मणिपुर में शांति बहाली के लिए सबकी भागीदारी ज़रूरी: गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह ने बुधवार, 2 सितंबर को इंफाल में विधानसभा सत्र के दौरान स्पष्ट किया कि मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के बाद राज्य में स्थायी शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने की जिम्मेदारी समाज के हर वर्ग की है। उन्होंने धार्मिक और सामुदायिक नेताओं से अपील की कि वे समुदायों के बीच विश्वास की खाई पाटने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
विधानसभा में उठे ध्यान आकर्षण प्रस्ताव
कांग्रेस विधायक दल के नेता केइशम मेघचंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा, 'राज्य में शांति बहाल करने के लिए हम सभी को ज़िम्मेदारी उठानी चाहिए और मानवता की भावना अपनानी चाहिए।' उन्होंने जोर दिया कि स्थायी समाधान के लिए सरकार अकेले पर्याप्त नहीं है — समाज के सभी तबकों को आगे आना होगा।
कांग्रेस विधायक कंगुजम रंजीत सिंह के एक अन्य प्रस्ताव के उत्तर में गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता और एकता की रक्षा के प्रति राज्य सरकार और जनता का संकल्प अटल है।
सीमा सुरक्षा और म्यांमार से जुड़े दावों पर स्पष्टीकरण
गृह मंत्री ने सदन को बताया कि भारत और म्यांमार के बीच भूमि के आदान-प्रदान से संबंधित किसी भी समझौते की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है, और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा मजबूत करने तथा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के प्रयास निरंतर जारी हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर की सीमावर्ती स्थिति को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। गौरतलब है कि मई 2023 से अब तक राज्य में जातीय संघर्ष के कारण सैकड़ों लोग विस्थापित हो चुके हैं और सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
पूरक अनुदान: ₹3,861 करोड़ की मांग सदन में पेश
इसी सत्र में मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूरक अनुदान की मांगों का पहला बैच विधानसभा में प्रस्तुत किया। इसमें ₹3,861 करोड़ की कुल राशि शामिल है, जिसमें 31 मांगें और एक विनियोग है।
इस कुल राशि में से ₹12 करोड़ राज्य के समेकित कोष से लिए जाएंगे, जबकि शेष ₹3,849 करोड़ के लिए सदन में मतदान होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि कुल मांगी गई राशि का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS), नाबार्ड-समर्थित परियोजनाओं और बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं (EAP) से संबंधित है।
मानसून सत्र में आठ विधेयक पेश
मुख्यमंत्री ने चल रहे मानसून सत्र के दौरान विचार-विमर्श के लिए सदन में आठ विधेयक भी पेश किए। बुधवार की विधानसभा कार्यवाही में शांति बहाली, क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा और राज्य की विभिन्न चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर व्यापक चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि विधायी कार्यवाही और संवाद की यह प्रक्रिया सकारात्मक संकेत है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर विश्वास बहाली के बिना कोई भी नीतिगत कदम पूरी तरह कारगर नहीं हो सकता। आने वाले हफ्तों में सरकार की कार्रवाई यह तय करेगी कि ये वादे कितने ठोस साबित होते हैं।