ईरान-अमेरिका वार्ता: कई मुद्दों पर सहमति, पर समझौते की कोई डेडलाइन नहीं — बाघेई
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार, 25 मई को स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत में अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन किसी भी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर के लिए कोई निर्धारित समय-सीमा तय नहीं की गई है। तेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाघेई ने कहा कि ईरान की प्राथमिकता अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है और कोई भी परिणाम तभी घोषित किया जाएगा जब वह पूरी तरह हासिल हो जाए।
बातचीत की स्थिति
बाघेई ने ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी के हवाले से कहा कि कोई भी यह दावा नहीं कर सकता कि समझौते पर हस्ताक्षर होने वाले हैं। उन्होंने 60 दिनों के फ्रेमवर्क के अंतर्गत जारी वार्ता का उल्लेख करते हुए बताया कि इस अवधि में मेमोरेंडम और उससे जुड़े अन्य मुद्दों की बारीकियों पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इन चर्चाओं में परमाणु मामले एक अहम विषय होंगे।
परमाणु विवरण पर ईरान का रुख
बाघेई ने स्पष्ट किया कि ईरान इस स्तर पर परमाणु विवरणों पर चर्चा नहीं कर रहा है। उनके अनुसार, 14 अनुच्छेदों वाला मेमोरेंडम मुख्यतः युद्ध समाप्त करने पर केंद्रित है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव वर्षों से बना हुआ है।
अमेरिकी निर्णय प्रक्रिया पर आलोचना
बाघेई ने वाशिंगटन की निर्णय-प्रक्रिया को 'अव्यवस्थित' बताते हुए कहा कि कुछ ही घंटों में अमेरिका का बदला रवैया किसी भी बातचीत को जटिल बना देता है। उन्होंने कई इस्तीफों, कांग्रेस के विरोध, जनमत और अमेरिका की आंतरिक उलझनों का उल्लेख किया। बाघेई ने यह भी कहा कि इस स्थिति ने कुछ क्षेत्रों — जिनमें कथित तौर पर इजरायल से जुड़े पक्ष भी शामिल हैं — को प्रभाव डालने का अवसर दिया है।
रुबियो का बयान और होर्मुज संकेत
इससे एक दिन पहले रविवार, 24 मई को अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि अमेरिका-ईरान कूटनीतिक प्रयासों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। रुबियो ने संकेत दिया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर जल्द ही सकारात्मक खबर आ सकती है। उन्होंने कहा, "एक ऐसा प्रोसेस आगे बढ़ रहा है, जो अंततः दुनिया को उस स्थिति तक ले जा सकता है जहां, राष्ट्रपति ट्रंप की इच्छा के मुताबिक, लोगों को ईरान के परमाणु हथियारों को लेकर डर या चिंता न रहे।"
आगे क्या
गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच यह वार्ता ऐसे नाजुक दौर में हो रही है जब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वैश्विक तेल व्यापार पर भू-राजनीतिक दबाव बना हुआ है। बाघेई के बयान से स्पष्ट है कि तेहरान किसी बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर समझौते की ओर बढ़ना चाहता है। अगले कुछ हफ्तों में 60 दिनों के फ्रेमवर्क के तहत होने वाली वार्ता का परिणाम इस पूरी प्रक्रिया की दिशा तय करेगा।