अमेरिका-ईरान समझौते के बाद 19 जून को बुर्गेनस्टॉक में पहली अहम वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि 19 जून 2025 को स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक पर्वतीय रिसॉर्ट में आमने-सामने बैठेंगे। स्विस विदेश मंत्रालय ने 18 जून को पुष्टि की कि यह बैठक दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने की दिशा में शुरुआती औपचारिक बातचीत होगी। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब मध्य पूर्व में हफ्तों की तनातनी के बाद कूटनीतिक सरगर्मी तेज़ हुई है।
स्विस मध्यस्थता और बैठक का स्वरूप
स्विस विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच हुए एमओयू पर हस्ताक्षर का स्वागत करता है और इसे क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानता है। हालाँकि मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि फिलहाल बैठक के एजेंडे और अन्य विवरणों के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की जा सकती। स्विट्जरलैंड पारंपरिक रूप से अमेरिका और ईरान के बीच तीसरे पक्ष की भूमिका निभाता रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध दशकों से नहीं हैं।
ट्रंप का समझौते का जोरदार बचाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस समझौते को ऐतिहासिक कूटनीतिक उपलब्धि करार दिया। उन्होंने कहा कि इस समझौते के कारण मध्य पूर्व में बड़े युद्ध की आशंका टल गई, होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जा सका।
ट्रंप ने कहा, 'रविवार को हमने ईरान के साथ एक ऐसा समझौता किया जिसने हमारे सभी लक्ष्य पूरे कर दिए।' उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा संघर्ष को खत्म करना, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही मुख्य उद्देश्य था। उनके अनुसार यह सफलता सैन्य दबाव और कूटनीति, दोनों के मेल से संभव हो पाई।
ईरान के नागरिक परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी संकेत
ट्रंप ने संकेत दिया कि कुछ शर्तों के साथ अमेरिका ईरान के सिविलियन परमाणु कार्यक्रम को स्वीकार कर सकता है — यह अब तक के सबसे स्पष्ट संकेतों में से एक माना जा रहा है कि वॉशिंगटन आगे ईरान के साथ बातचीत को किस दिशा में ले जाना चाहता है। जब उनसे पूछा गया कि यदि ईरान नए समझौते का पालन करता है तो क्या उसे नागरिक परमाणु कार्यक्रम जारी रखने की अनुमति मिल सकती है, तो ट्रंप ने इसे 'जटिल मुद्दा' बताया।
उन्होंने कहा, 'मैं उनसे हमेशा कहता रहा हूँ कि दुनिया में आपके पास शायद तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार है, फिर आपको परमाणु ऊर्जा की जरूरत ही क्या है?' साथ ही उन्होंने यह भी माना कि बिजली उत्पादन के लिए कुछ हद तक परमाणु ऊर्जा की ज़रूरत पड़ सकती है। गौरतलब है कि ट्रंप लंबे समय से ईरान के इस दावे पर सवाल उठाते रहे हैं कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और ऊर्जा उत्पादन के उद्देश्यों के लिए है।
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और खाड़ी स्थिरता पर असर
ट्रंप ने आगाह किया कि अगर सैन्य कार्रवाई जारी रहती, तो खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ती और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार भी गंभीर रूप से प्रभावित होते। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20% तेल गुज़रता है, इसलिए इसका बंद होना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए बड़ा झटका होता। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही दबाव में हैं।
आगे की राह
19 जून की बुर्गेनस्टॉक बैठक एमओयू के क्रियान्वयन की रूपरेखा तय करने की पहली कोशिश होगी। विश्लेषकों का मानना है कि इस वार्ता का नतीजा यह तय करेगा कि क्या यह समझौता एक स्थायी कूटनीतिक ढाँचे में बदल सकता है या फिर यह महज एक अस्थायी युद्धविराम बनकर रह जाएगा। दोनों पक्षों के बीच परमाणु कार्यक्रम की सीमाओं पर सहमति बनाना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।