ईरान-अमेरिका युद्ध समाप्ति के लिए 14-बिंदु एमओयू पर काम जारी, 30-60 दिन में अंतिम समझौते की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 24 मई 2026 को पुष्टि की कि तेहरान और वाशिंगटन संयुक्त रूप से एक 14-बिंदुओं वाले समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं, जिसका मूल उद्देश्य दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करना है। बाघेई ने सरकारी प्रसारक आईआरआईबी से बात करते हुए कहा, 'इस समय हमारा ध्यान थोपी गई जंग को खत्म करने पर है।'
एमओयू में क्या शामिल है
बाघेई के अनुसार, एमओयू में जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो रही है, उनमें अमेरिका की ओर से समुद्री हमलों — जिसे ईरान नौसैनिक नाकेबंदी कहता है — को रोकना और ईरान की जब्त की गई संपत्तियों की वापसी शामिल हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध समाप्ति की शर्तें सभी मोर्चों पर लागू होंगी, जिसमें लेबनान भी शामिल है।
गौरतलब है कि इस समय ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत इन वार्ताओं का मुख्य एजेंडा नहीं है — जो पश्चिमी देशों के लिए एक संवेदनशील विषय रहा है।
समय-सीमा और अगले कदम
बाघेई ने बताया कि एमओयू पर आधिकारिक सहमति बनने के बाद 30 से 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते तक पहुँचने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगले तीन से चार दिन निर्णायक होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समय-सीमा तभी शुरू होगी जब दस्तावेज़ पर औपचारिक रूप से सहमति बन जाएगी।
पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका
बाघेई ने पाकिस्तान को इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य मध्यस्थ बताया और कहा कि अमेरिका तथा ईरान के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में उसकी भूमिका अत्यंत अहम है। यह बयान उस समय आया जब शुक्रवार, 23 मई को एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने तेहरान का दौरा किया था, जिसमें सेना प्रमुख आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी शामिल थे।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के साथ शुरू हुए 40 दिनों के संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को तीनों पक्षों — ईरान, अमेरिका और इजरायल — ने युद्धविराम पर सहमति बनाई थी। इसके बाद 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में एक दौर की शांति वार्ता हुई थी, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया था।
पिछले कुछ हफ्तों में दोनों पक्षों ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के ज़रिए संघर्ष समाप्ति की शर्तों को लेकर कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया है। यह वार्ता प्रक्रिया इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष एक स्थायी समाधान की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहे हैं।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि 14-बिंदु एमओयू की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका ईरान की संपत्तियों की वापसी और समुद्री प्रतिबंधों को हटाने पर कितनी लचीलापन दिखाता है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि क्षेत्र में स्थायी शांति की राह खुलती है या नहीं।