सात्विक-चिराग का मंत्र: 'कोर्ट पर गुस्सा नहीं, बस अगले प्वाइंट पर फोकस'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय बैडमिंटन जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने एशियन गेम्स से पहले अपनी मानसिक रणनीति का खुलासा किया — कोर्ट पर चाहे कुछ भी हो जाए, गुस्से की जगह अगले प्वाइंट पर ध्यान लगाना। 17 सितंबर 2026 को एक वर्चुअल मीडिया बातचीत के दौरान सात्विक ने बताया कि यह सोच उनकी जोड़ी की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। दुनिया की नंबर 5 रैंकिंग वाली यह भारतीय जोड़ी एशियन गेम्स में पुरुष डबल्स स्वर्ण पदक का बचाव करने उतरेगी।
मानसिक बदलाव की कहानी
सात्विक ने स्वीकार किया कि पहले वे प्वाइंट गँवाने पर तुरंत प्रतिक्रिया देते थे। उन्होंने कहा, 'नहीं, हम दोनों को जल्दी गुस्सा नहीं आता। हम उस स्थिति के हिसाब से खुद को ढाल लेते हैं। पहले मैं रिएक्ट करता था। अगर कोई गलती करता था — चाहे मैं या चिराग — तो मैं तुरंत रिएक्ट कर देता था। मगर अब मैं ज्यादा रिएक्ट नहीं करता। मतलब, यह बस एक प्वाइंट है। हम अगले प्वाइंट पर ध्यान देते हैं।' यह बदलाव कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और आत्म-चिंतन का नतीजा है।
तालमेल और भावनाओं का रिश्ता
सात्विक ने विस्तार से समझाया कि डबल्स में पार्टनर के सामने निराशा जाहिर करना तालमेल को कैसे बिगाड़ सकता है। उन्होंने कहा, 'जब आप अपने पार्टनर के सामने भावनाएं जाहिर करते हैं, तो तालमेल ठीक नहीं बैठता। इसी वजह से बस यही सोचना चाहिए — अगले प्वाइंट के बारे में सोचो, अगले प्वाइंट के बारे में। इसी वजह से हम गुस्सा नहीं करते। हम अब तक कोर्ट पर कभी गुस्सा नहीं हुए।' गौरतलब है कि यह मानसिक अनुशासन उन्हें हार के बाद भी नहीं छोड़ता — हारे हुए मैच के बारे में सोचने के बजाय अगले मैच की तैयारी शुरू हो जाती है।
हांग्झू एशियन गेम्स की वह यादगार रात
2022 के हांग्झू एशियन गेम्स के फाइनल की रात का किस्सा सुनाते हुए सात्विक भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि फाइनल से पहले की रात वे और चिराग दोनों ही ठीक से सो नहीं पाए थे। उन्होंने कहा, 'लगभग 1:30 बजे के आसपास मैं पानी पीने के लिए उठा। तभी मुझे चिराग के कमरे से आवाज सुनाई दी। जैसे मैं खुद से कह रहा था कि कम से कम कुछ घंटे तो सो ही लो।' अगली सुबह जब सात्विक ने चिराग से पूछा तो पता चला कि दोनों की हालत एक जैसी थी। यह बेचैनी इस बात का प्रमाण थी कि वह क्षण उनके लिए कितना महत्वपूर्ण था।
ऐतिहासिक स्वर्ण और रोंगटे खड़े करने वाला पल
सात्विक ने उस जीत को अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने कहा, 'मुझे अभी भी वह राष्ट्रगान सुनाई देता है — चीन में एशियन गेम्स जीतना। मुझे लगता है कि किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि बैडमिंटन में डबल्स में एशियन गेम्स जीता जाएगा।' यह भारत के बैडमिंटन इतिहास में एक ऐसा मील का पत्थर था जिसने पूरे खेल की धारा बदल दी। यह ऐसे समय में आया था जब भारतीय डबल्स बैडमिंटन को वैश्विक मंच पर गंभीरता से नहीं लिया जाता था।
एशियन गेम्स की तैयारी और आत्मविश्वास
आगामी एशियन गेम्स के लिए सात्विक और चिराग पूरे आत्मविश्वास के साथ तैयार हैं। हाल ही में चीन मास्टर्स में पुरुष डबल्स खिताब जीतते हुए इस जोड़ी ने बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर पर अपना 10वाँ करियर खिताब हासिल किया। फाइनल में उन्होंने चीन की जोड़ी हे जी टिंग और रेन जियांग को 11-21, 21-13 और 21-17 से पराजित किया। अब वे इस मोमेंटम को एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक बचाव में भुनाना चाहते हैं।