभ : चिप डिजाइन, उपकरण-सामग्री, फैब्रिकेशन, ATMP/OSAT, R&D और प्रतिभा विकास।

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹1.27 लाख करोड़ के बजट परिव्यय के साथ मंजूर की गई सेमिकॉन 2.0 योजना अगले पाँच वर्षों में 1.5 लाख से 2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित कर सकती है — यह आकलन उद्योग जगत ने 17 जुलाई 2026 को सामने रखा। इस पहल का लक्ष्य भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को असेंबली-आधारित उत्पादन की सीमाओं से बाहर निकालकर चिप डिजाइन, इंजीनियरिंग और इनोवेशन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

योजना का दायरा और फोकस क्षेत्र

एनएलबी सर्विसेज के विश्लेषण के अनुसार, सेमिकॉन 2.0 का अगला चरण केवल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहेगा। इसके अंतर्गत चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस्ड पैकेजिंग और इंटेलिजेंट सप्लाई चेन ऑपरेशंस को शामिल करते हुए एक समग्र इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार ने इस योजना के तहत 6 प्रमुख स्तंभ निर्धारित किए हैं — चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण एवं सामग्री, फैब्रिकेशन सुविधाएँ, ATMP/OSAT यूनिट्स, अनुसंधान एवं विकास (R&D), और प्रतिभा विकास।

उद्योग विशेषज्ञों का आकलन

एनएलबी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन अलुग ने कहा कि वर्ष 2030 तक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम से जुड़े लगभग 70 प्रतिशत पदों की प्रकृति बदल जाएगी, जिससे उच्च कौशल वाले इंजीनियरिंग पेशेवरों की माँग में तेज़ बढ़ोतरी होगी। उन्होंने यह भी अनुमान जताया कि 2030 तक सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर केंद्रित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की संख्या में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है, जिससे भारत वैश्विक इंजीनियरिंग, रिसर्च और इनोवेशन हब के रूप में और मज़बूत होगा।

अलुग ने यह भी रेखांकित किया कि सेमिकॉन 2.0 भारत को वैल्यू चेन में ऊपर ले जाने का अवसर देगी — चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और एडवांस्ड पैकेजिंग जैसे उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों में क्षमता निर्माण से बौद्धिक संपदा (IP) का सृजन होगा और दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल होगी।

सेमिकॉन 1.0 की उपलब्धियाँ और 2.0 से अपेक्षाएँ

इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) के अनुसार, सेमिकॉन 1.0 के तहत $20 अरब (लगभग ₹1.64 लाख करोड़) से अधिक के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट आकर्षित किए जा चुके हैं और सरकार अब तक 12 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है। सेमिकॉन 2.0 में फैब यूनिट्स, एडवांस्ड पैकेजिंग, डिजाइन, R&D, प्रतिभा विकास, उपकरण और कच्चे माल पर अधिक जोर देकर भारत को वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर साझेदार बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

गौरतलब है कि यह आकलन ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की होड़ में भारत, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे स्थापित सेमीकंडक्टर केंद्रों के विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है।

आगे की राह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई यह योजना भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रियान्वयन समयबद्ध और लक्ष्य-केंद्रित रहा, तो भारत 2030 तक वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान हासिल कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र दशकों से असेंबली की परिधि में बँधा रहा है और चिप डिजाइन में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए प्रतिभा पाइपलाइन तत्काल तैयार नहीं होती। 2030 तक 70% पदों की प्रकृति बदलने का अनुमान रोज़गार सृजन के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पुनः-कौशल की चुनौती भी सामने रखता है, जिस पर योजना में पर्याप्त स्पष्टता अभी नहीं दिखती। यदि GCC विस्तार और फैब निर्माण समानांतर नहीं चले, तो रोज़गार के आँकड़े कागज़ों तक सीमित रह सकते हैं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेमिकॉन 2.0 योजना क्या है?
सेमिकॉन 2.0 भारत सरकार की सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मज़बूत करने की नई पहल है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1.27 लाख करोड़ के बजट परिव्यय के साथ मंजूरी दी है। यह योजना चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग, R&D और प्रतिभा विकास सहित 6 प्रमुख स्तंभों पर आधारित है।
सेमिकॉन 2.0 से कितने रोज़गार पैदा होंगे?
उद्योग जगत के अनुमान के अनुसार सेमिकॉन 2.0 अगले पाँच वर्षों में 1.5 लाख से 2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित कर सकती है। एनएलबी सर्विसेज के विश्लेषण के मुताबिक 2030 तक सेमीकंडक्टर क्षेत्र के 70% पदों की प्रकृति बदल जाएगी और उच्च-कौशल इंजीनियरिंग पेशेवरों की माँग तेज़ी से बढ़ेगी।
सेमिकॉन 1.0 और सेमिकॉन 2.0 में क्या अंतर है?
सेमिकॉन 1.0 मुख्यतः निवेश आकर्षण पर केंद्रित था, जिसके तहत $20 अरब से अधिक के प्रोजेक्ट आए। सेमिकॉन 2.0 इससे आगे बढ़कर फैब यूनिट्स, एडवांस्ड पैकेजिंग, चिप डिजाइन, R&D, प्रतिभा विकास और कच्चे माल पर अधिक जोर देता है, ताकि भारत एक भरोसेमंद वैश्विक सेमीकंडक्टर साझेदार बन सके।
सेमिकॉन 2.0 से किन क्षेत्रों को फायदा होगा?
इस योजना से चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सिस्टम, EDA, AI-आधारित मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस्ड पैकेजिंग और इंटेलिजेंट सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। साथ ही ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की संख्या में 2030 तक 25-30% वृद्धि का अनुमान है।
अब तक सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कितना निवेश मंजूर किया है?
सरकार अब तक 12 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है, जिनमें कुल निवेश ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक है। सेमिकॉन 2.0 के लिए ₹1.27 लाख करोड़ का अतिरिक्त बजट परिव्यय निर्धारित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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