ओडिशा साइबर जागरूकता अभियान में 40 लाख से अधिक छात्र-शिक्षक शामिल, 22,000 स्कूल-कॉलेज जुड़े
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा पुलिस ने 14 अगस्त 2026 को राज्यव्यापी साइबर जागरूकता अभियान चलाया, जिसमें 40 लाख से अधिक छात्र, शिक्षक, अभिभावक और पुलिसकर्मी शामिल हुए। यह अभियान साइबर अपराध के बढ़ते खतरे से युवाओं को सुरक्षित करने और उन्हें डिजिटल दुनिया में जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। राज्य के 35 पुलिस जिलों के 20,000 से अधिक स्कूलों और 2,000 से अधिक कॉलेजों ने लाइव वेबकास्ट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसमें भागीदारी की।
अभियान का स्वरूप और नेतृत्व
इस अभियान का आयोजन ओडिशा पुलिस ने स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक (क्राइम ब्रांच) विनयतोष मिश्रा ने की। तकनीक के माध्यम से एक साथ हजारों संस्थानों को जोड़ना इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता रही।
यह ऐसे समय में आया है जब आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, ओडिशा सहित पूरे देश में छात्र और युवा तेजी से ऑनलाइन धोखाधड़ी, ब्लैकमेल और डिजिटल शोषण का शिकार हो रहे हैं।
साइबर अपराध की बढ़ती चुनौती
राज्य सरकार के अनुसार, कुछ मामलों में लोगों ने अनजाने में अपने बैंक खाते, सिम कार्ड या पहचान दस्तावेज साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा दिए, जिनका दुरुपयोग किया गया। गौरतलब है कि डिजिटल लेन-देन में वृद्धि के साथ-साथ साइबर ठगी की घटनाएँ भी तेज़ी से बढ़ी हैं, जिनमें युवा वर्ग सबसे अधिक निशाने पर है।
अभियान में प्रतिभागियों को स्पष्ट किया गया कि बैंक, सरकारी कार्यालय और पुलिस अधिकारी कभी भी OTP, PIN, CVV या पासवर्ड नहीं माँगते — और ऐसा कोई भी अनुरोध साइबर धोखाधड़ी की निशानी है।
मुख्यमंत्री और राज्यपाल की अपील
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने युवाओं को 'साइबर-सुरक्षित ओडिशा' के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छात्र अपने परिवारों, मित्रों और समुदायों में साइबर जागरूकता के एंबेसडर के रूप में काम करें। ओडिशा के राज्यपाल ने भी छात्रों से साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क और जागरूक रहने की अपील की।
आम जनता के लिए सलाह
कार्यक्रम में बताया गया कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर नागरिक तुरंत हेल्पलाइन नंबर '1930' पर कॉल करें और संबंधित पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। अधिकारियों के अनुसार, जितनी जल्दी रिपोर्ट की जाए, धोखाधड़ी वाले फंड के हस्तांतरण को रोकने और राशि वापस पाने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।
आगे चलकर इस अभियान को और विस्तार देने की योजना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं तक भी साइबर सुरक्षा का संदेश प्रभावी ढंग से पहुँच सके।