24 सितंबर 2026
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यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड: 9 की मौत, विपक्ष ने योगी सरकार को घेरा, उच्चस्तरीय जांच की मांग

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यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड: 9 की मौत, विपक्ष ने योगी सरकार को घेरा, उच्चस्तरीय जांच की मांग

सारांश

यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती बस में आग — 9 मौतें और विपक्ष का एकजुट हमला। सपा, कांग्रेस ने योगी सरकार से जवाब माँगा और बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। यह हादसा एक्सप्रेसवे सुरक्षा की पुरानी खामियों को एक बार फिर उजागर करता है।

मुख्य बातें

यमुना एक्सप्रेसवे , ग्रेटर नोएडा में 24 सितंबर 2026 को देर रात चलती बस में आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद और कांग्रेस नेता आसिम वकार समेत विपक्ष ने उच्चस्तरीय जांच की माँग की।
कांग्रेस ने हादसे को 'भ्रष्टाचार की आग' बताते हुए परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से जवाब तलब किया।
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने बसों में इमरजेंसी एग्जिट के अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की माँग उठाई।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने घायलों के समुचित उपचार और सुरक्षा ऑडिट को प्राथमिकता देने की अपील की।

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर देर रात एक चलती बस में अचानक आग लग जाने से 9 लोगों की मौत हो गई। 24 सितंबर 2026 को घटित इस दर्दनाक हादसे के बाद विपक्षी दलों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं और उच्चस्तरीय जांच की माँग की है।

हादसे का विवरण

यमुना एक्सप्रेसवे पर देर रात चलती बस में अचानक आग भड़क उठी। बस में सवार यात्रियों को बाहर निकलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला, जिसके परिणामस्वरूप 9 लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए विपक्षी दलों ने तत्काल जाँच और सुरक्षा सुधारों की माँग उठाई है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और सरकार पर हमला

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस घटना पर गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने कहा, 'यह बहुत ही दुखद घटना है। हम पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। इसकी उच्चस्तरीय जांच की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।'

कांग्रेस नेता आसिम वकार ने इस हादसे को लेकर योगी सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'यह बस में लगी आग नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की आग है, जिसमें लोग जलकर मर गए।' उन्होंने माँग की कि परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से जवाब तलब किया जाए और 'भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी बसों' की सूची सार्वजनिक की जाए।

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भी घटना पर शोक व्यक्त करते हुए माँग की कि घायलों का समुचित उपचार सुनिश्चित किया जाए और सरकार बस सेवाओं का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराए।

सपा का सुरक्षा उपकरणों पर सवाल

सपा के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने घटना को 'बेहद दुखद' बताते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने कहा, 'इन घटनाओं में सुरक्षा उपकरण पर्याप्त नज़र नहीं आते। लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिलता।' उन्होंने यह भी कहा कि बसों में केवल इमरजेंसी एग्जिट के अलावा भी अतिरिक्त सुरक्षा उपाय होने चाहिए, ताकि भविष्य में जनहानि को रोका जा सके।

आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसों की संख्या को लेकर पहले से चिंता व्यक्त की जाती रही है। गौरतलब है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर बीते वर्षों में भी कई गंभीर सड़क दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं। विपक्षी दलों का तर्क है कि सार्वजनिक परिवहन वाहनों में अग्नि-सुरक्षा मानकों की अनदेखी के गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं।

आगे क्या होगा

विपक्षी दलों की माँग के बाद अब सरकार पर उच्चस्तरीय जाँच बैठाने और परिवहन सुरक्षा नीति में सुधार का दबाव बढ़ गया है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हादसे के बाद यात्री बसों में अग्निशमन यंत्रों की अनिवार्यता और इमरजेंसी निकास व्यवस्था की समीक्षा ज़रूरी हो गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सार्वजनिक परिवहन में अग्नि-सुरक्षा मानकों की पुरानी अनदेखी की एक और कड़ी है। विपक्ष का 'भ्रष्टाचार की आग' वाला बयान राजनीतिक तो है, लेकिन इसमें एक असुविधाजनक सच्चाई भी है — बसों में अग्निशमन यंत्र और कार्यात्मक इमरजेंसी एग्जिट की अनिवार्यता कागज़ों पर है, ज़मीन पर नहीं। असली जवाबदेही यह है कि सरकार सुरक्षा ऑडिट की समय-सीमा और उसके परिणाम सार्वजनिक करे — केवल जाँच बैठाना पर्याप्त नहीं। जब तक परिवहन विभाग की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, ऐसी त्रासदियाँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसे में क्या हुआ?
24 सितंबर 2026 की देर रात ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक चलती बस में अचानक आग लग गई, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई और कई यात्री घायल हो गए। यात्रियों को बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाया।
विपक्ष ने इस हादसे पर क्या माँग की है?
सपा और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने योगी सरकार से उच्चस्तरीय जाँच, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से जवाबतलबी और सभी सार्वजनिक बसों का सुरक्षा ऑडिट कराने की माँग की है। कांग्रेस ने 'भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी बसों' की सूची सार्वजनिक करने की भी माँग उठाई है।
बस में आग से मौतों के लिए विपक्ष सरकार को क्यों ज़िम्मेदार ठहरा रहा है?
कांग्रेस नेता आसिम वकार का कहना है कि यह 'भ्रष्टाचार की आग' है, यानी वाहनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और भ्रष्ट प्रक्रियाओं के कारण बसें असुरक्षित हो रही हैं। सपा ने भी बसों में पर्याप्त सुरक्षा उपकरण न होने को जवाबदेही का मुद्दा बनाया है।
बस दुर्घटनाओं में जान बचाने के लिए क्या सुधार की माँग की गई है?
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने माँग की है कि बसों में केवल इमरजेंसी एग्जिट नहीं, बल्कि अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी हों ताकि यात्री आग जैसी आपात स्थिति में समय पर बाहर निकल सकें। कांग्रेस ने नियमित सुरक्षा ऑडिट को प्राथमिकता देने की माँग की है।
योगी सरकार की इस हादसे पर क्या प्रतिक्रिया आई है?
अभी तक परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह या योगी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। विपक्ष सरकार पर जवाब देने के लिए लगातार दबाव बना रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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