झारसुगुडा कोर्ट कॉम्प्लेक्स को बम की धमकी के बाद खाली कराया, बम निरोधक दस्ते ने की तलाशी
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के झारसुगुडा जिला न्यायालय परिसर में शुक्रवार, 17 जुलाई को उस समय अफरातफरी मच गई, जब कोर्ट प्रशासन को जिला जज के नाम पर एक ईमेल के ज़रिए बम की धमकी मिली। धमकी मिलते ही आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया और पूरे न्यायिक परिसर को तत्काल खाली करा लिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय अधिकारियों और सुरक्षा बलों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जजों, वकीलों, कोर्ट कर्मचारियों और मुकदमों से जुड़े सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया। बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वाड मौके पर पहुँचे और आधुनिक उपकरणों की सहायता से परिसर की बारीकी से तलाशी ली।
अधिकारियों ने बताया कि व्यापक जाँच के बाद परिसर में कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई और न ही किसी प्रकार की असामान्य स्थिति सामने आई।
देशभर में बढ़ती बम धमकियों का सिलसिला
यह घटना एक व्यापक राष्ट्रीय प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें ईमेल के ज़रिए सरकारी कार्यालयों और न्यायालयों को निशाना बनाया जा रहा है। 13 जुलाई को राजस्थान में जयपुर और जोधपुर स्थित राजस्थान हाई कोर्ट की दोनों पीठों को एक अज्ञात ईमेल पते से बम से उड़ाने की धमकी मिली थी, जिसके बाद तत्काल सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।
उसी दिन, उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर के जिला अधिकारी (DM) कार्यालय को भी ईमेल के ज़रिए बम की धमकी मिली थी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, बम निरोधक दस्ता, फायर ब्रिगेड, एंटी सबोटाज (A.S.) टीम और डॉग स्क्वाड ने मौके पर पहुँचकर पूरे परिसर की गहन तलाशी ली।
इससे पहले 15 जुलाई को झारखंड के मुख्य डाकघरों और उसी क्षेत्र के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को एक अज्ञात ईमेल के माध्यम से धमकी मिली थी। उस ईमेल में दावा किया गया था कि दोपहर 1:15 बजे मुख्य डाक और पासपोर्ट कार्यालय में विस्फोट होगा। पुलिस ने बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वाड की मदद से तत्काल तलाशी अभियान चलाया।
सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया
झारसुगुडा मामले में सुरक्षा एजेंसियों ने परिसर के प्रत्येक फ्लोर, कार्यालय कक्ष, अटारी क्षेत्र और आसपास के आवासीय भवनों का विस्तृत निरीक्षण किया। गौरतलब है कि इस प्रकार की धमकियाँ देशभर में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों पर दबाव बढ़ा रही हैं और न्यायिक कार्यवाही को बाधित कर रही हैं।
क्या होगा आगे
सुरक्षा एजेंसियाँ अज्ञात ईमेल पते की तकनीकी जाँच कर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की श्रृंखलाबद्ध धमकियाँ अक्सर एक ही स्रोत या संगठित समूह से आती हैं, जो सार्वजनिक संस्थानों में दहशत फैलाने की कोशिश करते हैं। अधिकारियों ने न्यायालय परिसरों की साइबर सुरक्षा और ईमेल निगरानी प्रणाली को और मज़बूत करने के संकेत दिए हैं।