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मणिपुर में शांति बहाली के लिए गृह मंत्री गोविंदस सिंह की सभी वर्गों से एकजुट अपील

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मणिपुर में शांति बहाली के लिए गृह मंत्री गोविंदस सिंह की सभी वर्गों से एकजुट अपील

सारांश

मणिपुर के गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह ने विधानसभा में साफ कहा — मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष के बाद शांति की बहाली केवल सरकार का काम नहीं, यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। साथ ही मुख्यमंत्री ने ₹3,861 करोड़ के पूरक अनुदान और आठ नए विधेयक सदन में पेश किए।

मुख्य बातें

मणिपुर के गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह ने 2 सितंबर को विधानसभा में कहा कि मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के बाद शांति बहाली सभी वर्गों की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने धार्मिक और सामुदायिक नेताओं से समुदायों के बीच विश्वास की खाई पाटने में रचनात्मक भूमिका निभाने की अपील की।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत-म्यांमार के बीच ज़मीन आदान-प्रदान के किसी समझौते की कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं है और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़बंदी काफी हद तक पूरी हो चुकी है।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹3,861 करोड़ के पूरक अनुदान की मांग सदन में पेश की, जिसमें से 90% राशि केंद्र प्रायोजित एवं बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं से संबंधित है।
मानसून सत्र के दौरान सदन में आठ नए विधेयक भी पेश किए गए।

मणिपुर के गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह ने बुधवार, 2 सितंबर को इंफाल में विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान स्पष्ट किया कि मई 2023 से जारी जातीय हिंसा से प्रभावित राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की है। उन्होंने सभी से आगे आकर सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

विधानसभा में उठा ध्यान आकर्षण प्रस्ताव

कांग्रेस विधायक दल के नेता केइशम मेघचंद्र सिंह द्वारा सदन में पेश 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' के जवाब में गृह मंत्री ने कहा, 'राज्य में शांति बहाल करने के लिए हम सभी को ज़िम्मेदारी उठानी चाहिए और मानवता की भावना अपनानी चाहिए।' उन्होंने पूरे मणिपुर के धार्मिक और सामुदायिक नेताओं से भी अपील की कि वे विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास की खाई पाटने और समाधान खोजने में रचनात्मक भूमिका निभाएं।

एक अन्य 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' — जो कांग्रेस विधायक कंगुजम रंजीत सिंह ने उठाया था — के जवाब में गोविंदस सिंह ने दोहराया कि मणिपुर की जनता और राज्य सरकार राज्य की अखंडता और क्षेत्रीय एकता की रक्षा के प्रति दृढ़संकल्पित है।

सीमा सुरक्षा और म्यांमार से जुड़े दावों पर स्पष्टीकरण

गृह मंत्री ने सदन को बताया कि भारत और म्यांमार के बीच ज़मीन के आदान-प्रदान के किसी समझौते की कोई आधिकारिक रिपोर्ट मौजूद नहीं है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने का कार्य काफी हद तक पूरा हो चुका है, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बल अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के प्रयास जारी रखे हुए हैं।

₹3,861 करोड़ के पूरक अनुदान की मांग पेश

इसी सत्र में मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूरक अनुदान की मांगों का पहला बैच विधानसभा में प्रस्तुत किया। इसमें 31 मांगें और एक विनियोग शामिल हैं, जिनकी कुल राशि ₹3,861 करोड़ है।

इस राशि में से ₹12 करोड़ राज्य के समेकित कोष से लिए जाएंगे, जबकि शेष ₹3,849 करोड़ के लिए सदन में मतदान कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि कुल मांगी गई राशि का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS), नाबार्ड-समर्थित परियोजनाओं और बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं (EAP) से जुड़ा है।

आठ नए विधेयक सदन में पेश

मानसून सत्र के दौरान मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने विचार-विमर्श के लिए सदन में आठ विधेयक भी पेश किए। बुधवार की कार्यवाही में शांति बहाली, क्षेत्रीय अखंडता और राज्य की विभिन्न चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार के प्रयासों पर व्यापक चर्चा हुई।

यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण और विश्वास-निर्माण की प्रक्रिया अभी भी जारी है। राज्य सरकार के अनुसार, केंद्रीय और बाह्य वित्त पोषण का अधिकतम उपयोग इस प्रक्रिया को गति देने में सहायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक ऐसे राज्य में आया है जहाँ सरकार की तटस्थता पर खुद सवाल उठते रहे हैं। मई 2023 से अब तक दो वर्षों से अधिक समय बीत चुका है और अभी तक कोई ठोस संवाद तंत्र या सुलह प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। ₹3,861 करोड़ के पूरक अनुदान का 90% हिस्सा केंद्रीय और बाह्य स्रोतों से आना यह भी दर्शाता है कि राज्य की अपनी वित्तीय क्षमता संकट से उबरने के लिए पर्याप्त नहीं है। जब तक समुदायों के बीच विश्वास-निर्माण के लिए कोई संरचित और पारदर्शी तंत्र नहीं बनता, तब तक विधानसभा के भाषण महज आश्वासन बनकर रह जाने का जोखिम है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर के गृह मंत्री ने शांति बहाली पर क्या कहा?
गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह ने 2 सितंबर को विधानसभा में कहा कि मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के बाद राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करना केवल सरकार का काम नहीं है — समाज के सभी वर्गों को मानवता की भावना के साथ आगे आना होगा। उन्होंने धार्मिक और सामुदायिक नेताओं से भी रचनात्मक भूमिका निभाने की अपील की।
मणिपुर में जातीय हिंसा कब से जारी है?
मणिपुर में जातीय हिंसा मई 2023 से जारी है, जिसमें मुख्यतः मेइती और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच संघर्ष हुआ। दो वर्षों से अधिक समय बाद भी राज्य में सामान्य स्थिति पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई है।
भारत-म्यांमार के बीच ज़मीन आदान-प्रदान के दावों पर सरकार का क्या कहना है?
गृह मंत्री गोविंदस सिंह ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि भारत और म्यांमार के बीच ज़मीन के आदान-प्रदान के किसी समझौते की कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़बंदी का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है।
मणिपुर के लिए 2026-27 का पूरक अनुदान कितना है और इसमें क्या शामिल है?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹3,861 करोड़ की पूरक अनुदान मांगें पेश कीं, जिनमें 31 मांगें और एक विनियोग शामिल हैं। कुल राशि का लगभग 90% हिस्सा केंद्र प्रायोजित योजनाओं, नाबार्ड-समर्थित और बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं से संबंधित है।
मणिपुर विधानसभा के मानसून सत्र में और क्या हुआ?
बुधवार की कार्यवाही में मुख्यमंत्री ने आठ नए विधेयक सदन में पेश किए और शांति बहाली, क्षेत्रीय अखंडता तथा राज्य की विभिन्न चिंताओं पर व्यापक चर्चा हुई। कांग्रेस विधायकों ने ध्यान आकर्षण प्रस्तावों के माध्यम से सरकार से जवाब माँगे।
राष्ट्र प्रेस
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