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सुप्रीम कोर्ट का मणिपुर मुख्य सचिव को आदेश: राहत शिविरों में 25 अप्राकृतिक मौतों पर दें विस्तृत रिपोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट का मणिपुर मुख्य सचिव को आदेश: राहत शिविरों में 25 अप्राकृतिक मौतों पर दें विस्तृत रिपोर्ट

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने मणिपुर के राहत शिविरों में हुई 25 अप्राकृतिक मौतों को लेकर राज्य के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम और महज ₹20,000–₹30,000 मुआवजे पर अदालत की तीखी नज़र — यह संकेत है कि न्यायिक जवाबदेही का दबाव अब और बढ़ेगा।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 17 सितंबर 2026 को मणिपुर के मुख्य सचिव को राहत शिविरों में हुई 25 अप्राकृतिक मौतों पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया।
CJI सूर्य कांत , जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी.
मोहना की पीठ ने यह आदेश जारी किया।
आठ जिलों के शिविरों से जुड़ी रिपोर्ट में सामने आया कि केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम कराया गया।
अप्राकृतिक मौतों के पीड़ित परिवारों को केवल ₹20,000 से ₹30,000 मुआवजे पर अदालत ने स्पष्टीकरण माँगा।
मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को सभी मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज कराने और जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए।
राज्य सरकार को शिविरवासियों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया गया।

सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को हिंसाग्रस्त राज्य मणिपुर के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे राहत शिविरों में हुई 25 अप्राकृतिक मौतों के मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट में पोस्टमार्टम जांच का पूरा ब्यौरा, मौत के कारण और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी अनिवार्य रूप से शामिल करने का आदेश दिया गया है।

बेंच की संरचना और निर्देश का आधार

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने यह आदेश तब जारी किया जब उसके समक्ष राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की मौतों और उनकी दयनीय स्थिति से जुड़ी जानकारी रखी गई। पीठ ने आठ जिलों के राहत शिविरों से जुड़ी एक रिपोर्ट का अवलोकन किया और उन परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए जिनमें केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम किया गया था।

अदालत ने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण माँगा कि शेष मामलों में पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया और किस आधार पर मुआवजा राशि तय की गई।

मुआवजे की राशि पर उठे सवाल

सर्वोच्च न्यायालय ने अप्राकृतिक मौतों के मामलों में परिवारों को महज ₹20,000 से ₹30,000 का मुआवजा दिए जाने की खबरों पर गहरी चिंता जताई। CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि यह राशि किस कानूनी या प्रशासनिक आधार पर निर्धारित की गई है।

यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में जातीय संघर्ष के बाद विस्थापित हुए हजारों लोग महीनों से राहत शिविरों में रह रहे हैं और उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी न होने की लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं।

राहत शिविरों में सुविधाओं पर सख्त निर्देश

अदालत ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का स्पष्ट आदेश दिया कि राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जाएं। मणिपुर सरकार से यह भी पूछा गया है कि शिविरवासियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए क्या एहतियाती कदम उठाए गए हैं।

मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को निर्देश

सर्वोच्च न्यायालय ने मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को तत्काल इस पूरे मामले की जांच करने और अप्राकृतिक मौतों के सभी मामलों में एफआईआर दर्ज कराना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अथॉरिटी को यह भी कहा गया कि मौत के सही कारणों का पता लगाया जाए और जिन मामलों में एफआईआर पहले से दर्ज हो चुकी हैं, उनकी जांच शीघ्र पूरी की जाए।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सर्वोच्च न्यायालय ने मणिपुर की स्थिति पर केंद्र और राज्य सरकार से सीधे जवाब माँगे हों। अदालत मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की सक्रिय रूप से निगरानी करती रही है। अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार और मुख्य सचिव के जवाब यह तय करेंगे कि न्यायिक दबाव में मणिपुर प्रशासन की जवाबदेही किस दिशा में आगे बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि स्थायी संकट बन गए हैं। जब 25 में से केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम हुआ और मुआवजा ₹30,000 से अधिक नहीं दिया गया, तो यह केवल प्रक्रियागत चूक नहीं, बल्कि विस्थापित नागरिकों के मूल अधिकारों के प्रति राज्य की उदासीनता का संकेत है। अदालत का सक्रिय हस्तक्षेप आवश्यक है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या रिपोर्ट दाखिल होने के बाद जवाबदेही तय होगी या यह भी दस्तावेज़ी औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के मुख्य सचिव को क्या आदेश दिया है?
सर्वोच्च न्यायालय ने 17 सितंबर 2026 को मणिपुर के मुख्य सचिव को राहत शिविरों में हुई 25 अप्राकृतिक मौतों पर विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में पोस्टमार्टम जांच का ब्यौरा, मौत के कारण और रोकथाम के उपायों की जानकारी अनिवार्य है।
मणिपुर के राहत शिविरों में कितने मामलों में पोस्टमार्टम हुआ?
अदालत के समक्ष रखी गई रिपोर्ट के अनुसार 25 अप्राकृतिक मौतों में से केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराया गया। शेष मामलों में पोस्टमार्टम न होने पर अदालत ने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण माँगा है।
मृतकों के परिवारों को कितना मुआवजा मिला और अदालत ने इस पर क्या कहा?
खबरों के अनुसार अप्राकृतिक मौतों के मामलों में परिवारों को केवल ₹20,000 से ₹30,000 का मुआवजा दिया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि यह राशि किस आधार पर तय की गई।
मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को क्या निर्देश दिए गए हैं?
सर्वोच्च न्यायालय ने मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को तत्काल इस मामले की जांच करने, सभी अप्राकृतिक मौतों में एफआईआर दर्ज कराने और पहले से दर्ज मामलों की जांच शीघ्र पूरी करने का आदेश दिया है।
राहत शिविरों में रह रहे विस्थापितों के लिए अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने राज्य सरकार और अधिकारियों को निर्देश दिया कि राहत शिविरों में विस्थापित लोगों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही शिविरवासियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का भी ब्यौरा माँगा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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