16 जुलाई 2026
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कर्नाटक में सूखे की मार: डिप्टी सीएम परमेश्वर ने PM मोदी को पत्र लिखकर मांगी NDRF राहत

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कर्नाटक में सूखे की मार: डिप्टी सीएम परमेश्वर ने PM मोदी को पत्र लिखकर मांगी NDRF राहत

सारांश

कर्नाटक में जून में 42% और जुलाई में 34% कम बारिश के बीच डिप्टी सीएम परमेश्वर ने PM मोदी को पत्र लिख NDRF नियमों में राहत, FRUITS डेटाबेस की मान्यता और स्थिति को 'राष्ट्रीय महत्व की आपदा' घोषित करने की माँग की है — 80% फसल बर्बाद होने की आशंका के बीच।

मुख्य बातें

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी.
परमेश्वर ने 16 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सूखे पर तत्काल केंद्रीय हस्तक्षेप के लिए पत्र लिखा।
जून में कर्नाटक में 42 प्रतिशत और जुलाई में 34 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज; विजयनगर में सबसे अधिक 61 प्रतिशत कमी।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में 80 प्रतिशत बोई गई फसल बर्बाद; मुख्य कारण एल नीनो का प्रभाव।
सूखा मैनुअल-2020 और SDRF/NDRF मानकों में विसंगति — 33% बनाम 50% फसल नुकसान की शर्त पर राहत का विरोधाभास उजागर।
परमेश्वर ने स्थिति को 'राष्ट्रीय महत्व की आपदा' घोषित करने या समकक्ष सहायता देने की माँग की।
FRUITS डेटाबेस को छोटे-सीमांत किसानों की पहचान के लिए मान्यता देने और 2015-16 की पुरानी कृषि जनगणना से आगे बढ़ने का आग्रह।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने 16 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में गहराते सूखे संकट पर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। कमज़ोर दक्षिण-पश्चिम मानसून के चलते कर्नाटक में जून में 42 प्रतिशत और जुलाई में अब तक 34 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे खेती, पेयजल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।

वर्षा की कमी और फसल नुकसान

परमेश्वर ने अपने पत्र में बताया कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में 80 प्रतिशत तक बोई गई फसल बर्बाद हो चुकी है। उन्होंने इसके लिए मुख्य रूप से एल नीनो के प्रभाव को ज़िम्मेदार बताया। कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में 36 प्रतिशत और बेंगलुरु में सामान्य से 34 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड हुई है।

सबसे गंभीर स्थिति विजयनगर (61 प्रतिशत कमी), मैसूर (55 प्रतिशत), मडिकेरी (51 प्रतिशत), चिक्कमगलुरु (48 प्रतिशत), दावणगेरे (47 प्रतिशत), हावेरी (46 प्रतिशत), शिवमोग्गा (44 प्रतिशत), कलबुर्गी (43 प्रतिशत), मंगलुरु (43 प्रतिशत) और बीदर (40 प्रतिशत) जिलों में है। कई जिलों में भूजल स्तर तेज़ी से गिर रहा है, जिससे सिंचाई और पेयजल का संकट और गहरा हो गया है।

NDRF और राहत नियमों में बदलाव की माँग

उपमुख्यमंत्री ने केंद्र से आग्रह किया कि कर्नाटक द्वारा आधिकारिक सूखा ज्ञापन भेजने से पहले ही मौजूदा सूखा आकलन नियमों की समीक्षा की जाए। उन्होंने FRUITS (किसान पंजीकरण और एकीकृत लाभार्थी सूचना प्रणाली) डेटाबेस को छोटे और सीमांत किसानों की पहचान के लिए मान्यता देने की माँग की, क्योंकि वर्तमान में 2015-16 की कृषि जनगणना के आधार पर सहायता तय होती है, जो राज्य की मौजूदा कृषि वास्तविकता को नहीं दर्शाती।

परमेश्वर ने सूखा मैनुअल-2020 के प्रावधानों को SDRF और NDRF के मानकों के अनुरूप बनाने की भी माँग रखी। उन्होंने इस विसंगति की ओर ध्यान दिलाया कि मौजूदा राहत दिशानिर्देशों में 33 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान पर सहायता मिलती है, जबकि सूखा मैनुअल में 50 प्रतिशत नुकसान पर ही गंभीर सूखे की श्रेणी तय होती है — यह अंतर किसानों को समय पर राहत पाने से रोकता है।

वैज्ञानिक आधार पर सूखे की जल्द पहचान की अपील

परमेश्वर ने केंद्र से सूखे के आकलन में अधिक लचीलापन अपनाने, वैज्ञानिक आधार पर कम अवधि के सूखे को भी मान्यता देने और सूखे की शीघ्र घोषणा से जुड़े नियमों में बदलाव करने का आग्रह किया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में खरीफ सीज़न की बुवाई चरम पर होनी चाहिए थी, लेकिन पानी की कमी के कारण बड़े पैमाने पर खेत खाली पड़े हैं।

राष्ट्रीय आपदा घोषणा की माँग

पत्र में परमेश्वर ने केंद्र सरकार से यह भी अपील की कि मौजूदा हालात को 'राष्ट्रीय महत्व की आपदा' घोषित किया जाए या उसी स्तर की वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र का समय पर हस्तक्षेप लाखों किसानों को राहत देने, पेयजल संकट से निपटने और सार्वजनिक जल आपूर्ति पर निर्भर करोड़ों लोगों की सुरक्षा के लिए अत्यंत ज़रूरी है। गौरतलब है कि कर्नाटक पिछले कुछ वर्षों में बार-बार सूखे की मार झेल रहा है, और यह पत्र राज्य की बढ़ती चिंताओं का आधिकारिक संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि जलवायु परिवर्तन के कारण सूखे की प्रकृति और तीव्रता बदल चुकी है। 33% बनाम 50% फसल नुकसान की शर्त का विरोधाभास किसानों को उस दौर में राहत से वंचित रखता है जब वे सबसे कमज़ोर होते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब एल नीनो के प्रभाव से दक्षिण भारत के कई राज्य एक साथ प्रभावित हैं — केंद्र को व्यक्तिगत राज्य अनुरोधों से परे एक समन्वित राष्ट्रीय सूखा नीति की ज़रूरत है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में सूखे की मौजूदा स्थिति कितनी गंभीर है?
कर्नाटक में जून 2026 में सामान्य से 42 प्रतिशत और जुलाई में 34 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में 80 प्रतिशत तक बोई गई फसल बर्बाद हो चुकी है और कई जिलों में भूजल स्तर तेज़ी से गिर रहा है।
डिप्टी सीएम परमेश्वर ने PM मोदी से क्या-क्या माँगें रखी हैं?
उन्होंने NDRF नियमों में राहत, FRUITS डेटाबेस को मान्यता, सूखा मैनुअल-2020 को SDRF/NDRF मानकों के अनुरूप बनाने, वैज्ञानिक आधार पर कम अवधि के सूखे की मान्यता और स्थिति को 'राष्ट्रीय महत्व की आपदा' घोषित करने की माँग की है। साथ ही आधिकारिक ज्ञापन से पहले ही सूखा आकलन नियमों की समीक्षा का आग्रह किया है।
सूखा मैनुअल-2020 और NDRF मानकों में क्या विरोधाभास है?
मौजूदा NDRF राहत दिशानिर्देशों के तहत 33 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान पर सहायता दी जाती है, जबकि सूखा मैनुअल-2020 में 50 प्रतिशत नुकसान होने पर ही गंभीर सूखे की श्रेणी मानी जाती है। यह अंतर किसानों को समय पर राहत पाने से रोकता है।
FRUITS डेटाबेस को मान्यता देने की माँग क्यों की गई है?
वर्तमान में केंद्र 2015-16 की कृषि जनगणना के आधार पर सहायता तय करता है, जो एक दशक पुरानी है और राज्य की मौजूदा कृषि वास्तविकता को नहीं दर्शाती। FRUITS डेटाबेस में छोटे और सीमांत किसानों का अद्यतन पंजीकरण है, जिससे राहत सटीक और व्यापक रूप से पहुँच सके।
कर्नाटक के किन जिलों में वर्षा की सबसे अधिक कमी है?
विजयनगर में 61 प्रतिशत, मैसूर में 55 प्रतिशत और मडिकेरी में 51 प्रतिशत वर्षा की कमी सबसे अधिक है। इसके अलावा चिक्कमगलुरु (48%), दावणगेरे (47%), हावेरी (46%), शिवमोग्गा (44%), कलबुर्गी (43%), मंगलुरु (43%) और बीदर (40%) भी गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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