ईरान ने अपने न्यूक्लियर संवर्धन अधिकारों पर कोई समझौता नहीं किया, अमेरिका पर युद्ध भड़काने का आरोप लगाया
सारांश
Key Takeaways
- ईरान ने अपने न्यूक्लियर संवर्धन अधिकारों पर समझौता न करने की बात कही।
- बाघेई ने अमेरिका पर युद्ध भड़काने का आरोप लगाया।
- न्यूक्लियर अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानून और एनपीटी पर आधारित हैं।
तेहरान, १६ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने स्पष्ट किया है कि ईरान अपने न्यूक्लियर संवर्धन अधिकारों पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान का न्यूक्लियर एनर्जी पर अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानून और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर आधारित है।
बाघेई ने तेहरान में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पश्चिमी मीडिया द्वारा ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम के संबंध में उठाए गए सवालों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत ईरान के वैध अधिकारों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
बाघेई ने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु संवर्धन का अधिकार किसी बाहरी शक्ति की कृपा पर निर्भर नहीं है और न ही इसे दबाव या संघर्ष के समय वापस लिया जा सकता है। जब तक ईरान एनपीटी का सदस्य है, उसे इस संधि के सभी प्रावधानों का पूरा लाभ मिलना चाहिए। पाकिस्तान में हाल की ईरान-अमेरिका वार्ता पर प्रतिक्रिया देते हुए बाघेई ने कहा कि किसी भी संभावित समझौते के लिए पहले एक व्यापक ढांचा तैयार करना जरूरी है।
उन्होंने लेबनान में संघर्ष को लेकर कहा कि ईरान हमेशा “वैध प्रतिरोध” का समर्थन करता आया है। उन्होंने कहा कि लेबनान में युद्ध समाप्त करने का प्रयास भी उस सीजफायर समझौते का हिस्सा था, जिस पर इस्लामाबाद वार्ता में चर्चा हुई थी।
बाघेई ने आरोप लगाया कि दूसरा पक्ष (इजरायल) शुरू से ही सीजफायर की शर्तों का पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी समझौते के तहत एक पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करता है, तो दूसरे पक्ष को भी अपनी जिम्मेदारियों को उसी अनुपात में समायोजित करने का अधिकार होता है।
उन्होंने इस दावे को खारिज किया कि ईरान ने लेबनान में प्रतिरोध मोर्चों का समर्थन कम किया है। होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के संबंध में यूरोपीय प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए बाघेई ने कहा कि ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगी इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा कि ईरान ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र का संरक्षक रहा है और पिछले ४० दिनों में जो भी व्यवधान हुए हैं, वे अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संघर्ष का परिणाम हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि बाहरी हस्तक्षेप से क्षेत्रीय स्थिति और जटिल हो सकती है। उन्होंने कहा कि कुछ यूरोपीय देश अमेरिकी और इजरायल की रणनीति के जाल में नहीं फंसे हैं, यह एक सकारात्मक संकेत है।
अंत में, उन्होंने दोहराया कि यदि अमेरिका का हस्तक्षेप समाप्त हो जाए, तो ईरान क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में स्थिरता बनाए रख सकता है।