ईरान का एमओयू के बिंदु 1, 4, 5, 10, 11 लागू होने पर जोर, स्विट्जरलैंड में अमेरिका से बैठक आज
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 21 जून 2026 को स्पष्ट किया कि इस्लामी गणराज्य ईरान युद्ध समाप्ति समझौते के तहत दूसरे पक्ष की प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि 18 जून को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के प्रमुख बिंदुओं को लागू किए बिना अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ना संभव नहीं है।
स्विट्जरलैंड बैठक का उद्देश्य
प्रवक्ता बाघेई ने बताया कि रविवार को स्विट्जरलैंड में होने वाली बैठक का मूल उद्देश्य 18 जून के एमओयू के प्रावधानों की समीक्षा करना और उनके क्रियान्वयन की दिशा में अगले कदम तय करना है। बैठक में ईरान के तेल निर्यात और जमी हुई संपत्तियों की रिहाई जैसे अहम मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा।
एमओयू के कौन-से बिंदु पहले लागू होने चाहिए
बाघेई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'इस्लामी गणराज्य ईरान दूसरे पक्ष के वादों को लागू करने की प्रक्रिया को पूरी गंभीरता और सावधानी के साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि एमओयू की शर्त के अनुसार अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू करने से पहले बिंदु 1, 4, 5, 10 और 11 को लागू करना अनिवार्य है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण बिंदु 1 है, जिसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध विराम शामिल है।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड पहुंचा
अमेरिका के साथ बातचीत के लिए ईरान का प्रतिनिधिमंडल शनिवार देर रात स्विट्जरलैंड पहुंचा। ईरानी सरकारी प्रसारक आईआरआईबी टीवी के अनुसार प्रतिनिधिमंडल बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में बैठक में भाग लेगा। रिपोर्टों के अनुसार ईरानी प्रतिनिधिमंडल का कोडनेम 'मिनाब 168' बताया गया है।
स्विस विदेश मंत्रालय का स्वागत
स्विस विदेश मंत्रालय ने एक्स पर लिखा, 'हम स्विट्जरलैंड में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आने का स्वागत करते हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित ज्ञापन समझौते को लागू करने के हिस्से के तौर पर बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट जा रहा है।' यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मध्य-पूर्व में तनाव कम करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयास तेज हो रहे हैं।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि एमओयू के प्रमुख बिंदुओं के क्रियान्वयन की पुष्टि के बाद ही अंतिम समझौते की बातचीत का अगला चरण शुरू हो सकेगा। ईरान का रुख स्पष्ट है — तेल निर्यात बहाली और जमी संपत्तियों की रिहाई उसकी प्राथमिक शर्तें हैं, और इन पर ठोस प्रगति के बिना वह अंतिम वार्ता की मेज पर नहीं बैठेगा।