3 सितंबर 2026
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मणिपुर में शांति बहाली के लिए सबकी भागीदारी ज़रूरी: गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह

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मणिपुर में शांति बहाली के लिए सबकी भागीदारी ज़रूरी: गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह

सारांश

मणिपुर विधानसभा में बुधवार को शांति बहाली की गूंज रही — गृह मंत्री ने हर वर्ग से जिम्मेदारी उठाने की अपील की, म्यांमार सीमा विवाद पर सफाई दी, और मुख्यमंत्री ने ₹3,861 करोड़ का पूरक बजट पेश किया। मई 2023 से जारी संकट के बीच यह सत्र राज्य की दिशा तय करने की कोशिश है।

मुख्य बातें

मणिपुर के गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह ने 2 सितंबर को विधानसभा में कहा कि मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के बाद शांति बहाली के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा।
धार्मिक और सामुदायिक नेताओं से अपील की गई कि वे समुदायों के बीच विश्वास की खाई पाटने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत-म्यांमार भूमि आदान-प्रदान समझौते की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है; अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़बंदी का काम काफी हद तक पूरा।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹3,861 करोड़ की पूरक अनुदान मांगें सदन में पेश कीं — इसमें 31 मांगें शामिल हैं।
कुल राशि का लगभग 90 प्रतिशत केंद्र प्रायोजित योजनाओं, नाबार्ड और बाहरी सहायता परियोजनाओं से संबंधित है।
मानसून सत्र में मुख्यमंत्री ने सदन के सामने आठ विधेयक पेश किए।

मणिपुर के गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह ने बुधवार, 2 सितंबर को इंफाल में विधानसभा सत्र के दौरान स्पष्ट किया कि मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के बाद राज्य में स्थायी शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने की जिम्मेदारी समाज के हर वर्ग की है। उन्होंने धार्मिक और सामुदायिक नेताओं से अपील की कि वे समुदायों के बीच विश्वास की खाई पाटने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

विधानसभा में उठे ध्यान आकर्षण प्रस्ताव

कांग्रेस विधायक दल के नेता केइशम मेघचंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा, 'राज्य में शांति बहाल करने के लिए हम सभी को ज़िम्मेदारी उठानी चाहिए और मानवता की भावना अपनानी चाहिए।' उन्होंने जोर दिया कि स्थायी समाधान के लिए सरकार अकेले पर्याप्त नहीं है — समाज के सभी तबकों को आगे आना होगा।

कांग्रेस विधायक कंगुजम रंजीत सिंह के एक अन्य प्रस्ताव के उत्तर में गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता और एकता की रक्षा के प्रति राज्य सरकार और जनता का संकल्प अटल है।

सीमा सुरक्षा और म्यांमार से जुड़े दावों पर स्पष्टीकरण

गृह मंत्री ने सदन को बताया कि भारत और म्यांमार के बीच भूमि के आदान-प्रदान से संबंधित किसी भी समझौते की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है, और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा मजबूत करने तथा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के प्रयास निरंतर जारी हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर की सीमावर्ती स्थिति को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। गौरतलब है कि मई 2023 से अब तक राज्य में जातीय संघर्ष के कारण सैकड़ों लोग विस्थापित हो चुके हैं और सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

पूरक अनुदान: ₹3,861 करोड़ की मांग सदन में पेश

इसी सत्र में मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूरक अनुदान की मांगों का पहला बैच विधानसभा में प्रस्तुत किया। इसमें ₹3,861 करोड़ की कुल राशि शामिल है, जिसमें 31 मांगें और एक विनियोग है।

इस कुल राशि में से ₹12 करोड़ राज्य के समेकित कोष से लिए जाएंगे, जबकि शेष ₹3,849 करोड़ के लिए सदन में मतदान होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि कुल मांगी गई राशि का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS), नाबार्ड-समर्थित परियोजनाओं और बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं (EAP) से संबंधित है।

मानसून सत्र में आठ विधेयक पेश

मुख्यमंत्री ने चल रहे मानसून सत्र के दौरान विचार-विमर्श के लिए सदन में आठ विधेयक भी पेश किए। बुधवार की विधानसभा कार्यवाही में शांति बहाली, क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा और राज्य की विभिन्न चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर व्यापक चर्चा हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि विधायी कार्यवाही और संवाद की यह प्रक्रिया सकारात्मक संकेत है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर विश्वास बहाली के बिना कोई भी नीतिगत कदम पूरी तरह कारगर नहीं हो सकता। आने वाले हफ्तों में सरकार की कार्रवाई यह तय करेगी कि ये वादे कितने ठोस साबित होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस मूल प्रश्न को टालता है जो विपक्ष बार-बार उठा रहा है — मई 2023 से अब तक राज्य सरकार ने ठोस तौर पर क्या किया? सीमा बाड़बंदी की प्रगति और म्यांमार समझौते पर सफाई स्वागत योग्य है, लेकिन विस्थापित परिवारों की वापसी और पुनर्वास की कोई समयसीमा सदन में नहीं रखी गई। ₹3,861 करोड़ का पूरक बजट विकास की प्रतिबद्धता दर्शाता है, पर जब तक ज़मीनी स्तर पर अंतर-सामुदायिक विश्वास नहीं बनता, बजट के आंकड़े अधूरी तस्वीर ही पेश करते हैं।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में जातीय हिंसा कब से जारी है और अब तक क्या हुआ?
मणिपुर में जातीय हिंसा मई 2023 से जारी है, जिसने राज्य के सामाजिक ताने-बाने को बुरी तरह प्रभावित किया है। सैकड़ों परिवार विस्थापित हुए हैं और सामान्य जनजीवन अभी भी पूरी तरह बहाल नहीं हो पाया है।
गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह ने विधानसभा में क्या कहा?
गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह ने 2 सितंबर को विधानसभा में कहा कि राज्य में स्थायी शांति बहाल करने के लिए समाज के सभी वर्गों को जिम्मेदारी उठानी होगी और मानवता की भावना अपनानी होगी। उन्होंने धार्मिक व सामुदायिक नेताओं से भी समुदायों के बीच विश्वास बहाल करने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
भारत-म्यांमार भूमि आदान-प्रदान समझौते पर सरकार का क्या रुख है?
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत और म्यांमार के बीच भूमि के आदान-प्रदान से जुड़े किसी भी समझौते की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़बंदी का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है।
मणिपुर विधानसभा में पेश पूरक बजट में कितनी राशि है?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹3,861 करोड़ की पूरक अनुदान मांगें सदन में पेश कीं, जिसमें 31 मांगें और एक विनियोग शामिल है। इसमें से ₹12 करोड़ राज्य के समेकित कोष से और ₹3,849 करोड़ के लिए सदन में मतदान होगा।
मणिपुर मानसून सत्र में कितने विधेयक पेश किए गए?
मुख्यमंत्री ने चल रहे मानसून सत्र के दौरान सदन में आठ विधेयक पेश किए। इन विधेयकों पर सत्र के दौरान विचार-विमर्श किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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