छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी ने ₹1,200 करोड़ की संपत्ति जब्त की, 85 आरोपी, तीन नए पीएओ जारी
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल ऑफिस ने 28 मई 2026 को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी कर ₹200 करोड़ की डीड वैल्यू और ₹1,200 करोड़ से अधिक की बाज़ार मूल्य वाली संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। जाँच में सामने आया है कि 2019 से 2023 के बीच राज्य की आबकारी व्यवस्था में सुनियोजित हेरफेर कर ₹2,883 करोड़ से अधिक की अपराध से अर्जित संपत्ति जुटाई गई।
सिंडिकेट का तंत्र और अपराध की रूपरेखा
ईओडब्ल्यू/एसीबी, रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी की जाँच से खुलासा हुआ कि अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा (सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी) के नेतृत्व में एक शराब सिंडिकेट ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों, डिस्टिलरी मालिकों और निजी संस्थाओं की मिलीभगत से यह घोटाला अंजाम दिया। सिंडिकेट ने शराब खरीद की दरें कृत्रिम रूप से बढ़ाकर, बिना हिसाब-किताब की शराब का गुप्त उत्पादन कराकर और पसंदीदा संस्थाओं को दिए गए एफएल-10ए लाइसेंसों के ज़रिए कमीशन वसूलकर अरबों रुपए की अवैध कमाई की।
विकास अग्रवाल ने सिंडिकेट के जमीनी स्तर के वित्तीय प्रबंधक के रूप में काम किया — डिस्टिलरियों और एफएल-10ए लाइसेंसधारियों से कमीशन इकट्ठा कर सीधे अनवर ढेबर तक पहुँचाता था। ईडी ने उसके परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज संपत्तियाँ उनकी 'अपराध से अर्जित संपत्ति' के बराबर मूल्य के तौर पर जब्त की हैं।
तीन पीएओ में क्या-क्या जब्त हुआ
पहले पीएओ के तहत विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी अचल संपत्तियाँ कुर्क की गई हैं। इनमें रायपुर स्थित 'ढेबर सिटी होम्स' में कई प्लॉट — जो मेसर्स ए धेबर बिल्डकॉन के ज़रिए रखे गए थे — और मेसर्स शाइनिंग स्टार बिल्डकॉन, मेसर्स मूनलाइट रियल एस्टेट, मेसर्स स्वर्ण इंफ्राबिल्ड तथा मेसर्स जय गुरुदेव इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी शेल कंपनियों के ज़रिए रखी गई रायपुर में पाँच ज़मीन के टुकड़े शामिल हैं। इस पीएओ के तहत जब्त संपत्ति का कुल मूल्य लगभग ₹30 करोड़ है।
दूसरे पीएओ के तहत उत्तरी गोवा के अंजुना गाँव में स्थित प्रीमियम संपत्ति 'होटल वेस्टिन गोवा' जब्त की गई है, जो मेसर्स पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज है। इसके निदेशकों में राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल शामिल हैं। जाँच में यह प्रमाणित हुआ कि यह होटल पूरी तरह शराब घोटाले की अपराध से अर्जित नकदी — लगभग ₹110 करोड़ — से खरीदा गया था, जिसे चैतन्य बघेल के निर्देश पर भौतिक रूप से पहुँचाया गया था।
तीसरे पीएओ के तहत तीन एफएल-10ए लाइसेंसधारी कंपनियों — मेसर्स ओम साई बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स दिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड — के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड कुर्क किए गए हैं। इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा सिंडिकेट को देने पर मजबूर किया गया था, जिसकी कुल राशि लगभग ₹51 करोड़ बताई गई है।
छठी पूरक अभियोजन शिकायत और नए आरोपी
ईडी ने रायपुर की विशेष अदालत (पीएमएलए) में अपनी छठी पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है, जिसमें चार नए आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें विजय भाटिया (मेसर्स ओम साई बेवरेजेस में 52.5 प्रतिशत बेनामी हिस्सेदारी रखने वाले व्यवसायी), टी भुवनेश्वरी राव, प्रोबीर शर्मा (जिसने सिंडिकेट की ओर से करोड़ों रुपए की नकदी भौतिक रूप से पहुँचाई) और निखिल चंद्रकार शामिल हैं। इस शिकायत के साथ पीएमएलए मामले में आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 85 हो गई है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी की अब तक की सबसे बड़ी एकल कार्रवाई है। यह ऐसे समय में आई है जब राज्य में पिछले कुछ वर्षों से आबकारी नीति की पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं। ईडी के अनुसार आगे की जाँच जारी है और नए खुलासों के साथ और कार्रवाइयाँ संभव हैं।