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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी ने ₹1,200 करोड़ की संपत्ति जब्त की, 85 आरोपी, तीन नए पीएओ जारी

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी ने ₹1,200 करोड़ की संपत्ति जब्त की, 85 आरोपी, तीन नए पीएओ जारी

सारांश

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई — ₹1,200 करोड़ की संपत्ति जब्त, गोवा का पाँच सितारा होटल कुर्क, और आरोपियों की संख्या 85 तक पहुँची। अनवर ढेबर व अनिल टुटेजा के नेतृत्व वाले सिंडिकेट ने 2019-2023 के बीच ₹2,883 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई की थी।

मुख्य बातें

ईडी के रायपुर जोनल ऑफिस ने 28 मई 2026 को तीन पीएओ जारी कर ₹1,200 करोड़ से अधिक की बाज़ार मूल्य वाली संपत्तियाँ जब्त कीं।
अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा (सेवानिवृत्त आईएएस) के नेतृत्व वाले सिंडिकेट ने 2019-2023 के बीच ₹2,883 करोड़ से अधिक की अपराध से अर्जित संपत्ति जुटाई।
उत्तरी गोवा स्थित 'होटल वेस्टिन गोवा' को लगभग ₹110 करोड़ की अपराध से अर्जित नकदी से खरीदा गया था — यह भी कुर्क।
तीन एफएल-10ए लाइसेंसधारी कंपनियों के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड कुर्क; इन कंपनियों ने सिंडिकेट को लगभग ₹51 करोड़ का भुगतान किया था।
छठी पूरक अभियोजन शिकायत में 4 नए आरोपी जोड़े गए; पीएमएलए मामले में कुल आरोपी 85 हुए।
ईडी के अनुसार आगे की जाँच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल ऑफिस ने 28 मई 2026 को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी कर ₹200 करोड़ की डीड वैल्यू और ₹1,200 करोड़ से अधिक की बाज़ार मूल्य वाली संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। जाँच में सामने आया है कि 2019 से 2023 के बीच राज्य की आबकारी व्यवस्था में सुनियोजित हेरफेर कर ₹2,883 करोड़ से अधिक की अपराध से अर्जित संपत्ति जुटाई गई।

सिंडिकेट का तंत्र और अपराध की रूपरेखा

ईओडब्ल्यू/एसीबी, रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी की जाँच से खुलासा हुआ कि अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा (सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी) के नेतृत्व में एक शराब सिंडिकेट ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों, डिस्टिलरी मालिकों और निजी संस्थाओं की मिलीभगत से यह घोटाला अंजाम दिया। सिंडिकेट ने शराब खरीद की दरें कृत्रिम रूप से बढ़ाकर, बिना हिसाब-किताब की शराब का गुप्त उत्पादन कराकर और पसंदीदा संस्थाओं को दिए गए एफएल-10ए लाइसेंसों के ज़रिए कमीशन वसूलकर अरबों रुपए की अवैध कमाई की।

विकास अग्रवाल ने सिंडिकेट के जमीनी स्तर के वित्तीय प्रबंधक के रूप में काम किया — डिस्टिलरियों और एफएल-10ए लाइसेंसधारियों से कमीशन इकट्ठा कर सीधे अनवर ढेबर तक पहुँचाता था। ईडी ने उसके परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज संपत्तियाँ उनकी 'अपराध से अर्जित संपत्ति' के बराबर मूल्य के तौर पर जब्त की हैं।

तीन पीएओ में क्या-क्या जब्त हुआ

पहले पीएओ के तहत विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी अचल संपत्तियाँ कुर्क की गई हैं। इनमें रायपुर स्थित 'ढेबर सिटी होम्स' में कई प्लॉट — जो मेसर्स ए धेबर बिल्डकॉन के ज़रिए रखे गए थे — और मेसर्स शाइनिंग स्टार बिल्डकॉन, मेसर्स मूनलाइट रियल एस्टेट, मेसर्स स्वर्ण इंफ्राबिल्ड तथा मेसर्स जय गुरुदेव इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी शेल कंपनियों के ज़रिए रखी गई रायपुर में पाँच ज़मीन के टुकड़े शामिल हैं। इस पीएओ के तहत जब्त संपत्ति का कुल मूल्य लगभग ₹30 करोड़ है।

दूसरे पीएओ के तहत उत्तरी गोवा के अंजुना गाँव में स्थित प्रीमियम संपत्ति 'होटल वेस्टिन गोवा' जब्त की गई है, जो मेसर्स पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज है। इसके निदेशकों में राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल शामिल हैं। जाँच में यह प्रमाणित हुआ कि यह होटल पूरी तरह शराब घोटाले की अपराध से अर्जित नकदी — लगभग ₹110 करोड़ — से खरीदा गया था, जिसे चैतन्य बघेल के निर्देश पर भौतिक रूप से पहुँचाया गया था।

तीसरे पीएओ के तहत तीन एफएल-10ए लाइसेंसधारी कंपनियों — मेसर्स ओम साई बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स दिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड — के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड कुर्क किए गए हैं। इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा सिंडिकेट को देने पर मजबूर किया गया था, जिसकी कुल राशि लगभग ₹51 करोड़ बताई गई है।

छठी पूरक अभियोजन शिकायत और नए आरोपी

ईडी ने रायपुर की विशेष अदालत (पीएमएलए) में अपनी छठी पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है, जिसमें चार नए आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें विजय भाटिया (मेसर्स ओम साई बेवरेजेस में 52.5 प्रतिशत बेनामी हिस्सेदारी रखने वाले व्यवसायी), टी भुवनेश्वरी राव, प्रोबीर शर्मा (जिसने सिंडिकेट की ओर से करोड़ों रुपए की नकदी भौतिक रूप से पहुँचाई) और निखिल चंद्रकार शामिल हैं। इस शिकायत के साथ पीएमएलए मामले में आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 85 हो गई है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी की अब तक की सबसे बड़ी एकल कार्रवाई है। यह ऐसे समय में आई है जब राज्य में पिछले कुछ वर्षों से आबकारी नीति की पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं। ईडी के अनुसार आगे की जाँच जारी है और नए खुलासों के साथ और कार्रवाइयाँ संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

200 करोड़ की यह कुर्की संख्या के लिहाज़ से प्रभावशाली है, लेकिन असली सवाल यह है कि ₹2,883 करोड़ की कथित अपराध से अर्जित संपत्ति में से अब तक कितनी वसूली हुई है और कितनी अभी भी बाहर है। 85 आरोपियों तक पहुँचना दर्शाता है कि जाँच का दायरा व्यापक है, लेकिन इतने बड़े सिंडिकेट में राजनीतिक संरक्षण की परतें अक्सर अभियोजन को जटिल बनाती हैं। गोवा के पाँच सितारा होटल की कुर्की यह भी उजागर करती है कि अपराध से अर्जित धन राज्य की सीमाओं से बाहर तक फैला था — जो राज्य स्तरीय प्रशासनिक निगरानी की सीमाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी ने कितनी और कौन-सी संपत्तियाँ जब्त की हैं?
ईडी ने 28 मई 2026 को तीन पीएओ के ज़रिए ₹200 करोड़ की डीड वैल्यू और ₹1,200 करोड़ से अधिक की बाज़ार मूल्य वाली संपत्तियाँ जब्त कीं। इनमें रायपुर की अचल संपत्तियाँ, उत्तरी गोवा का 'होटल वेस्टिन गोवा' (लगभग ₹110 करोड़) और तीन कंपनियों के बैंक खाते, शेयर व म्यूचुअल फंड शामिल हैं।
इस घोटाले में अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा की क्या भूमिका बताई गई है?
जाँच के अनुसार अनवर ढेबर और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा ने एक शराब सिंडिकेट का नेतृत्व किया। इस सिंडिकेट ने 2019 से 2023 के बीच शराब खरीद दरें बढ़ाकर, बिना हिसाब की शराब का उत्पादन कराकर और एफएल-10ए लाइसेंसों के ज़रिए कमीशन वसूलकर ₹2,883 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति जुटाई।
होटल वेस्टिन गोवा को इस मामले में क्यों जब्त किया गया?
जाँच में यह प्रमाणित हुआ कि उत्तरी गोवा के अंजुना स्थित 'होटल वेस्टिन गोवा' को पूरी तरह शराब घोटाले की अपराध से अर्जित नकदी — लगभग ₹110 करोड़ — से खरीदा गया था। यह रकम चैतन्य बघेल के निर्देश पर भौतिक रूप से पहुँचाई गई थी।
पीएमएलए मामले में अब तक कितने आरोपी हैं और नए कौन जोड़े गए?
ईडी की छठी पूरक अभियोजन शिकायत के साथ इस मामले में आरोपियों की कुल संख्या 85 हो गई है। नए जोड़े गए चार आरोपी हैं — विजय भाटिया, टी भुवनेश्वरी राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्रकार।
एफएल-10ए लाइसेंसधारी कंपनियों पर क्या आरोप हैं?
तीन एफएल-10ए लाइसेंसधारी कंपनियों — मेसर्स ओम साई बेवरेजेज, मेसर्स दिशिता वेंचर्स और मेसर्स नेक्सजेन पावर इंजीटेक — को अपने मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत सिंडिकेट को देने पर मजबूर किया गया था, जो कुल मिलाकर लगभग ₹51 करोड़ बनता है। इन कंपनियों के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड कुर्क कर लिए गए हैं।
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