मुंबई 1930 साइबर हेल्पलाइन ने पाँच महीनों में ₹101.39 करोड़ की ठगी रोकी, 2.55 लाख कॉल दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई साइबर पुलिस की 1930 हेल्पलाइन ने जनवरी 2026 से 19 मई 2026 तक ₹101.39 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी की राशि फ्रीज कर मुंबईवासियों की मेहनत की कमाई बचाई है। इस अवधि में हेल्पलाइन पर 2,55,092 कॉल्स दर्ज हुईं और 30,302 मामलों में सफलतापूर्वक ठगी की रकम रोकी गई — यानी सफलता दर करीब 25.68 प्रतिशत रही।
मुख्य घटनाक्रम
मुंबई पुलिस के अनुसार, शिकायत दर्ज होते ही साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारी संबंधित बैंक, पेमेंट गेटवे और राष्ट्रीय नोडल एजेंसियों से तत्काल समन्वय करते हैं। संदिग्ध खातों को फ्रीज कर दिया जाता है ताकि अपराधी धनराशि आगे स्थानांतरित न कर सकें।
मुंबई साइबर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, '1930 हेल्पलाइन अब मुंबईवासियों के लिए डिजिटल सुरक्षा का मजबूत कवच बन चुकी है। शिकायत मिलते ही हम बैंक, पेमेंट गेटवे और संबंधित एजेंसियों के साथ तुरंत समन्वय स्थापित करते हैं। यह त्वरित प्रतिक्रिया ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।'
किस तरह के मामले सबसे अधिक
हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों में मुख्य रूप से शेयर ट्रेडिंग और निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, फर्जी जॉब ऑफर, डेबिट-क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, फिशिंग और ओटीपी-आधारित ठगी के मामले शामिल हैं। अधिकारी तुरंत संबंधित बैंक या डिजिटल वॉलेट से संपर्क कर राशि रोकने की कोशिश करते हैं।
गौरतलब है कि साइबर ठगी में समय सबसे निर्णायक कारक होता है — जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होती है, उतनी ही अधिक संभावना होती है कि रकम फ्रीज हो सके।
चार वर्षों का संचित प्रभाव
मई 2022 में शुरू हुई 1930 हेल्पलाइन ने अब तक कुल ₹491.57 करोड़ की साइबर ठगी की राशि बचाई है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि मुंबई पुलिस ने डिजिटल अपराध के बढ़ते खतरे के बीच एक सुदृढ़ प्रतिक्रिया तंत्र विकसित किया है।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं।
आम जनता पर असर
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक, निवेश के लालच या वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें। अधिकारियों के अनुसार, हर चार में से एक मामले में पुलिस समय रहते पैसे बचाने में सफल रही है।
आगे की राह
मुंबई साइबर पुलिस का लक्ष्य हेल्पलाइन की प्रतिक्रिया गति को और तेज करना और बैंकों के साथ रियल-टाइम समन्वय को मजबूत करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता अभियानों के साथ-साथ त्वरित तकनीकी हस्तक्षेप ही साइबर ठगी रोकने का सबसे कारगर तरीका है।