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ईरान-अमेरिका शांति एमओयू पर गतिरोध, फ्रीज संपत्तियों समेत कई शर्तों पर अमेरिका अड़ा

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ईरान-अमेरिका शांति एमओयू पर गतिरोध, फ्रीज संपत्तियों समेत कई शर्तों पर अमेरिका अड़ा

सारांश

ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए बन रहे 14 बिंदुओं वाले एमओयू पर गतिरोध गहरा गया है। फ्रीज संपत्तियों की रिहाई और नौसैनिक नाकेबंदी जैसे मुद्दों पर अमेरिका के अड़ियल रुख के कारण समझौता रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है।

मुख्य बातें

अमेरिका, ईरान-अमेरिका एमओयू की कुछ अहम शर्तों — जिनमें ईरान की फ्रीज संपत्तियों की रिहाई शामिल है — को मानने से इनकार कर रहा है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बाघेई ने कहा कि 30 से 60 दिनों में अंतिम समझौते की संभावना है।
प्रस्तावित एमओयू में 14 बिंदु हैं; मुख्य विवाद अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने और फ्रीज संपत्तियाँ जारी करने को लेकर है।
ईरान ने अपने 'रेड लाइन' मुद्दों पर पीछे न हटने की स्पष्ट चेतावनी दी है; एमओयू रद्द होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया।
8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ था; 11-12 अप्रैल की इस्लामाबाद वार्ता भी बिना नतीजे के समाप्त हुई थी।

ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर बातचीत में गतिरोध बना हुआ है, क्योंकि अमेरिका अब भी इस मसौदे की कुछ अहम शर्तों को मानने से इनकार कर रहा है। ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने अपने संवाददाता के हवाले से 25 मई को बताया कि रविवार को दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई, लेकिन कोई निर्णायक प्रगति नहीं हो सकी।

मुख्य विवाद के बिंदु

रिपोर्टों के अनुसार, एमओयू में जिन बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है, उनमें ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त करना प्रमुख हैं। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े 'रेड लाइन' मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अभी भी इस बात की संभावना बनी हुई है कि यह एमओयू पूरी तरह रद्द हो सकता है।

ईरान के विदेश मंत्रालय का बयान

इससे पहले शनिवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बाघेई ने सरकारी चैनल आईआरआईबी टीवी से बात करते हुए कहा था कि दोनों देश पहले 14 बिंदुओं वाले एक एमओयू पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बाघेई ने कहा, 'इस समय हमारा मुख्य ध्यान इस थोपे गए युद्ध को खत्म करने पर है।' उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 30 से 60 दिनों के भीतर तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक अंतिम समझौते की संभावना है।

संघर्ष और युद्धविराम की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ था। इससे पहले 40 दिनों तक सशस्त्र संघर्ष जारी रहा, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों से हुई थी। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में पहले से ही तनाव चरम पर था।

इस्लामाबाद वार्ता और अब तक की स्थिति

युद्धविराम के बाद 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों के बीच एक दौर की शांति वार्ता हुई थी, लेकिन उसमें भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अब दोनों पक्षों के बीच जारी बातचीत में अमेरिका के रुख के कारण एमओयू की संभावनाएँ अनिश्चित बनी हुई हैं। आने वाले हफ्तों में इस वार्ता का परिणाम क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा तय कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब तक कि किसी तीसरे मध्यस्थ की भूमिका सामने न आए।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान-अमेरिका एमओयू क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
यह ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए प्रस्तावित 14 बिंदुओं वाला समझौता ज्ञापन है। अमेरिका इसकी कुछ शर्तों — विशेष रूप से ईरान की फ्रीज संपत्तियों की रिहाई और नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने — को मानने से इनकार कर रहा है, जिससे वार्ता में गतिरोध बना हुआ है।
ईरान की 'रेड लाइन' किन मुद्दों पर है?
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा। इनमें फ्रीज संपत्तियों की वापसी और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त कराना प्रमुख हैं।
ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्धविराम कब और कैसे हुआ था?
8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ था, जो 40 दिनों के सशस्त्र संघर्ष के बाद आया। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से शुरू हुआ था।
इस्लामाबाद वार्ता का क्या नतीजा रहा?
युद्धविराम के बाद 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों के बीच शांति वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। यह वार्ता का पहला औपचारिक दौर था।
क्या एमओयू रद्द हो सकता है?
रिपोर्टों के अनुसार, एमओयू रद्द होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने 30 से 60 दिनों में अंतिम समझौते की उम्मीद जताई है, लेकिन अमेरिका के अड़ियल रुख के कारण स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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