ईरान-अमेरिका अंतिम समझौते पर शुक्रवार से वार्ता, स्विट्जरलैंड में होंगे MOU पर हस्ताक्षर
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 17 जून 2026 को तेहरान में विदेशी राजनयिकों के साथ बैठक के दौरान घोषणा की कि ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम शांति समझौते पर बातचीत का नया दौर शुक्रवार से शुरू होगा। दोनों देश पहले ही युद्ध समाप्ति के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) को अंतिम रूप दे चुके हैं, जिस पर स्विट्जरलैंड में शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
वार्ता के दो चरण
अराघची ने स्पष्ट किया कि अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हुए हमलों के कारण उत्पन्न जटिलताओं को देखते हुए बातचीत को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में युद्ध समाप्ति, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, ईरान के विरुद्ध अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी, ईरान की जमी हुई संपत्तियाँ और युद्ध से हुए नुकसान के पुनर्निर्माण जैसे मुद्दों पर MOU तैयार किया गया है।
दूसरे चरण में अगले 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी। यह दो-चरणीय ढाँचा इस बात का संकेत है कि तत्काल संघर्ष-विराम को दीर्घकालिक परमाणु विवाद से अलग रखकर आगे बढ़ने की रणनीति अपनाई गई है।
युद्ध समाप्ति की घोषणा
अराघची के अनुसार, इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू युद्ध समाप्ति की घोषणा है। उन्होंने बताया कि समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के बाद सोमवार सुबह ही युद्ध समाप्ति की घोषणा कर दी गई थी, जबकि MOU आधिकारिक रूप से शुक्रवार से लागू होगा। अमेरिका, पाकिस्तान और ईरान ने सोमवार को कई सप्ताह की वार्ताओं के बाद इस MOU को अंतिम रूप देने की संयुक्त घोषणा की थी।
लेबनान का मुद्दा और इजरायल को चेतावनी
विदेश मंत्री अराघची ने स्पष्ट किया कि इस शांति समझौते में लेबनान की स्थिति को भी सम्मिलित किया गया है। उनके मुताबिक लेबनान में युद्ध का अंत और वहाँ से इजरायली सेना की वापसी इस शांति प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जब तक कब्जे वाले लेबनानी क्षेत्रों से इजरायली सैनिक नहीं हटते, तब तक युद्ध की समाप्ति को पूर्ण नहीं माना जा सकता।
अराघची ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब से लेबनान पर इजरायल का कोई भी सैन्य हमला या वहाँ कब्जा बनाए रखना शांति समझौते का उल्लंघन माना जाएगा।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान समेत कई ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। यह संघर्ष कई सप्ताहों तक जारी रहा, जिसके बाद तीनों पक्षों ने वार्ता की मेज पर आने का निर्णय लिया।
आगे क्या होगा
शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में MOU पर हस्ताक्षर के बाद परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंध हटाने पर 60 दिनों की वार्ता का दूसरा चरण शुरू होगा। यह प्रक्रिया क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है, बशर्ते लेबनान मुद्दे पर इजरायल की भूमिका पर सहमति बने।