मुंबई 1930 साइबर हेल्पलाइन ने पाँच महीनों में ₹101.39 करोड़ की ठगी रोकी, 2.55 लाख कॉल दर्ज

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मुंबई 1930 साइबर हेल्पलाइन ने पाँच महीनों में ₹101.39 करोड़ की ठगी रोकी, 2.55 लाख कॉल दर्ज

सारांश

मुंबई की 1930 साइबर हेल्पलाइन ने सिर्फ पाँच महीनों में ₹101.39 करोड़ की ठगी रोकी — हर चार शिकायतों में से एक में सफलता। मई 2022 से अब तक कुल ₹491.57 करोड़ बचाए जा चुके हैं, जो इस हेल्पलाइन को देश के सबसे प्रभावी साइबर सुरक्षा तंत्रों में से एक बनाता है।

मुख्य बातें

मुंबई 1930 हेल्पलाइन ने जनवरी–19 मई 2026 के बीच ₹101.39 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी की राशि फ्रीज की।
इस अवधि में 2,55,092 कॉल्स दर्ज हुईं; 30,302 मामलों में सफलतापूर्वक रकम रोकी गई।
सफलता दर करीब 25.68% रही — यानी हर चार में से एक मामले में पैसा बचाया गया।
मई 2022 से अब तक हेल्पलाइन ने कुल ₹491.57 करोड़ की साइबर ठगी बचाई है।
शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी ठगी और फर्जी जॉब ऑफर सबसे अधिक रिपोर्ट किए गए मामले हैं।
साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करने की अपील की गई है।

मुंबई साइबर पुलिस की 1930 हेल्पलाइन ने जनवरी 2026 से 19 मई 2026 तक ₹101.39 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी की राशि फ्रीज कर मुंबईवासियों की मेहनत की कमाई बचाई है। इस अवधि में हेल्पलाइन पर 2,55,092 कॉल्स दर्ज हुईं और 30,302 मामलों में सफलतापूर्वक ठगी की रकम रोकी गई — यानी सफलता दर करीब 25.68 प्रतिशत रही।

मुख्य घटनाक्रम

मुंबई पुलिस के अनुसार, शिकायत दर्ज होते ही साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारी संबंधित बैंक, पेमेंट गेटवे और राष्ट्रीय नोडल एजेंसियों से तत्काल समन्वय करते हैं। संदिग्ध खातों को फ्रीज कर दिया जाता है ताकि अपराधी धनराशि आगे स्थानांतरित न कर सकें।

मुंबई साइबर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, '1930 हेल्पलाइन अब मुंबईवासियों के लिए डिजिटल सुरक्षा का मजबूत कवच बन चुकी है। शिकायत मिलते ही हम बैंक, पेमेंट गेटवे और संबंधित एजेंसियों के साथ तुरंत समन्वय स्थापित करते हैं। यह त्वरित प्रतिक्रिया ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।'

किस तरह के मामले सबसे अधिक

हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों में मुख्य रूप से शेयर ट्रेडिंग और निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, फर्जी जॉब ऑफर, डेबिट-क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, फिशिंग और ओटीपी-आधारित ठगी के मामले शामिल हैं। अधिकारी तुरंत संबंधित बैंक या डिजिटल वॉलेट से संपर्क कर राशि रोकने की कोशिश करते हैं।

गौरतलब है कि साइबर ठगी में समय सबसे निर्णायक कारक होता है — जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होती है, उतनी ही अधिक संभावना होती है कि रकम फ्रीज हो सके।

चार वर्षों का संचित प्रभाव

मई 2022 में शुरू हुई 1930 हेल्पलाइन ने अब तक कुल ₹491.57 करोड़ की साइबर ठगी की राशि बचाई है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि मुंबई पुलिस ने डिजिटल अपराध के बढ़ते खतरे के बीच एक सुदृढ़ प्रतिक्रिया तंत्र विकसित किया है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं।

आम जनता पर असर

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक, निवेश के लालच या वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें। अधिकारियों के अनुसार, हर चार में से एक मामले में पुलिस समय रहते पैसे बचाने में सफल रही है।

आगे की राह

मुंबई साइबर पुलिस का लक्ष्य हेल्पलाइन की प्रतिक्रिया गति को और तेज करना और बैंकों के साथ रियल-टाइम समन्वय को मजबूत करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता अभियानों के साथ-साथ त्वरित तकनीकी हस्तक्षेप ही साइबर ठगी रोकने का सबसे कारगर तरीका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि तीन-चौथाई से अधिक मामलों में ठगी की रकम वापस नहीं हो पाती। असली सवाल यह है कि शेष 74% मामलों में देरी कहाँ होती है — बैंक की प्रतिक्रिया में, तकनीकी बाधाओं में, या शिकायत दर्ज करने में नागरिक की देरी में। ₹491.57 करोड़ की संचित बचत निस्संदेह उल्लेखनीय है, लेकिन जब तक बैंकों के साथ रियल-टाइम इंटरफेस और स्वचालित फ्रीज तंत्र नहीं बनता, यह आँकड़ा अपनी पूरी क्षमता से बहुत नीचे रहेगा।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1930 साइबर हेल्पलाइन क्या है और यह कैसे काम करती है?
1930 एक राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर है जिसे मुंबई में मई 2022 में सक्रिय किया गया था। शिकायत मिलते ही मुंबई साइबर पुलिस संबंधित बैंक, पेमेंट गेटवे और राष्ट्रीय नोडल अधिकारियों से समन्वय कर संदिग्ध खातों को फ्रीज करती है।
जनवरी से मई 2026 में 1930 हेल्पलाइन ने कितनी राशि बचाई?
मुंबई पुलिस के अनुसार, जनवरी 2026 से 19 मई 2026 के बीच ₹101.39 करोड़ से अधिक की राशि फ्रीज की गई। इस दौरान 2,55,092 कॉल्स आईं और 30,302 मामलों में सफलता मिली।
मुंबई में सबसे अधिक किस तरह के साइबर फ्रॉड हो रहे हैं?
शेयर ट्रेडिंग और निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, फर्जी जॉब ऑफर, डेबिट-क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, फिशिंग और ओटीपी-आधारित ठगी सबसे अधिक रिपोर्ट किए जाने वाले मामले हैं।
साइबर ठगी होने पर क्या करें?
साइबर ठगी का शिकार होते ही तुरंत 1930 पर कॉल करें। पुलिस के अनुसार, जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतनी ही अधिक संभावना होगी कि ठगी की रकम फ्रीज हो सके।
1930 हेल्पलाइन की शुरुआत से अब तक कुल कितनी राशि बचाई गई है?
मई 2022 में शुरुआत से लेकर मई 2026 तक 1930 हेल्पलाइन ने कुल ₹491.57 करोड़ की साइबर ठगी की राशि बचाई है।
राष्ट्र प्रेस
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