16 जुलाई 2026
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हिंदू बच्चे को कलमा पढ़ाने के विवाद पर संत सीताराम दास का आक्रोश, हैदराबाद शिक्षक को बर्खास्त करने की माँग

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हिंदू बच्चे को कलमा पढ़ाने के विवाद पर संत सीताराम दास का आक्रोश, हैदराबाद शिक्षक को बर्खास्त करने की माँग

सारांश

अयोध्या के संत सीताराम दास ने एक ही दिन में कई विवादास्पद मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाया — हैदराबाद के शिक्षक की बर्खास्तगी की माँग से लेकर मौलाना जरजिस के वायरल दावे तक। उनके बयान धार्मिक तनाव के उस व्यापक माहौल की पृष्ठभूमि में आए हैं जिसमें UCC, कांवड़ यात्रा और राम मंदिर विवाद एक साथ सुर्खियों में हैं।

मुख्य बातें

अयोध्या के संत सीताराम दास ने हैदराबाद के उस स्कूल शिक्षक को बर्खास्त करने की माँग की, जिस पर कथित तौर पर हिंदू बच्चे को कलमा पढ़ने और कुरान का गृहकार्य देने का आरोप है।
संत ने मौलाना जरजिस के वायरल वीडियो — जिसमें भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम बताया गया — को 'निराधार और आपत्तिजनक' करार दिया और माफी न माँगने पर कानूनी कार्रवाई की माँग की।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के बयान का समर्थन किया।
वाराणसी के गंगा-वरुणा कॉरिडोर के लिए ₹25,000 करोड़ की केंद्रीय मंजूरी का स्वागत किया।
समान नागरिक संहिता (UCC) पर मुख्यमंत्री मोहन यादव के बयान का समर्थन करते हुए BJP शासित राज्यों में इसे लागू करने की अपील की।
कांवड़ यात्रा की तैयारियों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की प्रशंसा की।

अयोध्या के प्रमुख संत सीताराम दास ने 16 जुलाई को हैदराबाद के एक स्कूल शिक्षक के विरुद्ध कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिन पर कथित तौर पर एक हिंदू बच्चे को कलमा पढ़ने और कुरान पढ़ने का गृहकार्य देने का आरोप है। संत ने सरकार से माँग की कि ऐसे शिक्षक को तत्काल नौकरी से बर्खास्त किया जाए।

मुख्य विवाद और संत की प्रतिक्रिया

संत सीताराम दास ने इस कथित घटना को 'सनातनी बच्चों को गुमराह करने और जबरन धर्म परिवर्तन कराने की साजिश' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ऐसे लोगों को हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह मानसिकता समाज में वैमनस्य फैलाने वाली है। जो लोग भाईचारे की बात करते हैं, उन्हें ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।' गौरतलब है कि यह मामला तब सामने आया जब शिक्षक द्वारा दिए गए गृहकार्य की जानकारी सोशल मीडिया पर फैली और व्यापक आक्रोश उत्पन्न हुआ।

मौलाना जरजिस के वायरल वीडियो पर आपत्ति

संत सीताराम दास ने हाल ही में वायरल हुए मौलाना जरजिस के एक वीडियो पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें मौलाना ने कथित तौर पर श्रीमद्भगवद्गीता का हवाला देते हुए भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम बताया था। संत ने इस दावे को 'पूरी तरह निराधार और आपत्तिजनक' बताया और कहा कि मौलाना जरजिस को समाज से सार्वजनिक माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, 'अगर वह माफी नहीं माँगते हैं तो सरकार को उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे बयान समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं।'

राम मंदिर चढ़ावा विवाद और यूपी विधानसभा अध्यक्ष का समर्थन

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के बयान — जिसमें उन्होंने कहा था कि 'जिन्होंने सच्ची श्रद्धा से दान नहीं किया, उन्हीं का चढ़ावा चोरी हुआ' — का समर्थन करते हुए संत सीताराम दास ने कहा कि महाना ने 'यथार्थ सत्य' कहा है। उनके अनुसार, श्रद्धा और धर्मपूर्वक अर्जित धन से किया गया दान ही भगवान को स्वीकार्य होता है।

गंगा-वरुणा कॉरिडोर और समान नागरिक संहिता पर रुख

वाराणसी के गंगा-वरुणा कॉरिडोर परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने पर संत ने प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा, 'गंगा और वरुणा के विकास के लिए ₹25,000 करोड़ का बजट दिया जाना बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम है। इससे काशी के विकास को गति मिलेगी।' इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के समान नागरिक संहिता (UCC) संबंधी बयान का भी समर्थन किया और कहा, 'एक देश में एक संविधान, एक कानून और एक नियम होना चाहिए।' उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार है, वहाँ UCC लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

कांवड़ यात्रा व्यवस्था पर सराहना

कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर संत सीताराम दास ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पहले यात्रियों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के प्रति सक्रिय है। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी गतिविधि को रोकना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा इंतजाम पहले से कड़े किए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी बर्खास्तगी की माँग पहले ही उठ चुकी है — जो विधि-सम्मत प्रक्रिया से पहले सार्वजनिक दबाव की राजनीति को दर्शाता है। मौलाना जरजिस विवाद और UCC समर्थन को एक ही प्रेस वार्ता में जोड़ना यह भी बताता है कि धार्मिक बयानबाज़ी अब एकल मुद्दों से आगे बढ़कर व्यापक सांस्कृतिक एजेंडे का हिस्सा बन चुकी है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हैदराबाद स्कूल शिक्षक विवाद क्या है?
कथित तौर पर हैदराबाद के एक स्कूल शिक्षक ने एक हिंदू बच्चे को कलमा पढ़ने और कुरान पढ़ने का गृहकार्य दिया। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद का केंद्र बन गया और अयोध्या के संत सीताराम दास सहित कई धार्मिक नेताओं ने शिक्षक की बर्खास्तगी की माँग की है।
मौलाना जरजिस का वायरल वीडियो किस बारे में था?
वायरल वीडियो में मौलाना जरजिस ने कथित तौर पर श्रीमद्भगवद्गीता का हवाला देते हुए भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम बताया। संत सीताराम दास ने इस दावे को 'पूरी तरह निराधार और आपत्तिजनक' करार दिया और माफी न माँगने पर कानूनी कार्रवाई की माँग की।
गंगा-वरुणा कॉरिडोर परियोजना क्या है और इसके लिए कितना बजट मंजूर हुआ?
वाराणसी में गंगा और वरुणा नदियों के किनारे विकास के लिए बनाई जा रही गंगा-वरुणा कॉरिडोर परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई है। इसके लिए ₹25,000 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है, जिसका उद्देश्य काशी के धार्मिक और पर्यटन महत्व को बढ़ाना है।
संत सीताराम दास ने समान नागरिक संहिता पर क्या कहा?
संत सीताराम दास ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के UCC संबंधी बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एक देश में एक संविधान, एक कानून और एक नियम होना चाहिए, और BJP शासित राज्यों में UCC लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
कांवड़ यात्रा को लेकर संत सीताराम दास का क्या कहना है?
संत सीताराम दास ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की कांवड़ यात्रा व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले यात्रियों को कई परेशानियाँ होती थीं, लेकिन अब प्रशासन सुरक्षा और सुविधा के प्रति सक्रिय है।
राष्ट्र प्रेस
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