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ईरान-अमेरिका वार्ता: कई मुद्दों पर सहमति, पर समझौते की कोई डेडलाइन नहीं — बाघेई

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ईरान-अमेरिका वार्ता: कई मुद्दों पर सहमति, पर समझौते की कोई डेडलाइन नहीं — बाघेई

सारांश

ईरान ने माना कि अमेरिका के साथ अधिकांश मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन तेहरान ने साफ किया — जल्दबाजी नहीं होगी। 60 दिनों के फ्रेमवर्क में परमाणु विवरण अभी नहीं, और वाशिंगटन की 'अव्यवस्थित' निर्णय-प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

मुख्य बातें

ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 25 मई को कहा कि अमेरिका के साथ अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।
किसी भी अंतिम समझौते के लिए कोई डेडलाइन तय नहीं; ईरान राष्ट्रीय हितों की रक्षा को प्राथमिकता देगा।
14 अनुच्छेदों वाला मेमोरेंडम युद्ध समाप्त करने पर केंद्रित; इस स्तर पर परमाणु विवरण एजेंडे से बाहर।
बाघेई ने वाशिंगटन की निर्णय-प्रक्रिया को 'अव्यवस्थित' बताया, इजरायली प्रभाव का भी उल्लेख किया।
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में होर्मुज जलडमरूमध्य पर जल्द सकारात्मक खबर का संकेत दिया।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार, 25 मई को स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत में अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन किसी भी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर के लिए कोई निर्धारित समय-सीमा तय नहीं की गई है। तेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाघेई ने कहा कि ईरान की प्राथमिकता अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है और कोई भी परिणाम तभी घोषित किया जाएगा जब वह पूरी तरह हासिल हो जाए।

बातचीत की स्थिति

बाघेई ने ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी के हवाले से कहा कि कोई भी यह दावा नहीं कर सकता कि समझौते पर हस्ताक्षर होने वाले हैं। उन्होंने 60 दिनों के फ्रेमवर्क के अंतर्गत जारी वार्ता का उल्लेख करते हुए बताया कि इस अवधि में मेमोरेंडम और उससे जुड़े अन्य मुद्दों की बारीकियों पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इन चर्चाओं में परमाणु मामले एक अहम विषय होंगे।

परमाणु विवरण पर ईरान का रुख

बाघेई ने स्पष्ट किया कि ईरान इस स्तर पर परमाणु विवरणों पर चर्चा नहीं कर रहा है। उनके अनुसार, 14 अनुच्छेदों वाला मेमोरेंडम मुख्यतः युद्ध समाप्त करने पर केंद्रित है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव वर्षों से बना हुआ है।

अमेरिकी निर्णय प्रक्रिया पर आलोचना

बाघेई ने वाशिंगटन की निर्णय-प्रक्रिया को 'अव्यवस्थित' बताते हुए कहा कि कुछ ही घंटों में अमेरिका का बदला रवैया किसी भी बातचीत को जटिल बना देता है। उन्होंने कई इस्तीफों, कांग्रेस के विरोध, जनमत और अमेरिका की आंतरिक उलझनों का उल्लेख किया। बाघेई ने यह भी कहा कि इस स्थिति ने कुछ क्षेत्रों — जिनमें कथित तौर पर इजरायल से जुड़े पक्ष भी शामिल हैं — को प्रभाव डालने का अवसर दिया है।

रुबियो का बयान और होर्मुज संकेत

इससे एक दिन पहले रविवार, 24 मई को अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि अमेरिका-ईरान कूटनीतिक प्रयासों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। रुबियो ने संकेत दिया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर जल्द ही सकारात्मक खबर आ सकती है। उन्होंने कहा, "एक ऐसा प्रोसेस आगे बढ़ रहा है, जो अंततः दुनिया को उस स्थिति तक ले जा सकता है जहां, राष्ट्रपति ट्रंप की इच्छा के मुताबिक, लोगों को ईरान के परमाणु हथियारों को लेकर डर या चिंता न रहे।"

आगे क्या

गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच यह वार्ता ऐसे नाजुक दौर में हो रही है जब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वैश्विक तेल व्यापार पर भू-राजनीतिक दबाव बना हुआ है। बाघेई के बयान से स्पष्ट है कि तेहरान किसी बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर समझौते की ओर बढ़ना चाहता है। अगले कुछ हफ्तों में 60 दिनों के फ्रेमवर्क के तहत होने वाली वार्ता का परिणाम इस पूरी प्रक्रिया की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'डेडलाइन नहीं' कहकर दबाव से बचना। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन भी घरेलू राजनीतिक दबाव में है और होर्मुज पर कोई त्वरित समाधान दिखाने की ज़रूरत महसूस कर रहा है। ईरान की 'अव्यवस्थित वाशिंगटन' वाली आलोचना दरअसल अमेरिकी पक्ष की कमज़ोरी को बातचीत में अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश है। असली सवाल यह है कि 60 दिनों का फ्रेमवर्क समाप्त होने तक क्या परमाणु कार्यक्रम पर कोई ठोस, सत्यापन-योग्य प्रतिबद्धता सामने आएगी — या यह वार्ता भी 2015 के JCPOA जैसी एक और अधूरी कहानी बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता की मौजूदा स्थिति क्या है?
ईरान के प्रवक्ता बाघेई के अनुसार, अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर के लिए कोई तय समय-सीमा नहीं है। दोनों देश 60 दिनों के फ्रेमवर्क के तहत मेमोरेंडम की बारीकियों पर चर्चा जारी रखे हुए हैं।
ईरान-अमेरिका के 14 अनुच्छेदों वाले मेमोरेंडम में क्या है?
बाघेई के अनुसार, यह मेमोरेंडम मुख्यतः युद्ध समाप्त करने पर केंद्रित है। इस स्तर पर परमाणु विवरणों पर चर्चा नहीं हो रही; परमाणु मामले बाद के चरण के लिए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका ने क्या संकेत दिया?
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में कहा कि होर्मुज की स्थिति को लेकर जल्द सकारात्मक खबर आ सकती है। उन्होंने कहा कि एक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है जो अंततः ईरान के परमाणु हथियारों की चिंता को दूर कर सकती है।
ईरान ने अमेरिकी निर्णय-प्रक्रिया पर सवाल क्यों उठाए?
बाघेई ने कहा कि वाशिंगटन में कुछ ही घंटों में रवैया बदल जाता है, जिससे बातचीत जटिल होती है। उन्होंने इस्तीफों, कांग्रेस के विरोध और आंतरिक उलझनों को इसकी वजह बताया।
क्या ईरान-अमेरिका समझौता जल्द हो सकता है?
तेहरान के अनुसार, कोई विशेष डेडलाइन तय नहीं है और ईरान केवल तभी परिणाम घोषित करेगा जब वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुकूल हो। 60 दिनों के फ्रेमवर्क की समाप्ति तक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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