भूमि अधिग्रहण घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: छत्तीसगढ़ के 8 ठिकानों पर छापे, ₹66.9 लाख नकद व 37 किलो चांदी जब्त
सारांश
Key Takeaways
- ईडी रायपुर जोनल कार्यालय ने 29 अप्रैल 2025 को छत्तीसगढ़ के अभनपुर, रायपुर, धमतरी और कुरुद में 8 परिसरों पर छापे मारे।
- तलाशी में ₹66.9 लाख नकद, 37.13 किलोग्राम चांदी की ईंटें, डिजिटल उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज़ जब्त।
- मामला भारतमाला परियोजना के रायपुर–विशाखापट्टनम हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में कथित अवैध मुआवज़े से जुड़ा है।
- तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) निर्भय साहू और अन्य के विरुद्ध PMLA, 2002 के तहत जाँच।
- खसरा रिकॉर्ड में हेरफेर कर मुआवज़ा बढ़ाने और NHAI अधिसूचना के बाद भूमि स्वामित्व हस्तांतरण के आरोप।
- ईडी ने कहा — जाँच जारी है, अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल कार्यालय ने 29 अप्रैल 2025 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्टनम हाईवे भूमि अधिग्रहण घोटाले में छत्तीसगढ़ के अभनपुर, रायपुर, धमतरी और कुरुद स्थित 8 परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस छापेमारी में ₹66.9 लाख नकद, 37.13 किलोग्राम चांदी की ईंटें तथा अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई।
मुख्य बरामदगी और जब्ती
तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने ₹66.9 लाख रुपये नकद, लगभग 37.13 किलोग्राम वजनी चांदी की ईंटें और अन्य चांदी के सामान, डिजिटल उपकरण तथा कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ जब्त किए। एजेंसी के अनुसार, ये सभी बरामदगियाँ मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं और अवैध लेनदेन की ओर स्पष्ट संकेत देती हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने इस मामले में जाँच की शुरुआत धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत आर्थिक अपराध शाखा, रायपुर तथा एसीबी, रायपुर द्वारा दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर की थी। इस एफआईआर में तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) निर्भय साहू और अन्य के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
कैसे हुआ घोटाला
आरोप है कि सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से दस्तावेज़ों में हेरफेर कर भूमि अधिग्रहण रिकॉर्ड बदले गए और इसके ज़रिए अवैध रूप से अधिक मुआवज़ा हासिल किया गया। जाँच में यह भी सामने आया है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), रायपुर द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3ए के तहत अधिसूचना जारी होने के बाद भी भूमि स्वामित्व को जानबूझकर स्थानांतरित किया गया। इसके अलावा, धारा 3डी की अधिसूचना से पहले भूमि को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटकर मुआवज़े की राशि बढ़ाने की कोशिश की गई।
अपराध की आय और सरकारी नुकसान
ईडी के अनुसार, संशोधित और हेरफेर किए गए खसरा रिकॉर्ड के आधार पर मुआवज़ा स्वीकृत और वितरित किया गया, जिससे वास्तविक से अधिक राशि प्राप्त की गई। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार अर्जित अतिरिक्त धनराशि 'अपराध की आय' की श्रेणी में आती है, जिससे सरकारी खज़ाने को नुकसान पहुँचा और आरोपियों को अवैध लाभ मिला। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारतमाला जैसी बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
आगे की जाँच
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जाँच जारी है और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों तथा नेटवर्क की पहचान की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ या संपत्ति कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।