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ईरान-अमेरिका युद्ध समाप्ति के लिए 14-बिंदु एमओयू पर काम जारी, 30-60 दिन में अंतिम समझौते की उम्मीद

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ईरान-अमेरिका युद्ध समाप्ति के लिए 14-बिंदु एमओयू पर काम जारी, 30-60 दिन में अंतिम समझौते की उम्मीद

सारांश

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने पुष्टि की है कि तेहरान और वाशिंगटन 14-बिंदु एमओयू को अंतिम रूप देने के करीब हैं। सहमति बनने के बाद 30 से 60 दिनों में अंतिम समझौते की उम्मीद है। पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

मुख्य बातें

ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 24 मई 2026 को पुष्टि की कि ईरान-अमेरिका 14-बिंदु एमओयू को अंतिम रूप देने पर काम जारी है।
एमओयू पर सहमति के बाद 30 से 60 दिनों में अंतिम युद्ध-समाप्ति समझौते की उम्मीद।
प्रमुख मुद्दों में अमेरिकी समुद्री हमलों/नाकेबंदी को रोकना और ईरान की जब्त संपत्तियों की वापसी शामिल।
पाकिस्तान — सेना प्रमुख आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी के नेतृत्व में — मुख्य मध्यस्थ की भूमिका में।
युद्धविराम 8 अप्रैल को हुआ था; 11-12 अप्रैल की इस्लामाबाद वार्ता बिना अंतिम समझौते के समाप्त हुई थी।
बाघेई के अनुसार, इस समय परमाणु मुद्दा वार्ता का मुख्य फोकस नहीं है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 24 मई 2026 को पुष्टि की कि तेहरान और वाशिंगटन संयुक्त रूप से एक 14-बिंदुओं वाले समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं, जिसका मूल उद्देश्य दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करना है। बाघेई ने सरकारी प्रसारक आईआरआईबी से बात करते हुए कहा, 'इस समय हमारा ध्यान थोपी गई जंग को खत्म करने पर है।'

एमओयू में क्या शामिल है

बाघेई के अनुसार, एमओयू में जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो रही है, उनमें अमेरिका की ओर से समुद्री हमलों — जिसे ईरान नौसैनिक नाकेबंदी कहता है — को रोकना और ईरान की जब्त की गई संपत्तियों की वापसी शामिल हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध समाप्ति की शर्तें सभी मोर्चों पर लागू होंगी, जिसमें लेबनान भी शामिल है

गौरतलब है कि इस समय ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत इन वार्ताओं का मुख्य एजेंडा नहीं है — जो पश्चिमी देशों के लिए एक संवेदनशील विषय रहा है।

समय-सीमा और अगले कदम

बाघेई ने बताया कि एमओयू पर आधिकारिक सहमति बनने के बाद 30 से 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते तक पहुँचने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगले तीन से चार दिन निर्णायक होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समय-सीमा तभी शुरू होगी जब दस्तावेज़ पर औपचारिक रूप से सहमति बन जाएगी।

पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका

बाघेई ने पाकिस्तान को इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य मध्यस्थ बताया और कहा कि अमेरिका तथा ईरान के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में उसकी भूमिका अत्यंत अहम है। यह बयान उस समय आया जब शुक्रवार, 23 मई को एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने तेहरान का दौरा किया था, जिसमें सेना प्रमुख आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी शामिल थे।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के साथ शुरू हुए 40 दिनों के संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को तीनों पक्षों — ईरान, अमेरिका और इजरायल — ने युद्धविराम पर सहमति बनाई थी। इसके बाद 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में एक दौर की शांति वार्ता हुई थी, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया था।

पिछले कुछ हफ्तों में दोनों पक्षों ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के ज़रिए संघर्ष समाप्ति की शर्तों को लेकर कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया है। यह वार्ता प्रक्रिया इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष एक स्थायी समाधान की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहे हैं।

आगे क्या होगा

विशेषज्ञों का मानना है कि 14-बिंदु एमओयू की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका ईरान की संपत्तियों की वापसी और समुद्री प्रतिबंधों को हटाने पर कितनी लचीलापन दिखाता है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि क्षेत्र में स्थायी शांति की राह खुलती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि अप्रैल की इस्लामाबाद वार्ता भी बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हुई थी। ईरान की जब्त संपत्तियों की वापसी और समुद्री प्रतिबंधों को हटाना — दोनों ही अमेरिकी घरेलू राजनीति में अत्यंत संवेदनशील मुद्दे हैं, जो किसी भी समझौते को कांग्रेस की मंज़ूरी की दृष्टि से जटिल बनाते हैं। परमाणु मुद्दे को जानबूझकर वार्ता के दायरे से बाहर रखना दोनों पक्षों की व्यावहारिकता दर्शाता है, पर इससे पश्चिमी सहयोगियों में असंतोष भी पैदा हो सकता है। पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका उसे कूटनीतिक लाभ देती है, लेकिन यह भूमिका उसकी अपनी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं से भी अलग नहीं देखी जा सकती।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान और अमेरिका के बीच एमओयू क्या है और इसमें क्या शामिल है?
यह एक 14-बिंदुओं वाला समझौता ज्ञापन है जिसे ईरान और अमेरिका युद्ध समाप्ति के लिए अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं। इसमें अमेरिकी समुद्री हमलों और नाकेबंदी को रोकना तथा ईरान की जब्त संपत्तियों की वापसी जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल हैं।
ईरान-अमेरिका अंतिम समझौते में कितना समय लगेगा?
ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई के अनुसार, एमओयू पर आधिकारिक सहमति बनने के बाद 30 से 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुँचने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले तीन से चार दिन निर्णायक होंगे।
पाकिस्तान ईरान-अमेरिका वार्ता में क्या भूमिका निभा रहा है?
पाकिस्तान इस वार्ता में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी के नेतृत्व में एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने 23 मई को तेहरान का दौरा किया। दोनों पक्षों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में पाकिस्तान की भूमिका केंद्रीय बताई जा रही है।
ईरान-अमेरिका युद्ध कब और कैसे शुरू हुआ था?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के साथ यह संघर्ष शुरू हुआ था। 40 दिनों तक चले इस संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को तीनों पक्षों ने युद्धविराम पर सहमति बनाई थी।
क्या ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी बातचीत हो रही है?
नहीं, इस्माइल बाघेई ने स्पष्ट किया है कि इस समय ईरान का परमाणु मुद्दा वार्ता का मुख्य फोकस नहीं है। मौजूदा बातचीत पूरी तरह युद्ध समाप्ति की शर्तों पर केंद्रित है।
राष्ट्र प्रेस
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