पाकिस्तान के ज़रिए ईरान-अमेरिका वार्ता जारी, बाघेई बोले — वॉशिंगटन पर भरोसा मुश्किल

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पाकिस्तान के ज़रिए ईरान-अमेरिका वार्ता जारी, बाघेई बोले — वॉशिंगटन पर भरोसा मुश्किल

सारांश

पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान-अमेरिका संदेश-विनिमय जारी है, अमेरिका ने नया मसौदा भेजा है — लेकिन तेहरान ने 18 महीनों के 'खराब रिकॉर्ड' का हवाला देते हुए साफ कहा: वॉशिंगटन पर भरोसा आसान नहीं। होर्मुज़ स्ट्रेट पर स्थायी व्यवस्था की माँग ईरान की नई शर्त बनकर उभरी है।

मुख्य बातें

ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 21 मई को पुष्टि की कि पाकिस्तान के ज़रिए ईरान-अमेरिका संदेश-विनिमय जारी है।
ईरान ने 14-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया; अमेरिका ने जवाब में नया मसौदा भेजा; मध्यस्थ तेहरान में सक्रिय।
ईरान की मुख्य माँगें: फ्रीज़ संपत्तियों की रिहाई और ईरानी जहाजों के विरुद्ध कथित 'समुद्री लूट' बंद करना।
ईरान, ओमान के साथ मिलकर होर्मुज़ स्ट्रेट में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था बनाना चाहता है।
युद्धविराम 8 अप्रैल को हुआ था; 11-12 अप्रैल की इस्लामाबाद वार्ता बिना समझौते के समाप्त हुई।
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक्स पर कहा — 'दबाव डालकर ईरान को झुकाने की कोशिश सिर्फ एक भ्रम है।'

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 21 मई को स्पष्ट किया कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच संदेशों का आदान-प्रदान पाकिस्तान के माध्यम से निरंतर जारी है, और ईरान अमेरिका के नवीनतम रुख की समीक्षा कर रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 18 महीनों के 'बहुत खराब' रिकॉर्ड के कारण वॉशिंगटन पर गहरा अविश्वास बना हुआ है।

मुख्य घटनाक्रम

सरकारी टेलीविज़न चैनल आईआरआईबी टीवी को दिए साक्षात्कार में बाघेई ने बताया कि दोनों देशों के बीच कई बार संदेश भेजे और प्राप्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान हर मोर्चे पर युद्ध समाप्त करने को प्राथमिकता दे रहा है — जिसमें लेबनान भी शामिल है।

ईरान की स्पष्ट माँगों में फ्रीज़ की गई ईरानी संपत्तियों की रिहाई और ईरानी जहाजों के विरुद्ध अमेरिका की कथित 'समुद्री लूट' तथा शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों को रोकना शामिल है।

नया अमेरिकी मसौदा प्रस्ताव

अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने ईरानी वार्ता टीम के करीबी सूत्र के हवाले से बताया कि ईरान द्वारा तीन दिन पहले 14-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद अमेरिका ने तेहरान को एक नया मसौदा प्रस्ताव भेजा है। रिपोर्टों के अनुसार, मध्यस्थ इस समय तेहरान में मौजूद है और दोनों पक्षों के प्रस्तावों को एक-दूसरे के करीब लाने की कोशिश कर रहा है, हालाँकि अभी तक कुछ भी अंतिम रूप नहीं ले सका है।

होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान का रुख

बाघेई ने कहा कि ईरान, ओमान के साथ मिलकर होर्मुज़ स्ट्रेट में 'स्थायी सुरक्षा' सुनिश्चित करने हेतु एक व्यवस्था बनाना चाहता है। इसके अतिरिक्त ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अन्य तटीय देशों के साथ मिलकर नियम और प्रोटोकॉल तैयार करने को भी तैयार है।

गौरतलब है कि युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट पर अपनी पकड़ मज़बूत कर ली थी और इज़रायल तथा अमेरिका से जुड़े जहाजों के गुजरने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस्लामाबाद वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिका ने इस जलमार्ग पर नौसैनिक नाकेबंदी कर दी, जिससे ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई।

युद्धविराम की पृष्ठभूमि

ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ था। इससे पहले 40 दिनों तक सशस्त्र संघर्ष चला, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हमलों से हुई थी। युद्धविराम के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में वार्ता की, परंतु कोई ठोस समझौता नहीं हो सका।

राष्ट्रपति पेजेशकियन का बयान

बुधवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि ईरान ने हमेशा अपने वादों का पालन किया है और युद्ध टालने की हरसंभव कोशिश की है। उन्होंने कहा, 'हमारी तरफ से सभी रास्ते अब भी खुले हैं। दबाव डालकर ईरान को झुकाने की कोशिश सिर्फ एक भ्रम है।' यह ऐसे समय में आया है जब दोनों पक्षों के बीच मसौदा प्रस्तावों का आदान-प्रदान जारी है और मध्यस्थ सक्रिय हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस्लामाबाद वार्ता की विफलता बताती है कि चैनल खुला होना और समझौता होना दो अलग बातें हैं। होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान की स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की माँग वास्तव में एक नई शर्त है — जो परमाणु मुद्दे से परे जाती है और वार्ता को और जटिल बनाती है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और ईरानी होर्मुज़ नियंत्रण — दोनों एक साथ बने रहना — किसी भी स्थायी समझौते की सबसे बड़ी बाधा है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता किसके ज़रिए हो रही है?
ईरान और अमेरिका के बीच संदेशों का आदान-प्रदान पाकिस्तान के माध्यम से हो रहा है। प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 21 मई को इसकी पुष्टि की और बताया कि दोनों पक्षों के बीच कई बार संदेश भेजे-प्राप्त किए गए हैं।
ईरान ने अमेरिका के सामने क्या माँगें रखी हैं?
ईरान की प्रमुख माँगों में फ्रीज़ की गई ईरानी संपत्तियों की रिहाई और ईरानी जहाजों के विरुद्ध अमेरिका की कथित 'समुद्री लूट' तथा शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों को रोकना शामिल है। इसके अलावा ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट में ओमान के साथ मिलकर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था भी चाहता है।
ईरान-अमेरिका युद्धविराम कब और कैसे हुआ?
ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ। इससे पहले 28 फरवरी से शुरू हुए 40 दिनों के सशस्त्र संघर्ष में तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर अमेरिका-इज़रायल के संयुक्त हमले हुए थे।
इस्लामाबाद वार्ता क्यों विफल रही?
युद्धविराम के बाद 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई वार्ता बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गई। इसके बाद अमेरिका ने होर्मुज़ स्ट्रेट पर नौसैनिक नाकेबंदी कर दी, जिससे ईरानी बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई।
ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन ने क्या कहा?
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक्स पर लिखा कि ईरान ने हमेशा अपने वादों का पालन किया है और युद्ध टालने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि सभी रास्ते खुले हैं और दबाव डालकर ईरान को झुकाने की कोशिश 'सिर्फ एक भ्रम है।'
राष्ट्र प्रेस
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