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ईरान-अमेरिका MOU पर बाघेई की चेतावनी: '1953 से चला आ रहा अविश्वास, भरोसे के लिए लंबा रास्ता बाकी'

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ईरान-अमेरिका MOU पर बाघेई की चेतावनी: '1953 से चला आ रहा अविश्वास, भरोसे के लिए लंबा रास्ता बाकी'

सारांश

ईरान-अमेरिका के बीच MOU अंतिम रूप ले चुका है और जिनेवा में 19 जून को समझौता होगा — लेकिन ईरानी प्रवक्ता बाघेई ने साफ कहा कि 1953 से चला आ रहा अविश्वास रातोरात नहीं मिटेगा। ईरान ने लेबनान की संप्रभुता को शर्त बनाया और इजरायल पर समझौते को पटरी से उतारने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 15 जून 2026 को कहा कि अमेरिका पर भरोसे के लिए 'लंबा रास्ता' तय करना होगा।
ईरान का अविश्वास 1953 के कथित तख्तापलट से जुड़ा है, जब कथित तौर पर अमेरिका-ब्रिटेन ने प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग की सरकार गिराई थी।
ईरान-अमेरिका MOU अंतिम रूप ले चुका है; औपचारिक समझौता 19 जून को जिनेवा में होगा।
ईरान ने लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को समझौते की प्रमुख शर्त बताया।
बाघेई ने इजरायल पर आरोप लगाया कि उसने शांति प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश की।
ईरान ने IAEA और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर परमाणु ठिकानों पर हमलों के खिलाफ जिम्मेदारी न निभाने का आरोप लगाया।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 15 जून 2026 को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ भरोसा बहाल करने के लिए ईरान को अभी 'लंबा रास्ता' तय करना होगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान शांति समझौता 19 जून को जिनेवा में औपचारिक रूप से संपन्न होने वाला है और दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MOU) अंतिम रूप ले चुका है।

अविश्वास की ऐतिहासिक जड़ें

बाघेई ने अमेरिका के साथ संबंधों पर बोलते हुए कहा, 'हम अमेरिका पर भरोसा नहीं करते क्योंकि हमारे पास उनके साथ पहले के अनुभव हैं जो 1953 तक जाते हैं। उस समय से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच भरोसा समाप्त हो चुका है और यह अविश्वास गहराई तक स्थापित हो गया है।' गौरतलब है कि 1953 में कथित तौर पर अमेरिका और ब्रिटेन ने ईरान के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग की सरकार गिरा दी थी। मोसादेग पर तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण के चलते पश्चिमी देशों का दबाव था और कथित तख्तापलट के बाद उन्हें पद से हटाकर कैद कर लिया गया था।

MOU और समझौते की मुख्य शर्तें

बाघेई ने पुष्टि की कि ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन (MOU) अंतिम रूप ले चुका है, जिसका उद्देश्य ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल द्वारा 'थोपे गए युद्ध' को सभी मोर्चों पर समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए हैं और यह समझौता एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है। इस समझौते का ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर चुके हैं, जबकि मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसकी जानकारी संसद में दी।

लेबनान को बनाया अहम शर्त

ईरान ने लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को अमेरिका के साथ हुए समझौते की प्रमुख शर्तों में शामिल करने का दावा किया है। बाघेई के अनुसार, समझौते में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने और लेबनान की स्वतंत्रता व उसकी सीमाओं का सम्मान करने पर जोर दिया गया है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब लेबनान में ईरान समर्थित ताकतों और इजरायल के बीच तनाव की पृष्ठभूमि बनी हुई है।

इजरायल पर आरोप और प्रतिरोध का दावा

बाघेई ने आरोप लगाया कि इजरायल ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच बन रही समझ को पटरी से उतारने की कोशिश की, लेकिन ईरान और उसके सहयोगियों के प्रतिरोध ने इस प्रयास को विफल कर दिया। उन्होंने कहा, 'भविष्य की पीढ़ियाँ देखेंगी कि ईरान और उसके सहयोगियों ने यहूदी शासन की गतिविधियों को अपने राष्ट्रीय हितों और लेबनान के हितों की रक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया।' बाघेई ने यह भी दावा किया कि इजरायल की कार्रवाई ने उल्टा प्रतिरोधी मोर्चे की एकजुटता को और मजबूत किया।

परमाणु ठिकानों पर हमले और मानवीय नुकसान

बाघेई ने ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ईरान की शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया गया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने इस कथित अवैध कार्रवाई के विरुद्ध अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के दौरान ईरान ने अपने कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और नागरिकों को खोया है, जिसे देश कभी नहीं भूलेगा। इस उपलब्धि का श्रेय उन्होंने ईरानी जनता के 'ऐतिहासिक प्रतिरोध' को दिया और कहा कि पिछले 110 दिनों के दौरान जनता ने सैन्य और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर देश का साथ दिया।

जिनेवा में 19 जून को होने वाला औपचारिक समझौता इस कूटनीतिक प्रक्रिया की अगली बड़ी कड़ी होगी, लेकिन बाघेई के बयान से स्पष्ट है कि ईरान इसे अंत नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा की शुरुआत मानता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न केवल द्विपक्षीय। असली परीक्षा यह होगी कि 19 जून के बाद प्रतिबंधों में ढील और परमाणु पारदर्शिता पर अमल किस गति से होता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान-अमेरिका MOU क्या है और यह कब अंतिम होगा?
ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन (MOU) अंतिम रूप ले चुका है, जिसका उद्देश्य सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना है। इसका औपचारिक समझौता 19 जून 2026 को जिनेवा में संपन्न होने वाला है।
ईरान अमेरिका पर भरोसा क्यों नहीं करता?
ईरानी प्रवक्ता बाघेई के अनुसार, यह अविश्वास 1953 की उस घटना से जुड़ा है जब कथित तौर पर अमेरिका और ब्रिटेन ने ईरान के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग की सरकार गिराई थी। बाघेई ने कहा कि उस समय से दोनों देशों के बीच भरोसा समाप्त हो चुका है।
ईरान ने लेबनान को शांति समझौते से क्यों जोड़ा?
ईरान ने लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को अमेरिका के साथ समझौते की प्रमुख शर्तों में शामिल करने का दावा किया है। बाघेई के अनुसार, समझौते में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने और लेबनान की सीमाओं का सम्मान करने पर जोर दिया गया है।
इजरायल की भूमिका को लेकर ईरान का क्या कहना है?
बाघेई ने आरोप लगाया कि इजरायल ने ईरान-अमेरिका के बीच बन रही शांति समझ को बाधित करने की कोशिश की, लेकिन ईरान और उसके सहयोगियों के प्रतिरोध ने इस प्रयास को विफल कर दिया। उन्होंने दावा किया कि इजरायल की कार्रवाई ने उल्टा प्रतिरोधी मोर्चे को और एकजुट किया।
ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले को लेकर क्या कहा गया?
बाघेई ने ईरान की शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हुए हमलों की निंदा की और कहा कि IAEA तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस कथित अवैध कार्रवाई के खिलाफ अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। युद्ध के दौरान ईरान ने कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और नागरिकों को खोया है।
राष्ट्र प्रेस
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