भारत की सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ, पीएम मोदी ने दी अपनी पहचान को मजबूती
सारांश
Key Takeaways
- भारत का सेमीकंडक्टर मिशन आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
- गुजरात में केयन्स टेक्नोलॉजी का प्लांट वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन गया है।
- 1.60 लाख करोड़ रुपये का निवेश छह राज्यों में हो रहा है।
- भारत का सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हो रहा है।
- पीएम मोदी ने भविष्य की तकनीक की दिशा में भारत का नेतृत्व करने का संकल्प लिया।
अहमदाबाद, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर उद्योग को लेकर भारत ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को केन्स सेमीकॉन की आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (ओएसएटी) सुविधा का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि भारत अब वैश्विक बाजार में एक विश्वसनीय सेमीकंडक्टर आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी स्थिति को मजबूती से स्थापित कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि 2021 में भारत ने 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' की शुरुआत की थी। यह मिशन केवल एक औद्योगिक नीति नहीं है, बल्कि यह भारत के आत्मविश्वास की प्रतीक है। इस मिशन के तहत देश के छह राज्यों में 1.60 लाख करोड़ रुपये के 10 प्रमुख प्रोजेक्ट्स पर कार्य चल रहा है।
पीएम मोदी ने हाल की उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि 28 फरवरी को माइक्रॉन के प्लांट में उत्पादन प्रारंभ हुआ और अब 31 मार्च को केयन्स टेक्नोलॉजी के सेमीकंडक्टर प्लांट का उत्पादन भी शुरू हो गया है। यह संयोग नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि भारत का सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र कितनी तेजी से उभर रहा है।
उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि एक भारतीय कंपनी ने सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में रुचि दिखाई और अब उसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, "भारत की अपनी कंपनी केयन्स टेक्नोलॉजी अब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। यह एक शानदार शुरुआत और देश के लिए गर्व का क्षण है।"
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भविष्य में भारत की कई कंपनियाँ वैश्विक सहयोग के माध्यम से एक मजबूत सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। आज का दिन 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' के दृष्टिकोण को साकार करता है।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि 21वीं सदी केवल आर्थिक प्रतिस्पर्धा का युग नहीं है, बल्कि यह भविष्य की प्रौद्योगिकी को दिशा देने का समय है। भारत अब केवल परिवर्तन का साक्षी नहीं है, बल्कि परिवर्तन का नेतृत्व करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि इस दशक में भारत द्वारा किए गए तकनीकी प्रयास आने वाले दशकों में देश की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएंगे।