छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी ने 13 ठिकानों पर छापे मारे, ₹5.39 करोड़ का सोना-कैश जब्त

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी ने 13 ठिकानों पर छापे मारे, ₹5.39 करोड़ का सोना-कैश जब्त

सारांश

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी की जांच का दायरा और गहरा हो गया है — 13 ठिकानों पर एक साथ छापे, ₹5.39 करोड़ की जब्ती और ₹380 करोड़ की कुर्क संपत्तियाँ। ₹2,883 करोड़ के अनुमानित घोटाले में अब राजनेता, नौकरशाह और कारोबारी सभी जांच के दायरे में हैं।

Key Takeaways

ईडी ने 30 अप्रैल 2025 को छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग/भिलाई और बिलासपुर में 13 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। तलाशी में ₹53 लाख नकद और 3.234 किलोग्राम सोने के आभूषण ( ₹4.86 करोड़ ) सहित कुल ₹5.39 करोड़ जब्त किए गए। घोटाले में 2019-2022 के बीच शराब खरीद-लाइसेंसिंग में अवैध कमीशन वसूली की साजिश; कुल अनुमानित आय ₹2,883 करोड़ । अब तक 9 लोग गिरफ्तार, जिनमें रिटायर्ड आईएएस, तत्कालीन आबकारी मंत्री और तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र शामिल। पीएमएलए के तहत ₹380 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क; 81 आरोपियों के खिलाफ 6 अभियोजन शिकायतें दायर।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), रायपुर जोनल कार्यालय ने 30 अप्रैल 2025 को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच के तहत मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम 2002 (पीएमएलए) की धारा 17 के अंतर्गत एक साथ 13 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। रायपुर, दुर्ग/भिलाई और बिलासपुर जिलों में चले इस अभियान में ₹53 लाख नकद और लगभग 3.234 किलोग्राम सोने के आभूषण (अनुमानित मूल्य ₹4.86 करोड़) बरामद किए गए, जिससे कुल जब्ती ₹5.39 करोड़ पहुँच गई।

तलाशी अभियान का विवरण

ईडी ने 3 मई 2025 को जारी प्रेस रिलीज में बताया कि जिन ठिकानों पर छापे मारे गए, वे शराब व्यापारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कारोबारियों और कॉर्पोरेट संस्थाओं से जुड़े थे। एजेंसी के अनुसार, इन पर इस घोटाले से उत्पन्न 'अपराध की आय' को हासिल करने, संभालने, छिपाने या उसमें हेरफेर करने का संदेह था।

नकदी और सोने के अलावा, आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल उपकरण/डेटा भी बरामद किए गए हैं, जिनका फिलहाल विश्लेषण किया जा रहा है।

घोटाले की पृष्ठभूमि और अनुमानित नुकसान

ईडी यह जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू)/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), रायपुर द्वारा दर्ज मूल एफआईआर के आधार पर कर रही है। जांच में एक सुनियोजित आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ है, जिसमें राजनीतिक अधिकारी, वरिष्ठ नौकरशाह, शराब डिस्टिलर, एफएल-10ए लाइसेंसधारी और उनके सहयोगी शामिल बताए गए हैं।

यह साजिश 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में शराब की खरीद, लाइसेंसिंग और बिक्री में अवैध कमीशन वसूलने के लिए रची गई थी। ईओडब्ल्यू/एसीबी ने अपनी चार्जशीट में इस घोटाले से उत्पन्न कुल अपराध की आय का अनुमान लगभग ₹2,883 करोड़ लगाया है।

अब तक की गिरफ्तारियाँ और कुर्की

ईडी ने अब तक पीएमएलए की धारा 19 के तहत 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी, सीएसएमसीएल के तत्कालीन एमडी, तत्कालीन आबकारी आयुक्त, तत्कालीन आबकारी मंत्री, तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र और तत्कालीन मुख्यमंत्री के उप सचिव शामिल हैं।

इसके अलावा, पीएमएलए की धारा 5 के तहत 6 प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी किए जा चुके हैं, जिनके तहत मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी लगभग ₹380 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ कुर्क की गई हैं। इन संपत्तियों में रिहायशी व कमर्शियल रियल एस्टेट, बैंक बैलेंस, वाहन, गहने और शेयर शामिल हैं। पीएमएलए एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी, नई दिल्ली ने कई मामलों में कुर्की की पुष्टि की है।

अदालती कार्यवाही की स्थिति

ईडी ने रायपुर की पीएमएलए विशेष अदालत में 6 अभियोजन शिकायतें दायर की हैं, जिनमें 81 आरोपियों और संस्थाओं के नाम शामिल हैं। इन मामलों पर विशेष अदालत, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में सक्रिय रूप से सुनवाई जारी है।

ईडी के अनुसार, मौजूदा तलाशी अभियान से और अधिक साक्ष्य मिले हैं तथा कानून के अनुसार आगे की कुर्की, अभियोजन और पीएमएलए के तहत अन्य कार्यवाहियाँ की जाएंगी। जांच अभी जारी है।

Point of View

883 करोड़ के उस जाल की कड़ी है जो राजनीतिक सत्ता, नौकरशाही और कारोबारी हितों को एक साथ जोड़ता है। तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र और वरिष्ठ नौकरशाहों की गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि जांच का दायरा सिर्फ बिचौलियों तक सीमित नहीं है। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि ₹380 करोड़ की कुर्की अनुमानित घोटाले के महज़ 13% के बराबर है — जो यह सवाल उठाता है कि बाकी धनराशि कहाँ गई। विशेष अदालत से सर्वोच्च न्यायालय तक चल रही सुनवाई यह तय करेगी कि क्या यह जांच वास्तविक जवाबदेही तक पहुँचती है या केवल संपत्ति जब्ती तक सिमट जाती है।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला क्या है?
यह 2019-2022 के बीच छत्तीसगढ़ में शराब खरीद, लाइसेंसिंग और बिक्री में अवैध कमीशन वसूली की एक सुनियोजित साजिश है, जिसमें राजनेता, नौकरशाह, शराब डिस्टिलर और एफएल-10ए लाइसेंसधारी शामिल बताए गए हैं। ईओडब्ल्यू/एसीबी ने इस घोटाले से उत्पन्न कुल अपराध की आय लगभग ₹2,883 करोड़ आँकी है।
ईडी ने 30 अप्रैल को कहाँ-कहाँ छापे मारे?
ईडी ने छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग/भिलाई और बिलासपुर जिलों में कुल 13 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। ये ठिकाने शराब व्यापारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कारोबारियों और कॉर्पोरेट संस्थाओं से जुड़े थे।
इस घोटाले में अब तक कितनी गिरफ्तारियाँ हुई हैं?
ईडी ने पीएमएलए की धारा 19 के तहत अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी, तत्कालीन आबकारी मंत्री, तत्कालीन आबकारी आयुक्त, सीएसएमसीएल के तत्कालीन एमडी, तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र और उनके उप सचिव शामिल हैं।
ईडी ने इस मामले में कितनी संपत्ति कुर्क की है?
ईडी ने अब तक 6 प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर के ज़रिए लगभग ₹380 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ कुर्क की हैं। इनमें रियल एस्टेट, बैंक बैलेंस, वाहन, गहने और शेयर शामिल हैं।
इस मामले में अदालती कार्यवाही कहाँ तक पहुँची है?
ईडी ने रायपुर की पीएमएलए विशेष अदालत में 81 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ 6 अभियोजन शिकायतें दायर की हैं। इन मामलों पर विशेष अदालत, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में सक्रिय सुनवाई चल रही है।
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