बृजभूषण शरण सिंह बोले — शंकराचार्य की गोरक्षा यात्रा में दूध के उचित दाम की मांग भी जुड़े
सारांश
मुख्य बातें
कैसरगंज से पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 17 जुलाई 2026 को गोंडा में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज की गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा पर अपनी राय रखते हुए कहा कि गौ-रक्षा आंदोलन स्वागतयोग्य है, परंतु इसमें दूध के उचित मूल्य की मांग को भी केंद्र में रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार जब तक पशुपालकों को उनकी मेहनत का वाजिब दाम नहीं मिलता, तब तक गौ-पालन को बढ़ावा देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा।
गौ-पालन बना घाटे का सौदा
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि मौजूदा हालात में गौ-पालन आर्थिक रूप से नुकसानदेह हो चुका है। उन्होंने बताया कि इस समय भूसे का भाव लगभग ₹1,200 प्रति क्विंटल है, जो सर्दियों तक ₹1,600 से ₹1,800 प्रति क्विंटल तक पहुँचने की आशंका है। इसके साथ ही मजदूरों की कमी और पशु आहार की बढ़ती लागत ने पशुपालकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सामान्य गाय को प्रतिदिन कम से कम चार किलो और बड़ी गाय को छह किलो तक दाना देना आवश्यक होता है। पशु आहार की कीमत लगभग ₹35 प्रति किलो है, जबकि दूध बाज़ार में ₹35 से ₹40 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है — यानी उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य में लगभग कोई अंतर नहीं बचता।
नकली डेयरी उत्पाद बड़ी समस्या
पूर्व सांसद ने कहा कि बाज़ार में बड़े पैमाने पर नकली घी, पनीर, खोवा, दही और मिल्क पाउडर जैसे उत्पाद बिक रहे हैं, जिनके कारण असली दूध को उसका उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा। उनका मानना है कि जब तक नकली डेयरी उत्पादों पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जाती, तब तक असली दूध उत्पादकों की स्थिति नहीं सुधरेगी। उन्होंने कहा कि यदि दूध का वाजिब मूल्य तय किया जाए तो यह लगभग ₹150 प्रति लीटर होना चाहिए।
बुडापेस्ट कुश्ती चैंपियनशिप पर प्रसन्नता
इसी बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने बुडापेस्ट रेसलिंग चैंपियनशिप में भारतीय पहलवानों के शानदार प्रदर्शन पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि एक समय भारत विश्व कुश्ती में पिछड़ा हुआ था, लेकिन अब भारत दुनिया की शीर्ष पाँच टीमों में शामिल हो चुका है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले दो-तीन वर्षों में भारतीय कुश्ती में कुछ व्यवधान आया था, परंतु अब खेल सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
आगे की उम्मीद
बृजभूषण शरण सिंह ने विश्वास जताया कि भारतीय पहलवान अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण और रजत पदक जीतने का सिलसिला जारी रखेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले ओलंपिक में भी भारतीय पहलवान पहले की तुलना में अधिक पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेंगे। गौ-रक्षा के मोर्चे पर, उनका संदेश स्पष्ट है — आंदोलन तभी सार्थक होगा जब पशुपालकों की आर्थिक पीड़ा को भी उसका अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।