भारत सेमीकंडक्टर मिशन को बड़ा बढ़ावा: कैबिनेट ने दो नए प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी, ₹3,936 करोड़ का निवेश

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भारत सेमीकंडक्टर मिशन को बड़ा बढ़ावा: कैबिनेट ने दो नए प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी, ₹3,936 करोड़ का निवेश

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत दो नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी — एक धोलेरा में देश की पहली GaN-आधारित मिनी/माइक्रो-एलईडी फैसिलिटी, दूसरी सूरत में OSAT यूनिट। ₹3,936 करोड़ के इस निवेश से मिशन का कुल निवेश ₹1.64 लाख करोड़ तक पहुँच गया है।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने 5 मई 2025 को भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत दो नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी।
दोनों प्रोजेक्ट गुजरात में लगेंगे — कुल निवेश ₹3,936 करोड़ , अनुमानित रोज़गार 2,230 ।
क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड धोलेरा में देश की पहली कमर्शियल GaN-आधारित मिनी/माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले फैसिलिटी स्थापित करेगी।
सुची सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड सूरत में OSAT यूनिट लगाएगी, जो सालाना 1,033 मिलियन से अधिक चिप्स बनाएगी।
मिशन के तहत कुल स्वीकृत प्रोजेक्ट्स की संख्या 12 हुई, कुल निवेश ₹1.64 लाख करोड़ तक पहुँचा।
315 शैक्षणिक संस्थानों और 104 स्टार्टअप्स को डिज़ाइन इन्फ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट दिया जा रहा है।

केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार, 5 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में भारत सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत दो नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, जिनमें कुल मिलाकर ₹3,936 करोड़ का निवेश होगा और लगभग 2,230 कुशल रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है। दोनों प्रोजेक्ट गुजरात में स्थापित किए जाएंगे और 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत देश की चिप मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

दो प्रोजेक्ट्स का विवरण

पहला प्रोजेक्ट क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड द्वारा गुजरात के धोलेरा में विकसित किया जाएगा। यह देश की पहली कमर्शियल मिनी/माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले फैसिलिटी होगी, जो गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक पर आधारित होगी। यह प्लांट कंपाउंड सेमीकंडक्टर निर्माण, असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) पर केंद्रित रहेगा और प्रतिवर्ष 72,000 वर्ग मीटर डिस्प्ले पैनल तथा 24,000 RGB वेफर्स का उत्पादन करेगा।

इस यूनिट में निर्मित उत्पादों का उपयोग टीवी, स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल डिस्प्ले, स्मार्टवॉच और एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) जैसे अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों में होगा। यह यूनिट GaN फाउंड्री सेवाएं भी प्रदान करेगी।

दूसरा प्रोजेक्ट सुची सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सूरत में स्थापित किया जाएगा। यह एक आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (OSAT) यूनिट होगी, जो प्रतिवर्ष 1,033 मिलियन से अधिक चिप्स का उत्पादन करेगी। ये चिप्स पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, एनालॉग सर्किट्स और इंडस्ट्रियल सिस्टम्स में इस्तेमाल होंगे, जिससे ऑटोमोबाइल, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा।

मिशन की कुल स्थिति

इन दो नए प्रोजेक्ट्स के जुड़ने से भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत स्वीकृत प्रोजेक्ट्स की कुल संख्या 12 हो गई है और कुल निवेश बढ़कर लगभग ₹1.64 लाख करोड़ तक पहुँच गया है। गौरतलब है कि पहले से मंजूर प्रोजेक्ट्स में से दो यूनिट्स ने उत्पादन शुरू कर दिया है और दो अन्य शीघ्र ही परिचालन में आने वाली हैं।

शिक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम को सपोर्ट

सरकार ने बताया कि देश में सेमीकंडक्टर सेक्टर की दीर्घकालिक नींव मज़बूत करने के लिए 315 शैक्षणिक संस्थानों और 104 स्टार्टअप्स को डिज़ाइन इन्फ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट प्रदान किया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की माँग तेज़ हो रही है और भारत इस अवसर का लाभ उठाने की स्थिति में है।

व्यापक महत्व और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच वैश्विक कंपनियाँ आपूर्ति श्रृंखला में विविधता की तलाश में हैं। भारत की बढ़ती चिप डिज़ाइन क्षमता — जो पहले से ही वैश्विक सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इंजीनियरों का एक बड़ा हिस्सा है — अब मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के साथ जुड़ने की ओर अग्रसर है। सरकार का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स से भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता और मज़बूत होगी तथा चिप डिज़ाइन में देश की बढ़ती ताकत को और समर्थन मिलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि उत्पादन लक्ष्य समयसीमा के भीतर पूरे होते हैं या नहीं — जो वैश्विक सेमीकंडक्टर परियोजनाओं में अक्सर पिछड़ जाते हैं। धोलेरा की GaN फैसिलिटी तकनीकी दृष्टि से महत्वाकांक्षी है, क्योंकि यह एक ऐसे क्षेत्र में प्रवेश है जहाँ ताइवान और दक्षिण कोरिया दशकों की बढ़त रखते हैं। सूरत की OSAT यूनिट अधिक व्यावहारिक दांव है — असेंबली और टेस्टिंग में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक लागत संरचना एक वास्तविक लाभ है। सवाल यह है कि क्या यह पारिस्थितिकी तंत्र घरेलू चिप डिज़ाइन प्रतिभा को वास्तविक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में बदल पाएगा, या यह फिर एक बार असेंबली-केंद्रित मॉडल तक सीमित रह जाएगा।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत नए प्रोजेक्ट्स क्या हैं?
कैबिनेट ने 5 मई 2025 को दो नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी — धोलेरा में क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड की GaN-आधारित मिनी/माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले फैसिलिटी और सूरत में सुची सेमीकॉन की OSAT यूनिट। दोनों प्रोजेक्ट्स में कुल ₹3,936 करोड़ का निवेश होगा।
इन प्रोजेक्ट्स से कितने रोज़गार मिलेंगे?
इन दोनों प्रोजेक्ट्स से लगभग 2,230 कुशल रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है। ये पद मुख्यतः सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, टेस्टिंग और संबद्ध तकनीकी क्षेत्रों में होंगे।
धोलेरा सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट क्यों खास है?
धोलेरा में क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड की फैसिलिटी देश की पहली कमर्शियल मिनी/माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले यूनिट होगी, जो GaN तकनीक पर आधारित होगी। यह सालाना 72,000 वर्ग मीटर डिस्प्ले पैनल और 24,000 RGB वेफर्स बनाएगी, जो स्मार्टफोन से लेकर XR डिवाइस तक में उपयोगी होंगे।
भारत सेमीकंडक्टर मिशन में अब तक कुल कितना निवेश हुआ है?
इन दो नए प्रोजेक्ट्स के साथ मिशन के तहत कुल स्वीकृत प्रोजेक्ट्स की संख्या 12 हो गई है और कुल निवेश लगभग ₹1.64 लाख करोड़ तक पहुँच गया है। इनमें से दो यूनिट्स ने पहले ही उत्पादन शुरू कर दिया है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में शिक्षा और स्टार्टअप्स को क्या सहायता मिल रही है?
सरकार 315 शैक्षणिक संस्थानों और 104 स्टार्टअप्स को डिज़ाइन इन्फ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट प्रदान कर रही है, ताकि देश में चिप डिज़ाइन और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दीर्घकालिक नींव मज़बूत हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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