अमेरिका-ईरान शांति समझौते के 14 बिंदु: होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा, प्रतिबंध हटेंगे, 60 दिन में अंतिम वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका और ईरान के बीच दशकों के तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, दोनों देशों ने 14 सूत्रीय प्रारंभिक समझौते (एमओयू) के मसौदे पर सहमति जताई है। 15 जून को ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, इस मसौदे में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और $300 अरब के पुनर्निर्माण कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। औपचारिक हस्ताक्षर अभी बाकी हैं।
समझौते की पृष्ठभूमि और महत्व
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित थी। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से विश्व का लगभग 20% तेल व्यापार गुजरता है, और इसकी बंदी का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ा था। ईरान के उपविदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी ने कहा कि प्रस्तावित ढाँचे के तहत 60 दिनों के भीतर विस्तृत वार्ता आयोजित की जाएगी।
14 सूत्रीय मसौदे के मुख्य बिंदु
तस्नीम न्यूज एजेंसी द्वारा जारी मसौदे के अनुसार, पहले बिंदु में ईरान और अमेरिका — अपने-अपने सहयोगियों सहित — एमओयू पर हस्ताक्षर कर लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा करेंगे। दोनों पक्ष एक-दूसरे के विरुद्ध पुनः सशस्त्र संघर्ष न छेड़ने और धमकी या बल प्रयोग से परहेज करने का वचन देंगे।
तीसरे बिंदु में दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने पर सहमत होंगे। चौथे बिंदु के तहत 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर पहुँचने का प्रयास किया जाएगा, जिसे दोनों पक्षों की सहमति से बढ़ाया भी जा सकेगा।
नाकाबंदी हटाना और होर्मुज स्ट्रेट को खोलना
पाँचवें बिंदु के अनुसार, एमओयू पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा और अधिकतम 30 दिनों के भीतर शिपिंग को पूर्ण सामान्य क्षमता पर बहाल करेगा। अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर अमेरिका फारस की खाड़ी क्षेत्र से अपनी सैन्य टुकड़ियाँ भी वापस बुलाने का वचन देगा।
छठे बिंदु में ईरान फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच व्यावसायिक शिपिंग बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाएगा और 30 दिनों के भीतर शिपिंग मात्रा को युद्ध-पूर्व स्तर तक लाएगा। इसमें तकनीकी बाधाओं और समुद्री सुरंगों (माइंस) को हटाने की आवश्यकता को भी ध्यान में रखा गया है।
आर्थिक पुनर्निर्माण और प्रतिबंधों में राहत
सातवें बिंदु के तहत अमेरिका और उसके क्षेत्रीय साझेदार ईरान के लिए एक पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास कार्यक्रम शुरू करेंगे, जिसमें कम से कम $300 अरब की फंडिंग का प्रावधान होगा। इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन तंत्र अंतिम समझौते में तय किया जाएगा।
आठवें बिंदु में अमेरिका ईरान के विरुद्ध सभी प्रकार के प्रतिबंधों को आपसी सहमति से निर्धारित समयसीमा में समाप्त करने पर सहमत होगा। ग्यारहवें बिंदु के अनुसार, अमेरिकी वित्त विभाग ईरान को कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और संबंधित डेरिवेटिव्स के निर्यात की अनुमति देने के लिए प्रतिबंधों में छूट देगा। अंतिम समझौते की प्रगति के आधार पर, अमेरिका ईरान के फ्रीज किए गए फंड और संपत्तियाँ चरणबद्ध तरीके से जारी करेगा।
परमाणु कार्यक्रम और निगरानी तंत्र
नौवें बिंदु में ईरान पुनः यह सुनिश्चित करेगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। दोनों पक्ष ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम के भविष्य, समृद्ध परमाणु सामग्री के भंडार और परमाणु ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं पर वार्ता करेंगे। दसवें बिंदु के तहत, अंतिम समझौता होने तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति बनाए रखेगा, जबकि अमेरिका इस क्षेत्र में कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और न ही सैन्य बल में वृद्धि करेगा।
बारहवें बिंदु में दोनों पक्ष मिलकर अंतिम समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी और सत्यापन के लिए एक व्यावहारिक प्रणाली विकसित करेंगे। तेरहवें बिंदु के अनुसार, एमओयू पर हस्ताक्षर और प्रमुख प्रावधानों — नाकाबंदी हटाना, होर्मुज स्ट्रेट खोलना, तेल निर्यात की अनुमति और फ्रीज संपत्तियों की रिहाई — पर अमल शुरू होने के बाद ही शेष मुद्दों पर अंतिम वार्ता आगे बढ़ेगी। चौदहवें बिंदु में अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रस्ताव के माध्यम से मंजूरी दी जाएगी।
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर था और वैश्विक ऊर्जा बाजार अनिश्चितता से जूझ रहे थे। आने वाले दिनों में औपचारिक हस्ताक्षर और 60-दिवसीय वार्ता प्रक्रिया यह तय करेगी कि यह ऐतिहासिक मसौदा स्थायी शांति में बदल पाता है या नहीं।