बंगाल में फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर CM सुवेंदु अधिकारी सख्त, लेने-देने वाले दोनों जाएंगे जेल
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार, 30 जून 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य में फर्जी जाति प्रमाण पत्र लेने और जारी करने वाले दोनों तरह के लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्रों के मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ।
मुकुटमणिपुर में हुल दिवस पर बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री अधिकारी बांकुरा जिले के मुकुटमणिपुर में आयोजित 'हुल दिवस' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह दिवस हर वर्ष 1855 के ऐतिहासिक संथाल विद्रोह की स्मृति में मनाया जाता है। आदिवासी-बहुल इस क्षेत्र में सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने पश्चिम बंगाल में आदिवासी आबादी के विकास के लिए कोई काम नहीं किया। आदिवासी समुदाय पीछे छूट गया। पिछली सरकार के दौरान जाति से जुड़े मामलों, खासकर अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्रों के मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। बहुत सारे फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए गए। अब ऐसे फर्जी जाति प्रमाण पत्र लेने और जारी करने वालों को जेल भेजा जाएगा।"
राष्ट्रपति मुर्मु के अपमान का मुद्दा भी उठाया
मुख्यमंत्री ने इस वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान हुई अपमान की घटना का भी उल्लेख किया। राष्ट्रपति मुर्मु राज्य में एक अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन को संबोधित करने आई थीं। अधिकारी ने कहा, "पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने भारत की राष्ट्रपति का अपमान करने में भी कोई संकोच नहीं किया।"
आदिवासी विकास के लिए बजट आवंटन
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए बताया कि आदिवासी विकास के लिए कुल ₹350 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, जंगलमहल क्षेत्र के समग्र विकास के लिए बजट में ₹1,200 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों और मूल निवासियों के कल्याण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विधानसभा चुनावों में BJP का आदिवासी क्षेत्रों में दबदबा
गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का प्रदर्शन आदिवासी मतदाता-बहुल क्षेत्रों में सर्वाधिक प्रभावशाली रहा। अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित 16 विधानसभा क्षेत्रों में से सभी में BJP उम्मीदवार विजयी रहे। वर्तमान में राज्य में आदिवासी पृष्ठभूमि के 17 निर्वाचित विधायक हैं। यह ऐसे समय में आया है जब BJP आदिवासी समुदाय को अपने राजनीतिक आधार के रूप में मज़बूत करने की कोशिश में है।
आगे क्या होगा
फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के विरुद्ध की जाने वाली कार्रवाई की रूपरेखा अभी सामने आनी बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर ठोस कानूनी कदम उठाना राज्य सरकार के लिए एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी, क्योंकि ऐसे मामलों में जाँच और अभियोजन की प्रक्रिया जटिल होती है। नई सरकार के इस कदम पर विपक्ष की प्रतिक्रिया और न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना पर सभी की नज़रें टिकी हैं।