16 जुलाई 2026
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पश्चिम बंगाल: TMC शासनकाल में पुस्तक खरीद घोटाले की जांच, न्यायिक आयोग तक जा सकता है मामला

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पश्चिम बंगाल: TMC शासनकाल में पुस्तक खरीद घोटाले की जांच, न्यायिक आयोग तक जा सकता है मामला

सारांश

पश्चिम बंगाल में TMC शासनकाल के दौरान सरकारी पुस्तकालयों के लिए की गई पुस्तक खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच का आदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निर्देश पर शुरू यह जांच न्यायिक आयोग तक जा सकती है — यह राज्य में सत्ता बदलाव के बाद पुरानी सरकार पर सबसे बड़ी जवाबदेही कार्रवाइयों में से एक है।

मुख्य बातें

जन शिक्षा विस्तार एवं पुस्तकालय सेवा विभाग ने TMC शासनकाल में सरकारी पुस्तकालयों के लिए पुस्तक खरीद में कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच का निर्णय लिया।
आरोप है कि TMC नेताओं के करीबियों द्वारा लिखी या प्रकाशित कमज़ोर गुणवत्ता वाली पुस्तकें बड़े पैमाने पर खरीदी गईं।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंत्री गौरी शंकर घोष को विस्तृत जांच के निर्देश दिए।
मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता वाले न्यायिक आयोग को सौंपा जा सकता है।
जांच का दायरा भ्रष्टाचार के साथ-साथ पुस्तक चयन की स्क्रीनिंग प्रक्रिया की अनुपस्थिति तक भी विस्तृत होगा।

पश्चिम बंगाल के जन शिक्षा विस्तार एवं पुस्तकालय सेवा विभाग ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल के दौरान सरकारी पुस्तकालयों और सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों के लिए की गई पुस्तक खरीद में कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया है। 16 जुलाई को सामने आई इस जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यालय को इस संबंध में एकाधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

क्या हैं आरोप

सूत्रों के अनुसार, शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि सरकारी पुस्तकालयों के लिए साहित्यिक एवं विषयवस्तु की दृष्टि से कमज़ोर गुणवत्ता वाली पुस्तकें बड़े पैमाने पर खरीदी गईं। कथित तौर पर इनमें से कई पुस्तकें TMC नेताओं के रिश्तेदारों या करीबी लोगों द्वारा लिखी गई थीं, अथवा ऐसे प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित की गई थीं जिन्हें तत्कालीन सत्तारूढ़ दल का संरक्षण प्राप्त था। यह भी आरोप है कि पसंदीदा लेखकों की एक ही किताबें हर वर्ष बड़ी संख्या में खरीदकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।

मुख्यमंत्री के निर्देश और जांच का दायरा

विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इन शिकायतों की जानकारी जन शिक्षा विस्तार एवं पुस्तकालय सेवा मंत्री गौरी शंकर घोष को दी है और मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारी ने यह भी बताया कि जांच केवल कथित भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहेगी — पुस्तक चयन के लिए प्रभावी स्क्रीनिंग या गुणवत्ता मूल्यांकन प्रक्रिया की अनुपस्थिति के पहलू भी जांच के दायरे में होंगे।

न्यायिक आयोग की संभावना

अधिकारी ने संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर इस मामले को कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता वाले न्यायिक आयोग को भी सौंपा जा सकता है, ताकि पूरे प्रकरण की गहन और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। यह कदम इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करता है।

मुख्यमंत्री का पूर्व सरकार पर हमला

हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा था कि उनके कार्यकाल में शायद ही कोई ऐसा विभाग बचा हो जहाँ भ्रष्टाचार न हुआ हो। उन्होंने 1977 में मुख्यमंत्री बने दिवंगत ज्योति बसु का उदाहरण देते हुए कहा था कि बसु को विकास के अधिकांश क्षेत्रों में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र राय की नींव मिली थी।

अधिकारी ने कहा, 'लेकिन आज जब मैंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला है, तो जिस भी विभाग को देखता हूँ, वहाँ पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की ओर से छोड़ी गई अव्यवस्था और भ्रष्टाचार दिखाई देता है।'

आगे क्या होगा

जांच के निष्कर्षों के आधार पर विभागीय कार्रवाई और संभावित न्यायिक समीक्षा दोनों की संभावना बनी हुई है। गौरतलब है कि यह जांच ऐसे समय में शुरू हो रही है जब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद पिछली सरकार के कई फैसले नए प्रशासन की निगरानी में आ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या नई सरकार के राजनीतिक एजेंडे से प्रभावित रहेगी। न्यायिक आयोग का विकल्प विश्वसनीयता देता है, लेकिन उसकी कार्यप्रणाली और समयसीमा तय होना ज़रूरी है। जब तक ठोस साक्ष्य और जवाबदेही का ढाँचा सामने नहीं आता, यह जांच राजनीतिक प्रतिशोध और वास्तविक सुधार के बीच की बारीक रेखा पर खड़ी रहेगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में पुस्तक खरीद जांच का मामला क्या है?
पश्चिम बंगाल के जन शिक्षा विस्तार एवं पुस्तकालय सेवा विभाग ने TMC शासनकाल के दौरान सरकारी पुस्तकालयों के लिए की गई पुस्तक खरीद में कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच कराने का फैसला किया है। आरोप है कि कमज़ोर गुणवत्ता वाली पुस्तकें बड़े पैमाने पर खरीदी गईं और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ।
इस जांच का आदेश किसने दिया और क्यों?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यालय को एकाधिक शिकायतें मिलने के बाद उन्होंने मंत्री गौरी शंकर घोष को विस्तृत जांच के निर्देश दिए। शिकायतों में TMC नेताओं के करीबियों द्वारा लिखी या प्रकाशित पुस्तकों की खरीद में पक्षपात और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप हैं।
क्या इस मामले में न्यायिक जांच होगी?
विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता वाले न्यायिक आयोग को सौंपा जा सकता है। यह निर्णय जांच के प्रारंभिक निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
जांच का दायरा क्या होगा?
जांच केवल कथित भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें यह भी देखा जाएगा कि पुस्तक चयन के लिए कोई प्रभावी स्क्रीनिंग या गुणवत्ता मूल्यांकन प्रक्रिया थी या नहीं, और क्या पसंदीदा लेखकों की एक ही किताबें हर साल बड़ी संख्या में खरीदकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
TMC ने इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मुख्यमंत्री अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से पूर्ववर्ती TMC सरकार पर भ्रष्टाचार के व्यापक आरोप लगाए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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