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छत्तीसगढ़ डीएमएफ घोटाला: ईडी ने सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया, ₹31 करोड़ की अवैध कमीशन का आरोप

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छत्तीसगढ़ डीएमएफ घोटाला: ईडी ने सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया, ₹31 करोड़ की अवैध कमीशन का आरोप

सारांश

छत्तीसगढ़ के डीएमएफ घोटाले में ईडी ने मुख्य मध्यस्थ सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया है। ₹9,188 करोड़ की खनिज निधि में से ₹31 करोड़ की अवैध कमीशन का आरोप है। बीज निगम के ज़रिये धन के दुरुपयोग और सरकारी कर्मचारियों तक रकम पहुँचाने का सिंडिकेट उजागर हुआ है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी ) ने सतपाल सिंह छाबड़ा को 2 सितंबर को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया।
रायपुर पीएमएलए विशेष न्यायालय ने ईडी को पाँच दिन की हिरासत प्रदान की।
वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच छत्तीसगढ़ के जिलों को डीएमएफ के तहत लगभग ₹9,188.20 करोड़ प्राप्त हुए, जिनमें से एक हिस्से के दुरुपयोग का आरोप है।
छाबड़ा पर कथित तौर पर ₹31 करोड़ की अवैध कमीशन अर्जित करने का आरोप है, जो उनके परिवार और एचयूएफ खातों में पाई गई।
छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के ज़रिये निधियाँ प्रवाहित कर 25% से 50% तक कमीशन वसूले जाने का आरोप है।
ईडी ने सितंबर 2025 में पीएमएलए धारा 17(1) के तहत तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए थे।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) घोटाले में सतपाल सिंह छाबड़ा को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। छाबड़ा पर इस घोटाले में मध्यस्थ और वित्तीय समन्वयक की केंद्रीय भूमिका निभाने का आरोप है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर ₹31 करोड़ की अवैध कमीशन अर्जित की।

गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत

छाबड़ा को मंगलवार, 2 सितंबर को गिरफ्तार कर रायपुर स्थित पीएमएलए विशेष न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने ईडी को पाँच दिन की हिरासत प्रदान की, जिससे जाँच एजेंसी को पूछताछ का अवसर मिलेगा। यह जाँच रायपुर स्थित एसीबी/ईओडब्ल्यू और छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा डीएमएफ निधि के दुरुपयोग के संबंध में दर्ज की गई कई एफआईआर पर आधारित है।

डीएमएफ घोटाले की पृष्ठभूमि और वित्तीय दायरा

जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट खनन गतिविधियों से प्रभावित समुदायों के कल्याण के लिए प्रत्येक जिले में स्थापित किए गए हैं। ईडी के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच छत्तीसगढ़ के जिलों को डीएमएफ के तहत लगभग ₹9,188.20 करोड़ प्राप्त हुए। इन निधियों का एक हिस्सा कथित तौर पर लोक सेवकों, संपर्ककर्ताओं और विक्रेताओं के एक सुनियोजित गिरोह द्वारा हड़प लिया गया।

ईडी के बयान के अनुसार, आपूर्ति-उन्मुख कार्यों को प्राथमिकता देकर मनमानी कीमतें तय की गईं और कमीशन वसूला गया। इन निधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के माध्यम से प्रवाहित किया गया, जहाँ एजेंटों और मध्यस्थों ने दर अनुबंध धारक संस्थाओं को जारी खरीद आदेशों के आधार मूल्य का 25 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूला।

छाबड़ा की कथित भूमिका

ईडी के अनुसार, छाबड़ा ने इस सिंडिकेट में एक धुरी की तरह काम किया। उन्होंने लाभकारी आपूर्ति-आधारित डीएमएफटी कार्यों की पहचान की, उन्हें चयनित विक्रेताओं के बीच आवंटित किया, कार्य आदेश जारी करवाने में सुविधा प्रदान की और भुगतान सुनिश्चित किया। इसके बाद सिंडिकेट के भीतर वितरण के लिए कमीशन एकत्र किया गया, जो सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों में बाँटा जाता था।

ईडी के बयान के अनुसार, वसूले गए ये कमीशन कार्य आदेश प्राप्त करने और भुगतान जारी करवाने के बदले में दिए जाते थे — यानी भ्रष्टाचार की एक पूरी शृंखला कथित तौर पर सक्रिय थी।

तलाशी और साक्ष्य

पीएमएलए की धारा 17(1) के तहत सितंबर 2025 में की गई तलाशी में घोटाले से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए थे। पीएमएलए की धारा 17 और 50 के तहत बैंकिंग लेनदेन के विश्लेषण से पता चला कि छाबड़ा ने लगभग ₹31 करोड़ की अवैध कमीशन प्राप्त की। अपराध की आय के रूप में वर्गीकृत यह धनराशि उनके परिवार के सदस्यों, हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) और उनके नियंत्रण वाली संस्थाओं के खातों में पाई गई।

आगे की जाँच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि डीएमएफ घोटाले की जाँच अभी जारी है और आगे और गिरफ्तारियाँ या कार्रवाइयाँ संभव हैं। गौरतलब है कि यह छत्तीसगढ़ में खनिज निधियों से जुड़ा एक बड़ा मामला है, जो राज्य के आदिवासी और खनन-प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए आवंटित धन से सीधे जुड़ा है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में खनन क्षेत्र से जुड़ी पारदर्शिता पर पहले से सवाल उठते रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

188 करोड़ की निधि में से ₹31 करोड़ की कमीशन का एक ही मध्यस्थ के खातों में पहुँचना यह दर्शाता है कि यह सिंडिकेट कितना संगठित और गहरा था। असली सवाल यह है कि क्या ईडी की जाँच केवल निचले स्तर के बिचौलियों तक सीमित रहेगी या उन लोक सेवकों और राजनीतिक संरक्षकों तक भी पहुँचेगी जिनके बिना यह तंत्र संभव नहीं था।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ डीएमएफ घोटाला क्या है?
जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) ट्रस्ट खनन गतिविधियों से प्रभावित समुदायों के विकास के लिए स्थापित किए गए हैं। ईडी के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच प्राप्त लगभग ₹9,188.20 करोड़ की निधि का एक हिस्सा लोक सेवकों, मध्यस्थों और विक्रेताओं के एक सिंडिकेट द्वारा कथित तौर पर हड़पा गया।
सतपाल सिंह छाबड़ा को क्यों गिरफ्तार किया गया?
ईडी के अनुसार, छाबड़ा ने इस घोटाले में मध्यस्थ और वित्तीय समन्वयक की केंद्रीय भूमिका निभाई। उन पर आरोप है कि उन्होंने डीएमएफटी कार्यों की पहचान कर चयनित विक्रेताओं को आवंटित किया और कथित तौर पर ₹31 करोड़ की अवैध कमीशन अर्जित की।
छाबड़ा को कितने दिन की हिरासत मिली है?
रायपुर स्थित पीएमएलए विशेष न्यायालय ने ईडी को पाँच दिन की हिरासत प्रदान की है। इस अवधि में ईडी छाबड़ा से पूछताछ कर घोटाले के अन्य पहलुओं की जाँच करेगी।
बीज निगम का इस घोटाले में क्या रोल बताया गया है?
ईडी के अनुसार, डीएमएफ निधि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के माध्यम से प्रवाहित किया गया। यहाँ एजेंटों ने दर अनुबंध धारक संस्थाओं को जारी खरीद आदेशों के आधार मूल्य का 25% से 50% तक कमीशन कथित तौर पर वसूला।
ईडी की जाँच आगे कहाँ तक जा सकती है?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि डीएमएफ घोटाले की जाँच अभी जारी है। सितंबर 2025 में की गई तलाशी में बरामद दस्तावेजों और बैंकिंग लेनदेन के विश्लेषण के आधार पर आगे और कार्रवाइयाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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