2 अगस्त 2026
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ईरान-अमेरिका अंतिम समझौते पर शुक्रवार से वार्ता, स्विट्जरलैंड में होंगे MOU पर हस्ताक्षर

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ईरान-अमेरिका अंतिम समझौते पर शुक्रवार से वार्ता, स्विट्जरलैंड में होंगे MOU पर हस्ताक्षर

सारांश

महीनों के सैन्य संघर्ष के बाद ईरान और अमेरिका शांति की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं — शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में MOU पर हस्ताक्षर होंगे और 60 दिनों में परमाणु व प्रतिबंध जैसे कठिन मुद्दों पर दूसरे चरण की वार्ता शुरू होगी। लेबनान से इजरायली वापसी की शर्त इस समझौते को और जटिल बनाती है।

मुख्य बातें

ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 17 जून 2026 को घोषणा की कि अंतिम समझौते पर वार्ता शुक्रवार से शुरू होगी।
अमेरिका, पाकिस्तान और ईरान ने युद्ध समाप्ति का MOU अंतिम रूप दिया; स्विट्जरलैंड में शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।
वार्ता दो चरणों में — पहले चरण में युद्ध समाप्ति, नाकाबंदी व जमी संपत्तियाँ; दूसरे चरण में 60 दिनों तक परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंध।
लेबनान से इजरायली सेना की वापसी शांति समझौते की अनिवार्य शर्त घोषित; उल्लंघन पर समझौता भंग माना जाएगा।
संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को इजरायल-अमेरिका के तेहरान पर संयुक्त हमलों से हुई थी।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 17 जून 2026 को तेहरान में विदेशी राजनयिकों के साथ बैठक के दौरान घोषणा की कि ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम शांति समझौते पर बातचीत का नया दौर शुक्रवार से शुरू होगा। दोनों देश पहले ही युद्ध समाप्ति के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) को अंतिम रूप दे चुके हैं, जिस पर स्विट्जरलैंड में शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

वार्ता के दो चरण

अराघची ने स्पष्ट किया कि अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हुए हमलों के कारण उत्पन्न जटिलताओं को देखते हुए बातचीत को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में युद्ध समाप्ति, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, ईरान के विरुद्ध अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी, ईरान की जमी हुई संपत्तियाँ और युद्ध से हुए नुकसान के पुनर्निर्माण जैसे मुद्दों पर MOU तैयार किया गया है।

दूसरे चरण में अगले 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी। यह दो-चरणीय ढाँचा इस बात का संकेत है कि तत्काल संघर्ष-विराम को दीर्घकालिक परमाणु विवाद से अलग रखकर आगे बढ़ने की रणनीति अपनाई गई है।

युद्ध समाप्ति की घोषणा

अराघची के अनुसार, इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू युद्ध समाप्ति की घोषणा है। उन्होंने बताया कि समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के बाद सोमवार सुबह ही युद्ध समाप्ति की घोषणा कर दी गई थी, जबकि MOU आधिकारिक रूप से शुक्रवार से लागू होगा। अमेरिका, पाकिस्तान और ईरान ने सोमवार को कई सप्ताह की वार्ताओं के बाद इस MOU को अंतिम रूप देने की संयुक्त घोषणा की थी।

लेबनान का मुद्दा और इजरायल को चेतावनी

विदेश मंत्री अराघची ने स्पष्ट किया कि इस शांति समझौते में लेबनान की स्थिति को भी सम्मिलित किया गया है। उनके मुताबिक लेबनान में युद्ध का अंत और वहाँ से इजरायली सेना की वापसी इस शांति प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जब तक कब्जे वाले लेबनानी क्षेत्रों से इजरायली सैनिक नहीं हटते, तब तक युद्ध की समाप्ति को पूर्ण नहीं माना जा सकता।

अराघची ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब से लेबनान पर इजरायल का कोई भी सैन्य हमला या वहाँ कब्जा बनाए रखना शांति समझौते का उल्लंघन माना जाएगा।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान समेत कई ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। यह संघर्ष कई सप्ताहों तक जारी रहा, जिसके बाद तीनों पक्षों ने वार्ता की मेज पर आने का निर्णय लिया।

आगे क्या होगा

शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में MOU पर हस्ताक्षर के बाद परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंध हटाने पर 60 दिनों की वार्ता का दूसरा चरण शुरू होगा। यह प्रक्रिया क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है, बशर्ते लेबनान मुद्दे पर इजरायल की भूमिका पर सहमति बने।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक बड़ा जोखिम छिपा है — लेबनान से इजरायली वापसी की शर्त को समझौते में शामिल करना इस पूरी प्रक्रिया को एक ऐसे चर पर निर्भर बना देता है जिस पर ईरान का नियंत्रण सीमित है। परमाणु कार्यक्रम पर 60 दिनों की समयसीमा महत्वाकांक्षी है, क्योंकि 2015 के JCPOA को अंतिम रूप देने में वर्षों लगे थे। यह समझौता तभी टिकाऊ होगा जब दोनों पक्ष सत्यापन तंत्र पर सहमत हों — अन्यथा यह एक और अस्थायी युद्धविराम बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की वर्तमान स्थिति क्या है?
दोनों देश युद्ध समाप्ति के लिए एक MOU को अंतिम रूप दे चुके हैं, जिस पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे। अंतिम समझौते पर विस्तृत वार्ता भी शुक्रवार से शुरू होगी।
ईरान-अमेरिका वार्ता दो चरणों में क्यों बाँटी गई है?
अमेरिका और इजरायल के हमलों से उत्पन्न जटिलताओं के कारण वार्ता को दो चरणों में विभाजित किया गया। पहले चरण में युद्ध समाप्ति, नाकाबंदी और जमी संपत्तियाँ, जबकि दूसरे चरण में 60 दिनों तक परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंध हटाने पर बातचीत होगी।
लेबनान का मुद्दा इस शांति समझौते से कैसे जुड़ा है?
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने स्पष्ट किया कि लेबनान से इजरायली सेना की वापसी इस शांति प्रक्रिया की अनिवार्य शर्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि लेबनान पर कोई भी इजरायली सैन्य कार्रवाई या कब्जा शांति समझौते का उल्लंघन माना जाएगा।
ईरान और अमेरिका के बीच यह संघर्ष कब और कैसे शुरू हुआ?
28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान समेत कई ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए थे। जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए, जिसके बाद कई सप्ताह तक संघर्ष जारी रहा।
परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर वार्ता कब तक पूरी होगी?
दूसरे चरण की वार्ता MOU हस्ताक्षर के बाद शुरू होगी और इसके लिए 60 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है। हालाँकि, इन जटिल मुद्दों पर सहमति की कोई गारंटी अभी नहीं दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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