ईशान किशन: 12 साल में घर छोड़ा, भूखे सोए — वनडे में सबसे तेज दोहरा शतक से रचा इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
टीम इंडिया के विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन की क्रिकेट यात्रा संघर्ष, साहस और असाधारण प्रतिभा की मिसाल है। 18 जुलाई 1998 को पटना, बिहार में जन्मे ईशान ने मात्र 12 वर्ष की आयु में घर छोड़ा और ऐसी परिस्थितियों में क्रिकेट सीखा जहाँ कई रातें भूखे सोकर गुज़ारनी पड़ीं। आज वह वनडे क्रिकेट के सबसे तेज दोहरे शतक के रिकॉर्डधारी हैं और टी20 विश्व कप 2026 में भारत की चैंपियनशिप में अहम भूमिका निभा चुके हैं।
प्रतिभा की पहली पहचान
साल 2005 में ईशान के पिता प्रणव कुमार पांडे अपने बड़े बेटे राज किशन के चयन की उम्मीद लेकर कोच उत्तम मजूमदार के पास गए। राज का चयन नहीं हुआ, लेकिन कोच उत्तम तब महज सात वर्षीय ईशान की बल्लेबाजी देखकर इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने परिवार से साफ कहा — किसी भी हाल में ईशान का क्रिकेट बंद न करें। यह एक वाक्य आगे चलकर भारतीय क्रिकेट के लिए निर्णायक साबित हुआ।
12 साल में घर छोड़ा, भूखे सोए
बिहार में क्रिकेट के सीमित संसाधनों को देखते हुए कोच ने ईशान को झारखंड जाने की सलाह दी। माँ नहीं चाहती थीं कि इतनी छोटी उम्र में बेटा घर से दूर जाए, लेकिन ईशान की ज़िद के आगे परिवार को झुकना पड़ा। रांची में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) की ओर से खेलने का मौका मिला और उन्हें एक क्वार्टर में चार सीनियर खिलाड़ियों के साथ रहना पड़ा।
खाना बनाना न आने के कारण ईशान बर्तन धोने की ज़िम्मेदारी संभालते थे। जब सीनियर खिलाड़ी मैच खेलने बाहर जाते, तो ईशान को कई रातें बिना खाने के ही सोना पड़ता था। जब यह बात परिवार को पता चली, तो माता-पिता ने रांची में किराए का मकान लेकर रहने का निर्णय लिया।
घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
मात्र 15 वर्ष की आयु में ईशान का चयन झारखंड की रणजी ट्रॉफी टीम में हो गया। घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन के दम पर उन्होंने भारत की अंडर-19 टीम में भी जगह बनाई। 2021 में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा और डेब्यू मैच में ही 32 गेंदों में 56 रन की धमाकेदार पारी खेलकर सबका ध्यान खींचा।
अब तक ईशान ने 52 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 145 के स्ट्राइक रेट से 1,463 रन, 31 वनडे में 1,093 रन और 2 टेस्ट में 78 रन बनाए हैं।
वनडे में सबसे तेज दोहरा शतक — इतिहास में नाम
2022 में बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए वनडे मुकाबले में ईशान ने केवल 126 गेंदों में दोहरा शतक पूरा किया — यह वनडे क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज दोहरा शतक है जो आज भी उनके नाम दर्ज है। गौरतलब है कि यह उपलब्धि उस खिलाड़ी ने हासिल की जिसने कभी रांची के एक क्वार्टर में भूखे पेट रातें गुज़ारी थीं।
ब्रेक, वापसी और टी20 विश्व कप 2026
रिकॉर्ड दोहरे शतक के कुछ समय बाद ईशान ने मानसिक थकान और व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए क्रिकेट से अचानक ब्रेक लिया। घरेलू क्रिकेट से भी दूरी बनाने के कारण भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उन्हें सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर कर दिया।
लेकिन ईशान ने हार नहीं मानी। घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन जारी रखा और अपनी कप्तानी में झारखंड को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब दिलाया। इसी प्रदर्शन ने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और भारतीय टीम में उनकी वापसी हुई। टीम में लौटते ही ईशान ने अपनी तूफानी बल्लेबाजी से जगह पक्की की और टी20 विश्व कप 2026 में टीम इंडिया को चैंपियन बनाने में अहम किरदार निभाया। यह सफर बताता है कि असली चैंपियन गिरकर उठना जानते हैं।