सेमीकॉन 2.0 और एमपीएमएस से 3.6 लाख से अधिक रोज़गार का लक्ष्य, भारत बनेगा वैश्विक सेमीकंडक्टर हब
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में स्वीकृत सेमीकॉन 2.0 और मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) को लेकर उद्योग जगत ने उत्साहजनक प्रतिक्रिया दी है। उद्योग संगठनों के अनुसार, ये दोनों योजनाएँ भारत को महज़ मोबाइल असेंबली केंद्र की भूमिका से ऊपर उठाकर संपूर्ण सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में स्थापित करेंगी और मिलकर 3.6 लाख से अधिक नए रोज़गार सृजित कर सकती हैं। नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, यह घोषणा 16 जुलाई 2026 को सामने आई।
योजनाओं का आर्थिक खाका
उद्योग निकायों के अनुमान के मुताबिक, सेमीकॉन 2.0 के तहत 40 से 50 अरब डॉलर तक का नया निवेश आकर्षित होने की संभावना है, जिससे 2 से 3 लाख उच्च-कौशल रोज़गार पैदा हो सकते हैं। सरकार ने इस योजना के लिए ₹1.27 लाख करोड़ की मंजूरी दी है।
वहीं, एमपीएमएस के लिए ₹62,500 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इस योजना से 60,000 अतिरिक्त प्रत्यक्ष नौकरियाँ बनने का अनुमान है। आँकड़ों के अनुसार, एमपीएमएस के ज़रिये मोबाइल उत्पादन का कुल मूल्य बढ़कर लगभग ₹39 लाख करोड़ और निर्यात बढ़कर करीब ₹15 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है।
सेमीकॉन 2.0 में क्या नया है
इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) ने बताया कि सेमीकॉन 1.0 के अंतर्गत पहले ही 20 अरब डॉलर से अधिक के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट घोषित हो चुके हैं। नए चरण में सेमीकंडक्टर फैब, एडवांस पैकेजिंग, चिप डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), स्किल डेवलपमेंट, मशीनरी और कच्चे माल पर विशेष बल दिया गया है।
आईईएसए और एसईएमआई इंडिया के अध्यक्ष अशोक चंदक ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 भारत के लिए नीति निर्माण से बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन की दिशा में निर्णायक कदम है। उनके अनुसार, 'पहले चरण ने भारत की विश्वसनीयता स्थापित की, जबकि दूसरा चरण देश की दीर्घकालिक क्षमता निर्माण पर केंद्रित है।' चंदक ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरणों पर खर्च 2028 तक लगभग 230 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है और भारत इस अवसर का लाभ उठाने की मजबूत स्थिति में है।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने कहा कि सरकार की यह नीतिगत निरंतरता भारत को सेमीकंडक्टर उद्योग में वैश्विक स्किल कैपिटल बनाने में सहायक होगी। उनके मुताबिक, डिजाइन, अनुसंधान, पूंजीगत उपकरण और कौशल विकास पर ज़ोर देकर यह योजना देश में मज़बूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करेगी।
ऑप्टीमस इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (ओईएल) के चेयरमैन अशोक गुप्ता ने एमपीएमएस को 'ऐतिहासिक कदम' बताते हुए कहा कि यह योजना प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम की सफलता को आगे बढ़ाएगी। गुप्ता के अनुसार, यह नीति दीर्घकालिक निवेशक विश्वास, स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास और भारत को उन्नत मोबाइल फोन निर्माण के वैश्विक पसंदीदा केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में चीन के विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है। उद्योग संगठनों का मानना है कि इन योजनाओं से घरेलू वैल्यू एडिशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। गौरतलब है कि भारत अब तक मुख्यतः असेंबली-स्तर के मोबाइल निर्माण तक सीमित रहा है; नई योजनाएँ इस ढाँचे को बदलने का लक्ष्य रखती हैं।
आने वाले महीनों में क्रियान्वयन की गति और निवेशकों की वास्तविक प्रतिबद्धता यह तय करेगी कि भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक हब बनने के अपने लक्ष्य को कितनी तेज़ी से हासिल कर पाता है।