ओडिशा पुलिस का ई-जीरो एफआईआर सिस्टम लॉन्च, ₹10 लाख से ऊपर के साइबर फ्रॉड पर होगी तत्काल कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा पुलिस ने 8 जुलाई 2026 को कटक स्थित पुलिस मुख्यालय में 'ई-जीरो एफआईआर सिस्टम' को औपचारिक रूप से लॉन्च किया, जो साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया को स्वचालित बनाता है। यह पहल नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 को राज्य के क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) से जोड़कर अधिकार क्षेत्र की बाधाओं को समाप्त करती है।
मुख्य घटनाक्रम
इस सिस्टम को ओडिशा पुलिस के महानिदेशक (DGP) योगेश बहादुर खुराना ने लॉन्च किया। उन्होंने कहा, 'ओडिशा पुलिस साइबर क्राइम से निपटने के सिस्टम को मजबूत करने और समय पर, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल पुलिसिंग देने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबद्ध है।'
स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (SCRB) ने हेल्पलाइन 1930 और CCTNS के बीच यह एकीकरण (integration) संभव किया है, जिससे पात्र शिकायतों पर ई-जीरो एफआईआर अनुरोध स्वतः तैयार होता है।
सिस्टम कैसे काम करता है
नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से दर्ज ₹10 लाख या उससे अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों के लिए CCTNS में स्वतः ई-जीरो एफआईआर अनुरोध बनता है और उसे क्राइम ब्रांच के साइबर पुलिस स्टेशन, ओडिशा को भेजा जाता है।
इसके बाद साइबर पुलिस स्टेशन के पास पाँच विकल्प होते हैं — नियमित एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू करना, शिकायत को संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले थाने को स्थानांतरित करना, जीरो एफआईआर दर्ज कर उसे उचित थाने को भेजना, शिकायत को पहले से दर्ज एफआईआर से जोड़ना, या निर्धारित मानदंड पूरे न होने पर अनुरोध बंद करना।
आम जनता पर असर
ओडिशा पुलिस के अनुसार, इस एकीकरण से डुप्लिकेट डेटा एंट्री समाप्त होगी, मामलों का पंजीकरण तेज होगा, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सूचना साझाकरण सुगम होगा और शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की स्थिति बेहतर तरीके से ट्रैक कर सकेंगे।
DGP खुराना ने नागरिकों से अपील की कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की सूचना जितनी जल्दी हो सके हेल्पलाइन 1930 पर दें, ताकि पुलिस तत्काल कार्रवाई कर सके और धोखाधड़ी में गँवाई गई राशि की वसूली की संभावना बढ़ सके।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में साइबर वित्तीय अपराधों में तेज वृद्धि दर्ज की जा रही है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार पहले से ही राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र बनाने पर जोर दे रही है। ओडिशा की यह पहल उस राष्ट्रीय ढाँचे को राज्य स्तर पर CCTNS से जोड़कर और अधिक प्रभावी बनाती है।
आगे की राह
DGP खुराना ने SCRB, क्राइम ब्रांच के अधिकारियों और कर्मचारियों को इस सिस्टम को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए बधाई दी। ओडिशा पुलिस का लक्ष्य इस तकनीक-आधारित ढाँचे को और विस्तारित कर साइबर अपराध की नई चुनौतियों से निपटने में राज्य को अग्रणी बनाना है।