डिजिटल कानूनी सहायता से अंडरट्रायल कैदियों को मिलेगा त्वरित न्याय, केंद्र की नई पहल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 17 जुलाई 2025 को मुंबई में डिजिटल कानूनी सहायता सेवाओं को देश के दूरदराज़ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाने की महत्वाकांक्षी पहल की रूपरेखा स्पष्ट की। केंद्रीय कानून राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल, भारत के उप महाधिवक्ता प्रवीण फलदेसाई और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोधा ने इस अवसर पर अपने विचार साझा किए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विचाराधीन कैदियों (अंडरट्रायल) को समय पर न्याय दिलाना और रिहाई आदेशों में होने वाली अनावश्यक देरी को समाप्त करना है।
मुख्य घटनाक्रम
केंद्रीय कानून राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है और चाहती है कि इस क्षेत्र में कार्यरत एनजीओ और ट्रस्ट भी इस अभियान से जुड़ें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान की मूल भावना यही है कि केवल वही व्यक्ति कारागार में रहे, जिसे कानून के अनुसार रखना आवश्यक हो — किसी को भी अनावश्यक रूप से जेल में नहीं रखा जाना चाहिए।
मेघवाल ने पुरानी व्यवस्था की एक बड़ी खामी की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि पहले अदालत द्वारा किसी कैदी की रिहाई का आदेश जारी होने के बाद भी वह आदेश जेल अधीक्षक तक पहुँचने में तीन से चार दिन लग जाते थे, जिससे कैदियों को बेवजह हिरासत में रहना पड़ता था। डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से इस प्रकार की देरी को जड़ से समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
ट्रस्ट की भूमिका और कानूनी सहायता की खाई
उप महाधिवक्ता प्रवीण फलदेसाई ने बताया कि 'दर्द से हमदर्द तक ट्रस्ट' लंबे समय से इस क्षेत्र में सक्रिय है और वर्षों से सरकार के साथ मिलकर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि मुफ्त कानूनी सहायता की व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद अनेक विचाराधीन कैदियों और दोषियों तक इसका लाभ नहीं पहुँच पा रहा था। फलदेसाई के अनुसार, ट्रस्ट ने इसी खाई को पाटने के लिए मौजूदा कानूनी सहायता तंत्र को सुदृढ़ करने का काम किया है।
महाराष्ट्र की भूमिका और ग्रामीण विस्तार
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोधा ने बताया कि केंद्रीय मंत्री मेघवाल चाहते हैं कि डिजिटल कानूनी सहायता सेवाएँ छोटे गाँवों और तहसीलों तक भी पहुँचें। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जो राज्य के कानून मंत्री भी हैं, इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। यह पहल उन लाखों विचाराधीन कैदियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो संसाधनों के अभाव में अपना कानूनी पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रख पाते।
उद्धव ठाकरे पर लोधा की प्रतिक्रिया
इसी कार्यक्रम के दौरान मंत्री लोधा ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा 18 जुलाई को नागपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ 'राम रक्षा स्तोत्र' का पाठ किए जाने पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, "यह अच्छी बात है। देर आए, दुरुस्त आए। यह खुशी की बात है कि उद्धव ठाकरे की भगवान राम में आस्था बढ़ी है और वे राम रक्षा स्तोत्र का पाठ कर रहे हैं।"
हालाँकि लोधा ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक विशेष घटना के आधार पर भगवान राम को बदनाम करना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित घटना की जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया जा चुका है, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और सरकार बार-बार यह स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
आगे क्या होगा
यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत की जेलों में विचाराधीन कैदियों की संख्या कुल कैदी आबादी के तीन-चौथाई से अधिक बताई जाती है। डिजिटल कानूनी सहायता का विस्तार यदि प्रभावी ढंग से लागू हुआ, तो यह न्याय तक पहुँच की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। सरकार की यह पहल एनजीओ और नागरिक समाज संगठनों के सहयोग से आगे बढ़ाई जाएगी।