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भगवान श्रीकृष्ण पर मौलाना जरजिस के बयान पर अयोध्या के संतों का कड़ा पलटवार

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भगवान श्रीकृष्ण पर मौलाना जरजिस के बयान पर अयोध्या के संतों का कड़ा पलटवार

सारांश

इटावा के मौलाना जरजिस अंसारी के भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम बताने के कथित बयान ने अयोध्या के संतों को आक्रोशित कर दिया। जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने इसे 'अशांति फैलाने वाला' करार देते हुए PM, राष्ट्रपति और गृह मंत्री से कड़ी कार्रवाई की माँग की।

मुख्य बातें

मौलाना जरजिस अंसारी (इटावा, उत्तर प्रदेश) ने कथित तौर पर भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम और पाँच वक्त का नमाज़ी बताया।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य (तपस्वी छावनी, अयोध्या) ने बयान को 'तथ्यहीन, साक्ष्यहीन और अशांति फैलाने वाला' कहा।
आचार्य ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और गृह मंत्री से मौलाना जरजिस के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की माँग की।
संत धर्मदास महाराज ने बयान को 'ज्ञान की कमी' बताया और कहा कि भगवान श्रीकृष्ण सर्वव्यापी हैं, उन्हें किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं किया जा सकता।
संतों ने राम मंदिर दान विवाद पर भी कहा कि श्रद्धालु राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि भक्ति-भाव से दान करते हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर न्यायालय में प्रक्रिया जारी है।

अयोध्या के संतों ने 16 जुलाई को इटावा (उत्तर प्रदेश) के मौलाना जरजिस अंसारी के उस कथित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसमें उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम और पाँच वक्त का नमाज़ी बताया था। तपस्वी छावनी, अयोध्या के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने इस बयान को 'तथ्यहीन, साक्ष्यहीन और देश में अशांति फैलाने वाला' करार दिया।

जगद्गुरु परमहंस आचार्य की प्रतिक्रिया

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण 'लीला पुरुषोत्तम और साक्षात परमात्मा' हैं और उन्हें किसी एक मज़हब तक सीमित करना अमानवीय है। उन्होंने कहा, 'नमाज़ में पढ़े जाने वाले कलमे का अर्थ यह है कि अल्लाह के अलावा कोई पूजा के योग्य नहीं है — ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण को नमाज़ी बताना भारतीय संस्कृति के सर्वथा विपरीत है।' उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ को लेकर पहले भी विवाद उठ चुके हैं और इस तरह के बयान सामाजिक तनाव को बढ़ावा देते हैं।

आचार्य ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और गृह मंत्री से माँग की कि मौलाना जरजिस अंसारी के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि समाज में शांति बनी रहे।

संत धर्मदास महाराज का बयान

अयोध्या के संत धर्मदास महाराज ने भी मौलाना जरजिस के बयान को 'ज्ञान की कमी' का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, 'सनातन संस्कृति अत्यंत प्राचीन है — मुस्लिम, बौद्ध और ईसाई धर्मों का इतिहास उसके बाद का है।' उनके अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण सर्वव्यापी हैं और उन्हें किसी एक विचारधारा की परिधि में नहीं बाँधा जा सकता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनगिनत संतों और भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति की है, इसलिए बिना पर्याप्त जानकारी के इस विषय पर बयान देना उचित नहीं।

राम मंदिर दान विवाद पर संतों की राय

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन्होंने सच्ची श्रद्धा से दान नहीं किया, उनका चढ़ावा स्वीकार नहीं हुआ — संत धर्मदास महाराज ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में दान करने वाले श्रद्धालु किसी पार्टी या वर्ग के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी भक्ति और समर्पण भाव से योगदान करते हैं। उन्होंने कहा, 'जो व्यक्ति मंदिर में दान करता है, वह अपनी श्रद्धा से करता है — कोई भी भक्त लालच या राजनीतिक लाभ के लिए दान नहीं करता।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग दान को राजनीति से जोड़ते हैं, उन्हें पहले अपने स्वयं के योगदान का हिसाब देना चाहिए। मंदिरों में श्रद्धा से दिया गया छोटे से छोटा दान भी महत्वपूर्ण होता है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर टिप्पणी

संत धर्मदास महाराज ने बताया कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर न्यायालय में प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय उसी के अनुसार होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपनी श्रद्धा से भगवान राम को चढ़ावा चढ़ाते हैं। मंदिर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर विचार तथ्यों के आधार पर होना चाहिए, न कि राजनीतिक दृष्टिकोण से।

आगे की स्थिति

संतों की माँग के बाद यह देखना होगा कि केंद्र और राज्य सरकार मौलाना जरजिस अंसारी के कथित बयान पर क्या कदम उठाती है। धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले बयानों पर कानूनी कार्रवाई की माँग को लेकर आने वाले दिनों में और प्रतिक्रियाएँ सामने आ सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों की जवाबदेही ज़रूरी है — केवल एक पक्ष की नहीं। राम मंदिर दान विवाद का इसी खबर में उठना यह भी संकेत देता है कि अयोध्या अब एक साथ कई धार्मिक-राजनीतिक धाराओं का केंद्र बन चुकी है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना जरजिस अंसारी ने भगवान श्रीकृष्ण के बारे में क्या कहा था?
कथित तौर पर इटावा (उत्तर प्रदेश) के मौलाना जरजिस अंसारी ने भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम और पाँच वक्त का नमाज़ी बताया। इस बयान के बाद अयोध्या के संतों ने कड़ी आपत्ति जताई।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
तपस्वी छावनी, अयोध्या के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने बयान को तथ्यहीन, साक्ष्यहीन और देश में अशांति फैलाने वाला बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और गृह मंत्री से मौलाना जरजिस के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की माँग की।
संत धर्मदास महाराज का इस विवाद पर क्या कहना है?
संत धर्मदास महाराज ने मौलाना जरजिस के बयान को उनकी 'ज्ञान की कमी' बताया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण सर्वव्यापी हैं और उन्हें किसी एक विचारधारा तक सीमित करना उचित नहीं।
राम मंदिर दान विवाद पर संतों की क्या राय है?
संत धर्मदास महाराज ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालु राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपनी भक्ति और समर्पण भाव से दान करते हैं। उन्होंने कहा कि दान को राजनीति से जोड़ने वालों को पहले अपने स्वयं के योगदान का हिसाब देना चाहिए।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अभी क्या स्थिति है?
संत धर्मदास महाराज के अनुसार राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर न्यायालय में प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय न्यायालय के अनुसार ही होगा। उन्होंने कहा कि मंदिर व्यवस्थाओं पर विचार तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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