राजीव गांधी पुण्यतिथि: वीर भूमि पर राहुल, सोनिया, प्रियंका और खड़गे ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर गुरुवार, 21 मई को नई दिल्ली स्थित उनकी समाधि 'वीर भूमि' पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने एकत्र होकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। राजघाट के निकट स्थित इस समाधि स्थल पर परिवार और पार्टी दोनों की उपस्थिति ने इस अवसर को विशेष बना दिया।
परिवार और पार्टी नेतृत्व की उपस्थिति
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा वीर भूमि पहुँचे और पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
वरिष्ठ नेताओं ने किया नमन
महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने भी राजीव गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी वीर भूमि पहुँचे। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, अजय कुमार लल्लू और पी. चिदंबरम ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।
एक्स पर नेताओं की श्रद्धांजलि
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने एक्स पर लिखा, 'सूचना क्रांति व पंचायती राज के प्रणेता पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न राजीव गांधी जी को उनके बलिदान दिवस पर नमन। भारत को एक सुदृढ़ एवं सशक्त राष्ट्र बनाने में उनके उल्लेखनीय योगदान को सदैव याद किया जाएगा।'
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने लिखा, 'पंचायती राज और सूचना क्रांति के जनक आधुनिक भारत के निर्माता, युवाओं के आदर्श भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर सादर नमन।'
केरल सरकार में मंत्री रमेश चेन्निथला ने लिखा, 'भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर, उन्हें कोटि-कोटि नमन। राजीव गांधी जी का दूरदर्शी नेतृत्व, राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण और उनके विचार, कांग्रेस परिवार को सदैव प्रेरित करते रहेंगे। राजीव जी मेरे नेता थे और आज मैं जो कुछ भी हूं, वह उन्हीं के नेतृत्व की बदौलत हूं। काश वे आज हमारे साथ होते; अगर ऐसा होता, तो हमारी तकदीर कुछ और ही होती। ऐसा कोई दिन नहीं बीतता, जब मैं उन्हें याद न करता हूं।'
राजीव गांधी की विरासत
गौरतलब है कि राजीव गांधी भारत के सातवें प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने 1984 से 1989 तक देश का नेतृत्व किया। उन्हें देश में सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति की नींव रखने और पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा दिलाने का श्रेय दिया जाता है। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी। प्रत्येक वर्ष इस दिन को आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।