नारी शक्ति के बिना 'विकसित भारत' अधूरा: सीएम फडणवीस ने मुंबई में 1 करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य रखा
सारांश
Key Takeaways
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 2 मई 2026 को मुंबई में आयोजित महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में स्पष्ट कहा कि 'विकसित भारत' का सपना तब तक पूरा नहीं होगा जब तक महिलाएं राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सक्रिय और निर्णायक भूमिका नहीं निभातीं। उन्होंने महाराष्ट्र के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा कि राज्य को देश में सबसे पहले 1 करोड़ 'लखपति दीदियाँ' तैयार करके नेतृत्व करना होगा।
लखपति दीदी अभियान: महाराष्ट्र की स्थिति
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि महाराष्ट्र अभी 50 लाख लखपति दीदियों के सृजन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 'लखपति दीदी' वे महिलाएं हैं जिनकी वार्षिक आय ₹1 लाख या उससे अधिक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई योजनाओं के जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण परिणाम दिखने लगे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूरे देश में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर दे रही है।
वृक्षारोपण अभियान में SHG की भूमिका
फडणवीस ने महिला स्वयं सहायता समूहों से सरकार के ₹300 करोड़ के वृक्षारोपण अभियान का नेतृत्व करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि 'उमेद' महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत SHG को नर्सरी स्थापित करने के लिए विशेष निधि उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार पौध तैयार करने, रोपण और रखरखाव का संपूर्ण खर्च वहन करेगी, जिससे इन समूहों को दीर्घकालिक व्यावसायिक आय प्राप्त होगी।
उमेद मार्ट और उमेद मॉल नेटवर्क का विस्तार
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से उमेद मार्ट के माध्यम से खरीदारी करके स्थानीय उद्यमियों का समर्थन करने का आग्रह किया। उमेद मार्ट एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिस पर अब महिला SHG के 1,000 से अधिक नए उत्पाद उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्थायी बाजार पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उमेद मॉल वर्तमान में 20 जिलों में निर्माणाधीन हैं और शेष 16 जिलों में भी जल्द काम शुरू होगा। सरकार की योजना इस नेटवर्क को आने वाले वर्षों में तहसील (तालुका) स्तर तक विस्तारित करने की है।
उमेद मिशन के प्रमुख आँकड़े
ग्रामीण विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने बताया कि महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी भारत में अपनी तरह की सबसे बड़ी प्रदर्शनी है। उन्होंने 'उमेद' मिशन से जुड़े प्रमुख आँकड़े साझा किए — इस पहल के तहत महाराष्ट्र के 39,558 गाँवों तक पहुँचा जा चुका है, 6.68 लाख स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 64 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिला है, और राज्य में अभी 331 महिला किसान उत्पादक कंपनियाँ कार्यरत हैं। गौरतलब है कि महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी की गुणवत्ता और संगठन को मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों के समकक्ष बताया।
आगे की राह
उमेद मॉल नेटवर्क का तहसील स्तर तक विस्तार और SHG को वृक्षारोपण अभियान से जोड़ने की योजना महाराष्ट्र में ग्रामीण महिला उद्यमिता को एक नई दिशा दे सकती है। यदि राज्य 1 करोड़ लखपति दीदियों का लक्ष्य हासिल करता है, तो यह देश के लिए एक मॉडल बन सकता है जिसे अन्य राज्य अपना सकते हैं।