जीटीए भ्रष्टाचार की जांच होगी: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का कुर्सियोंग में बड़ा ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार, 16 जून 2026 को कुर्सियोंग में एक जनसभा को संबोधित करते हुए घोषणा की कि गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (जीटीए) के कामकाज में व्याप्त भ्रष्टाचार की विस्तृत जांच के आदेश दिए जाएंगे। पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद यह उनकी पहाड़ी क्षेत्रों की पहली आधिकारिक यात्रा थी।
मुख्य घटनाक्रम
जीटीए वर्तमान में अनीत थापा द्वारा स्थापित भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के नेतृत्व में संचालित है। बीजीपीएम राज्य की पूर्व सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पहाड़ी सहयोगी पार्टी रही है। मुख्यमंत्री अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जीटीए में शिक्षकों की नियुक्ति में हुए भ्रष्टाचार की पूरी जांच की जाएगी और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा, 'जीटीए में शिक्षकों की नियुक्ति में हुए भ्रष्टाचार की पूरी जांच की जाएगी। इस भ्रष्टाचार में शामिल किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। उन्हें जेल भेजा जाएगा। हमारी सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति पर चलेगी।'
पहाड़ों के विकास पर सरकार की प्राथमिकताएँ
मुख्यमंत्री अधिकारी ने घोषणा की कि शीघ्र ही पहाड़ी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती और पुलिस कर्मियों की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि पहाड़ न केवल पश्चिम बंगाल का, बल्कि पूरे देश का गौरव हैं और वे पहाड़ों के विकास के लिए एक विशिष्ट कार्यसूची तैयार कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, 'मैं यहां घूमने नहीं आया हूं। मुझे यहां काम करना है। वर्षों से पहाड़ों के निवासियों ने भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है।'
पूर्व सरकार पर तीखा हमला
अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछली TMC सरकार ने पहाड़ी नगरपालिकाओं में चुनाव कराने के बजाय प्रशासकों की नियुक्ति करके पहाड़ी जनता के धन का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा, 'पिछली मुख्यमंत्री जानती थीं कि उन्हें पहाड़ी जनता का वोट नहीं मिलेगा। इसलिए उन्होंने क्षेत्र के विकास के बजाय अपनी मौज-मस्ती के लिए पहाड़ियों को चुना।' यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हाल के विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की है।
गोरखा आंदोलन के मामले और मुआवजा
गोरखा आंदोलन के दौरान पूर्ववर्ती TMC सरकार द्वारा दर्ज किए गए मामलों के संबंध में मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि उन्होंने सभी 'झूठे मामलों' को तत्काल वापस लेने के आदेश दे दिए हैं। इसके अलावा, उन्होंने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को ₹5 लाख का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा किया।
आगे क्या होगा
जीटीए भ्रष्टाचार जांच की समय-सीमा और जाँच एजेंसी का ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। गौरतलब है कि दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कुर्सियोंग की पहाड़ियों में दशकों से राजनीतिक उथल-पुथल का इतिहास रहा है और जीटीए के भविष्य को लेकर स्थानीय समुदायों में उत्सुकता बनी हुई है। नई सरकार के कदमों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।