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साइबर फ्रॉड का शिकार हुआ मुंबई पुलिसकर्मी, मोबाइल ऑटो-अपडेट की आड़ में उड़े ₹1.60 लाख

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साइबर फ्रॉड का शिकार हुआ मुंबई पुलिसकर्मी, मोबाइल ऑटो-अपडेट की आड़ में उड़े ₹1.60 लाख

सारांश

मुंबई में CSMT रेलवे पुलिस के हवलदार जिभाऊ रतन लहिरे साइबर ठगी के शिकार बने। ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल फर्जी ऑटो-अपडेट से हैक हुआ और रिमोट एक्सेस से गूगल पे के जरिए ₹1.60 लाख उड़ा लिए गए। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की।

मुख्य बातें

हवलदार जिभाऊ रतन लहिरे (47) , सीएसएमटी रेलवे पुलिस स्टेशन, मुंबई — साइबर ठगी के शिकार हुए।
घटना 26 अप्रैल को सुबह 9:12 बजे सीएसएमटी-टिटवाला लोकल ट्रेन में हुई।
फोन पर फर्जी ऑटो-अपडेट के जरिए मैलवेयर/रिमोट एक्सेस से डिवाइस हैक किया गया।
₹95,000 गोलू मीना और ₹65,000 अर्जन भारत मानिकवाडे के खाते में ट्रांसफर हुए — कुल नुकसान ₹1,60,000 ।
पीड़ित ने न कोई OTP दिया, न कोई लिंक क्लिक किया — यह नई पीढ़ी का साइबर हमला है।
पुलिस ने FIR दर्ज कर बैंक खाते, आईपी लॉग और डिवाइस डेटा की जांच शुरू की।

मुंबई में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला

मुंबई में साइबर अपराधियों ने एक नई और खतरनाक तकनीक अपनाते हुए सीएसएमटी रेलवे पुलिस स्टेशन में तैनात हवलदार जिभाऊ रतन लहिरे (47) के मोबाइल फोन को हैक कर उनके बैंक खातों से ₹1,60,000 रुपए की ठगी कर ली। यह घटना 26 अप्रैल को उस समय हुई जब पुलिसकर्मी ड्यूटी के बाद लोकल ट्रेन से घर लौट रहे थे। मामले में सीएसएमटी रेलवे पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

घटनाक्रम: ट्रेन में बैठे-बैठे खाली हो गया बैंक खाता

कल्याण पश्चिम के खड़कपाड़ा इलाके में रहने वाले हवलदार लहिरे ने बताया कि सुबह करीब 9:12 बजे वे एक सहकर्मी के साथ सीएसएमटी से टिटवाला जाने वाली लोकल ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में सवार हुए। ट्रेन रवाना होने से पहले वे मोबाइल पर रील्स देख रहे थे, तभी अचानक फोन बिना किसी निर्देश के स्वतः अपडेट होने लगा।

उन्होंने सोचा कि यह कंपनी का सामान्य सिस्टम अपडेट होगा, लेकिन कुछ ही मिनटों में फोन पूरी तरह हैंग हो गया — न बंद हो रहा था, न सामान्य रूप से चल रहा था। कल्याण स्टेशन पहुंचने के बाद वे एक परिचित मोबाइल शॉप गए, जहां कुछ ऐप्स डिलीट करने के बाद फोन सामान्य हुआ।

घर पहुंचने पर जब उन्हें संदेह हुआ तो उन्होंने गूगल पे और अपने बैंक खातों का बैलेंस चेक किया। जो सामने आया वह चौंकाने वाला था।

कैसे हुई ₹1.60 लाख की ठगी

जांच में पता चला कि उनके एक बैंक खाते से ₹95,000 रुपए पहले उनके ही दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए और फिर वहां से गोलू मीना नामक व्यक्ति के खाते में भेज दिए गए। इसके अलावा एक अन्य बैंक खाते से ₹65,000 रुपए सीधे अर्जन भारत मानिकवाडे के खाते में ट्रांसफर किए गए।

इस प्रकार कुल ₹1,60,000 रुपए की ठगी हुई — और यह सब कुछ उस दौरान हुआ जब पीड़ित ट्रेन में सफर कर रहे थे और उन्हें जरा भी भनक नहीं लगी।

मैलवेयर और रिमोट एक्सेस तकनीक का इस्तेमाल

प्राथमिक जांच में पुलिस को आशंका है कि साइबर ठगों ने मैलवेयर या रिमोट एक्सेस टूल (RAT) के जरिए पीड़ित के मोबाइल को नियंत्रित कर लिया था। फोन पर नकली अपडेट दिखाकर डिवाइस को रिमोटली कंट्रोल किया गया और गूगल पे के माध्यम से रकम ट्रांसफर की गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक AnyDesk, TeamViewer जैसे रिमोट एक्सेस ऐप्स के दुरुपयोग या किसी ट्रोजन वायरस के जरिए काम करती है, जो यूजर की जानकारी के बिना डिवाइस का पूरा नियंत्रण ले लेती है। गौरतलब है कि इस तरह के साइबर हमलों में पीड़ित को कोई OTP या लिंक क्लिक नहीं करना पड़ता — फोन पहले से ही संक्रमित होता है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा

पीड़ित हवलदार की शिकायत पर अर्जन भारत मानिकवाडे, गोलू मीना और अन्य अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ आईटी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस अब बैंक खातों का लेनदेन विवरण, मोबाइल आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन डेटा और डिवाइस फोरेंसिक की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं का मानना है कि जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई, वे मनी म्यूल (धन खच्चर) खाते हो सकते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर गिरोह अपनी असली पहचान छुपाने के लिए करते हैं।

यह मामला एक बड़े सवाल को जन्म देता है — जब पुलिसकर्मी खुद साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं, तो आम नागरिक कितने सुरक्षित हैं? महाराष्ट्र में पिछले कुछ महीनों में साइबर अपराध के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई देश के सर्वाधिक साइबर ठगी प्रभावित शहरों में शामिल है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि यह किसी संगठित साइबर गिरोह की करतूत है या कोई स्थानीय ऑपरेशन।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की बढ़ती साइबर असुरक्षा का आईना है। जो व्यक्ति खुद कानून का रखवाला है, वह भी मैलवेयर की चपेट में आ गया — यह विडंबना गहरी है। चिंताजनक यह है कि इस हमले में पीड़ित ने न कोई लिंक क्लिक किया, न OTP दिया — यानी परंपरागत साइबर सुरक्षा सलाह अब पर्याप्त नहीं रही। सरकार और दूरसंचार नियामकों को मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम स्तर पर सुरक्षा मानक तय करने होंगे, वरना आम नागरिक का डिजिटल खाता कभी भी खाली हो सकता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई पुलिसकर्मी के साथ साइबर फ्रॉड कैसे हुआ?
साइबर ठगों ने हवलदार जिभाऊ रतन लहिरे के मोबाइल में मैलवेयर या रिमोट एक्सेस तकनीक के जरिए सेंध लगाई। फोन पर नकली ऑटो-अपडेट दिखाकर डिवाइस को रिमोटली कंट्रोल किया गया और गूगल पे से ₹1.60 लाख ट्रांसफर कर लिए गए।
मोबाइल ऑटो-अपडेट से पैसे कैसे चोरी हो सकते हैं?
साइबर अपराधी मैलवेयर के जरिए फोन को पहले से संक्रमित कर देते हैं। अपडेट की आड़ में रिमोट एक्सेस सक्रिय होता है और ठग बिना OTP के भी UPI या बैंकिंग ऐप से रकम निकाल सकते हैं।
साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें?
तुरंत इंटरनेट बंद करें, बैंक को सूचित कर खाता फ्रीज कराएं और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, रकम वापसी की संभावना उतनी अधिक होगी।
इस मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
सीएसएमटी रेलवे पुलिस ने अर्जन भारत मानिकवाडे, गोलू मीना और अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल आईपी लॉग और डिवाइस फोरेंसिक की जांच कर रही है।
रिमोट एक्सेस साइबर फ्रॉड से कैसे बचें?
अनजान स्रोतों से ऐप डाउनलोड न करें, फोन को नियमित रूप से एंटीवायरस से स्कैन करें और किसी भी अनजान अपडेट पर तुरंत इंटरनेट बंद करें। गूगल पे या बैंकिंग ऐप पर हमेशा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखें।
राष्ट्र प्रेस
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