अमेरिका-ईरान डील: $300 अरब फंडिंग, सभी प्रतिबंध हटेंगे, होर्मुज स्ट्रेट 60 दिनों में टोल-फ्री
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका और ईरान ने 18 जून 2026 को एक 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य महीनों से जारी सैन्य तनाव और संघर्ष को समाप्त करना, होर्मुज स्ट्रेट से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बहाल करना और ईरान के खिलाफ लगे सभी प्रतिबंध हटाना है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत ईरान को 300 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता और उसकी फ्रीज़ की गई संपत्तियाँ वापस मिल सकती हैं।
समझौते के मुख्य बिंदु
दोनों देशों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तत्काल और स्थायी रूप से बंद करने का संकल्प लिया है। समझौते के अनुसार, दोनों पक्ष एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचेंगे। अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट और नौसैनिक नाकेबंदी
समझौते पर हस्ताक्षर के तत्काल बाद अमेरिका ईरान के विरुद्ध नौसेना की नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसके लिए 30 दिनों का समय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में जहाजों की आवाजाही चरणबद्ध ढंग से बहाल होगी और यातायात का स्तर युद्ध-पूर्व के अनुपात में रखा जाएगा।
ईरान फारस की खाड़ी से ओमान सागर तक वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा। इसके साथ ही ईरान 30 दिनों के भीतर मार्ग में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (माइंस) को हटाएगा। होर्मुज स्ट्रेट में भविष्य की प्रशासनिक और समुद्री सेवाओं की रूपरेखा तय करने के लिए ईरान ओमान और फारस की खाड़ी के अन्य तटीय देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेगा।
आर्थिक राहत और प्रतिबंधों से मुक्ति
अमेरिका ईरान के विनिर्माण और आर्थिक विकास के लिए क्षेत्रीय साझेदारों के सहयोग से कम से कम 300 अरब डॉलर की एक योजना तैयार करेगा। इस योजना का क्रियान्वयन 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में तय होगा। सभी आवश्यक लाइसेंस, छूट और अनुमतियाँ अमेरिका प्रदान करेगा।
अमेरिका ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों सहित सभी प्रकार के प्रतिबंध समाप्त करने का वादा करता है। इसके अलावा, अमेरिकी वित्त विभाग ईरान के कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, बैंकिंग लेन-देन, बीमा और अन्य संबद्ध सेवाओं के लिए तत्काल छूट देगा। ईरान के फ्रीज़ किए गए फंड और संपत्तियाँ भी उपयोग के लिए पूरी तरह उपलब्ध कराई जाएंगी।
परमाणु कार्यक्रम और स्थिति यथावत
ईरान ने पुनः पुष्टि की है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। दोनों पक्ष ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम, संवर्धित परमाणु सामग्री के भंडार और परमाणु ऊर्जा ज़रूरतों पर अंतिम समझौते में विस्तृत चर्चा करेंगे। अंतिम डील में एक सहयोग ढाँचा (Cooperation Framework) भी शामिल किया जाएगा।
अंतिम समझौते तक, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति बनाए रखेगा और अमेरिका कोई नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा तथा ईरानी क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल नहीं भेजेगा।
निगरानी तंत्र और अंतिम मंजूरी
समझौते के सफल क्रियान्वयन और भविष्य के पालन की निगरानी के लिए एक एग्जीक्यूटिव सिस्टम बनाया जाएगा। अंतिम डील को UNSC के एक बाध्यकारी प्रस्ताव से मंजूरी मिलेगी। गौरतलब है कि यह समझौता ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल बाज़ार और शिपिंग उद्योग होर्मुज स्ट्रेट की बंदी के चलते भारी दबाव में थे। आने वाले 60 दिनों में अंतिम समझौते की रूपरेखा यह तय करेगी कि मध्य-पूर्व में शांति की यह नई शुरुआत टिकाऊ साबित होती है या नहीं।