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महाराष्ट्र में 2047 तक लगेंगे 300 करोड़ पेड़, सुनेत्रा पवार ने बारामती में 'देवगिरी से देवराई' अभियान किया लॉन्च

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महाराष्ट्र में 2047 तक लगेंगे 300 करोड़ पेड़, सुनेत्रा पवार ने बारामती में 'देवगिरी से देवराई' अभियान किया लॉन्च

सारांश

महाराष्ट्र सरकार का 2047 तक 300 करोड़ पेड़ लगाने का संकल्प महज़ एक सरकारी लक्ष्य नहीं — यह राज्य की पर्यावरणीय पहचान को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश है। बारामती में 'देवगिरी से देवराई' अभियान की शुरुआत के साथ उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने इसे सामूहिक जिम्मेदारी का रूप देने की अपील की।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने 2047 तक राज्य में 300 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य तय किया है।
इस वर्ष पहले चरण में 18 करोड़ पौधे रोपने की योजना है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने बारामती के कन्हेरी में अजीत दादा पवार पर्यटन उद्यान का उद्घाटन किया।
कन्हेरी के 55 हेक्टेयर वन क्षेत्र के विकास पर अब तक ₹8.75 करोड़ खर्च हो चुके हैं।
'देवगिरी से देवराई' अभियान में स्कूल, कॉलेज, उद्योग और नागरिकों से भागीदारी की अपील की गई।
वृक्षारोपण में स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने 18 जुलाई 2025 को बारामती के कन्हेरी में अजीत दादा पवार पर्यटन उद्यान का उद्घाटन करते हुए 'देवगिरी से देवराई' वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की। उन्होंने राज्य सरकार के उस संकल्प को दोहराया जिसके तहत वर्ष 2047 तक महाराष्ट्र में 300 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, और इस वर्ष पहले चरण में 18 करोड़ पौधे रोपने की योजना है।

अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

सुनेत्रा पवार ने कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि 'देवगिरी से देवराई' अभियान केवल पेड़ लगाने की औपचारिकता नहीं है — इसका व्यापक उद्देश्य लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना, प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना है। उन्होंने कहा कि पेड़ लगाना ही पर्याप्त नहीं, उनकी देखभाल और दीर्घकालिक संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।

उन्होंने स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि वृक्षारोपण के दौरान स्थानीय प्रजातियों के पेड़ों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों के कारण महाराष्ट्र की समृद्ध प्राकृतिक संपदा — पहाड़, जंगल और समुद्री क्षेत्र — पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

कन्हेरी पर्यटन उद्यान: विकास और सुविधाएँ

कन्हेरी के 55 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र को विकसित करने के लिए अब तक ₹8.75 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। दो चरणों में हो रहे इस विकास कार्य में उद्यान के भीतर रास्ते, झूला पुल, सौर ऊर्जा पार्क, चट्टानी उद्यान और तितली उद्यान जैसी सुविधाएँ तैयार की गई हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह उद्यान केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि बारामती के विकास और दूरदर्शी सोच का प्रतीक बनेगा और पर्यावरण शिक्षा का केंद्र भी होगा।

सामूहिक जिम्मेदारी की अपील

सुनेत्रा पवार ने स्कूलों, कॉलेजों, स्वयंसेवी संस्थाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों से सरकार के वृक्षारोपण अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को हरा-भरा और पर्यावरण के अनुकूल राज्य बनाने का सपना तभी साकार होगा जब सरकार, सामाजिक संस्थाएँ, उद्योग और आम नागरिक एकजुट होकर काम करेंगे। उन्होंने इस अभियान को वन मंत्री गणेश नाइक और वन विभाग के अधिकारियों के सहयोग से संभव बताया।

अजीत पवार की विरासत और कार्यक्रम में उपस्थित हस्तियाँ

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अजीत पवार पर्यावरण संरक्षण को लेकर हमेशा गंभीर रहे हैं और उनके विचारों को जन-अभियान में बदलने के लिए सभी को आगे आना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि उनके नाम पर बना यह पर्यटन उद्यान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य और अभिनेता सयाजी शिंदे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री ने सयाजी शिंदे के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों की सराहना की और कहा कि उन्होंने इस अभियान को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

गौरतलब है कि यह अभियान भारत के 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य के साथ भी जुड़ता है, जिसमें पर्यावरणीय स्थिरता एक अहम स्तंभ है। अब देखना यह होगा कि 300 करोड़ पेड़ों का यह संकल्प जमीन पर किस रफ्तार से आकार लेता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत में वृक्षारोपण अभियानों का इतिहास बताता है कि रोपे गए पौधों और जीवित बचे पेड़ों के बीच की खाई अक्सर चौंकाने वाली होती है। असली कसौटी यह है कि क्या सरकार पौधों की उत्तरजीविता दर को सार्वजनिक रूप से ट्रैक करेगी। स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता देने की बात सही दिशा में है, लेकिन ₹8.75 करोड़ के खर्च वाले उद्यान से 300 करोड़ पेड़ों तक की यात्रा के लिए एक पारदर्शी क्रियान्वयन ढाँचा अनिवार्य है — अन्यथा यह भी उन घोषणाओं की सूची में शामिल हो जाएगा जो संख्याओं में बड़ी, ज़मीन पर कमज़ोर रहीं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार का 300 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य क्या है?
महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2047 तक राज्य में 300 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य के पहले चरण में इस वर्ष 18 करोड़ पौधे रोपने की योजना है।
'देवगिरी से देवराई' अभियान क्या है?
'देवगिरी से देवराई' महाराष्ट्र सरकार का वृक्षारोपण और पर्यावरण जागरूकता अभियान है, जिसे उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने बारामती के कन्हेरी में लॉन्च किया। इसका उद्देश्य केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि लोगों में प्रकृति के प्रति जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।
अजीत दादा पवार पर्यटन उद्यान कहाँ है और इस पर कितना खर्च हुआ है?
यह उद्यान बारामती के कन्हेरी में 55 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र में विकसित किया गया है। अब तक इसके विकास पर ₹8.75 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं और दो चरणों में कार्य जारी है।
इस वृक्षारोपण अभियान में कौन भाग ले सकता है?
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने स्कूलों, कॉलेजों, स्वयंसेवी संस्थाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों — सभी से अभियान में जुड़ने की अपील की है। सरकार इसे केवल सरकारी पहल नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी मानती है।
वृक्षारोपण में किन पेड़ों को प्राथमिकता दी जाएगी?
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वृक्षारोपण के दौरान स्थानीय प्रजातियों के पेड़ों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पेड़ लगाने के साथ-साथ उनकी देखभाल और दीर्घकालिक संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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