ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट फिर बंद किया, अमेरिका-इजरायल पर एमओयू उल्लंघन का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
ईरान ने शनिवार, 20 जून को होर्मुज स्ट्रेट को सभी जहाजों की आवाजाही के लिए एक बार फिर बंद करने की घोषणा की। ईरान के शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान खातम अल-अंबिया सेंट्रल मुख्यालय ने इस कदम के पीछे अमेरिका और इजरायल द्वारा हाल ही में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के 'स्पष्ट उल्लंघन' को ज़िम्मेदार ठहराया है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब मात्र दो दिन पहले ही दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, खातम अल-अंबिया सेंट्रल मुख्यालय ने कहा कि अमेरिका ने युद्ध समाप्ति संबंधी एमओयू की पहली धारा का पालन नहीं किया और दक्षिणी लेबनान में इजरायल की सैन्य गतिविधियाँ जारी रहीं। इन्हीं दो आधारों पर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्णय लिया।
गौरतलब है कि यह एमओयू 18 जून को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षरित किया गया था। इस समझौते के तहत ईरान, अमेरिका और उनके सहयोगी देशों के बीच सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने तथा भविष्य में बल प्रयोग या सैन्य धमकी से बचने की प्रतिबद्धता जताई गई थी।
एक दिन पहले लागू हुए थे नए नियम
होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद करने से एक दिन पहले ईरान ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम लागू किए थे। इनके तहत सभी जहाजों को पूर्व पंजीकरण, अनुमति पत्र और बीमा संबंधी औपचारिकताएँ पूरी करना अनिवार्य किया गया था।
ईरान द्वारा स्थापित नई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने इन नियमों की घोषणा की थी। यह संस्था अमेरिका-ईरान समझौते के तहत रणनीतिक समुद्री मार्ग पर व्यावसायिक शिपिंग बहाल करने के उद्देश्य से गठित की गई थी।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि अमेरिकी बलों ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की समुद्री नाकेबंदी पूरी तरह समाप्त कर दी है और किसी भी जहाज की आवाजाही में बाधा नहीं डाली जा रही है। हालाँकि, अमेरिकी युद्धपोत क्षेत्र में मौजूद रहेंगे ताकि समझौते के सभी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। इस प्रकार दोनों पक्षों के बयान परस्पर विरोधाभासी हैं, जो तनाव को और गहरा करते हैं।
आम जनता और वैश्विक व्यापार पर असर
होर्मुज स्ट्रेट विश्व के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा वहन करता है और इसके बंद होने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर तत्काल दबाव पड़ने की आशंका है। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पहले से ही भू-राजनीतिक अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। भारत समेत एशियाई देश, जो खाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करते हैं, इस घटनाक्रम पर नज़दीकी नज़र रख रहे हैं।
क्या होगा आगे
यह स्पष्ट नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट को कितने समय के लिए बंद रखा जाएगा। दोनों पक्षों के बीच एमओयू की व्याख्या को लेकर विवाद गहरा होता दिख रहा है। आलोचकों का कहना है कि 18 जून का समझौता पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं था, जिससे इस तरह के विवादों की आशंका पहले से थी। अब सभी की नज़रें इस बात पर हैं कि क्या कूटनीतिक चैनलों के ज़रिए स्थिति को शीघ्र नियंत्रित किया जा सकता है।