3 अगस्त 2026
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सावन के पहले सोमवार पर महाकाल का भांग-श्रृंगार, उज्जैन में 5 लाख श्रद्धालुओं का सैलाब

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सावन के पहले सोमवार पर महाकाल का भांग-श्रृंगार, उज्जैन में 5 लाख श्रद्धालुओं का सैलाब

सारांश

सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के ढाई बजे पट खुले, भांग और सूखे मेवों से बाबा का अलौकिक श्रृंगार हुआ, और 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के उमड़ने की उम्मीद के बीच प्रशासन ने 'चलित भस्म आरती' की विशेष व्यवस्था की।

मुख्य बातें

3 अगस्त 2026 को सावन के प्रथम सोमवार पर श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में तड़के ढाई बजे पट खोले गए।
बाबा महाकाल का भांग और सूखे मेवों से विशेष श्रृंगार किया गया; महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई।
रविवार को 4 लाख 19 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए; सोमवार को 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद।
अग्रिम बुकिंग से वंचित भक्तों के लिए 'चलित भस्म आरती' की विशेष व्यवस्था की गई।
जिला कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने स्वयं भस्म आरती में उपस्थित होकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 3 अगस्त 2026 को सावन के प्रथम सोमवार पर तड़के ढाई बजे मंदिर के पट खुलते ही 'जय महाकाल' के जयघोष से पूरा प्रांगण गूँज उठा। कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के इस पावन संयोग पर भांग और सूखे मेवों से बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार किया गया और भव्य महाआरती में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।

पूजन और अभिषेक का क्रम

प्रथम घंटा बजाकर बाबा को हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन संपन्न हुआ। केसर और इत्र से भी बाबा को स्नान कराया गया।

तत्पश्चात भांग और सूखे मेवों से विशेष श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मंदिर के पुजारियों द्वारा मुख्य महाआरती संपन्न होते ही हजारों भक्तों ने बाबा के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।

चलित भस्म आरती की विशेष व्यवस्था

जिन श्रद्धालुओं को भस्म आरती की अग्रिम बुकिंग नहीं मिल सकी थी, उनके लिए मंदिर समिति ने 'चलित भस्म आरती' दर्शन की विशेष व्यवस्था की। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी भक्त दर्शन लाभ से वंचित न रहे।

जिला कलेक्टर रोशन कुमार सिंह स्वयं भस्म आरती में उपस्थित हुए और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने कहा, 'सावन का पवित्र महीना चल रहा है, और आज इसका पहला सोमवार है। भस्म आरती अभी-अभी खत्म हुई है, और बड़ी संख्या में भक्त बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुँचे हैं। प्रशासन की ओर से बड़े इंतजाम किए गए हैं।'

श्रद्धालुओं की संख्या और प्रशासनिक तैयारी

प्रशासन के अनुसार, रविवार 2 अगस्त को 4 लाख 19 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। सावन के पहले सोमवार पर 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन की उम्मीद के मद्देनजर व्यापक प्रबंध किए गए। कलेक्टर सिंह ने बताया कि बाबा महाकाल की पारंपरिक सवारी भी धूमधाम से निकाली जाएगी और सभी श्रद्धालुओं से प्रशासनिक व्यवस्थाओं का पालन करने की अपील की गई।

पुजारी और भक्तों की प्रतिक्रिया

श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी ओम गुरु ने बताया, 'हजारों भक्तों ने दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। सावन के महीने में मंदिर सोमवार को जल्दी खुलता है, और आज सुबह करीब 2:30 बजे दरवाजे खोले गए। हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान महाकाल सभी की मनोकामनाएँ पूरी करें और सभी का कल्याण हो।'

दिल्ली से आए भक्त अमित शर्मा ने कहा, 'आज की भस्म आरती सच में बहुत अच्छी थी। सावन के पवित्र महीने का पहला सोमवार होने के कारण यह बहुत खास और एक यादगार अनुभव था।' श्रद्धालु गीता ने भी कहा कि सावन के पहले सोमवार को भस्म आरती में शामिल होकर वे स्वयं को भाग्यशाली महसूस कर रही हैं।

आगे क्या

सावन के शेष सोमवारों पर भी इसी प्रकार की विशेष पूजा-अर्चना और भव्य आयोजन की परंपरा जारी रहेगी। मंदिर प्रशासन ने संकेत दिया है कि आने वाले सोमवारों पर श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है, इसलिए 'चलित भस्म आरती' की व्यवस्था आगे भी बनाए रखी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार 'चलित भस्म आरती' की व्यवस्था एक सकारात्मक प्रशासनिक नवाचार है जो यह सुनिश्चित करती है कि भीड़ प्रबंधन की सीमाएँ आस्था के अनुभव को नहीं काटें। रविवार को 4 लाख 19 हजार और सोमवार को 5 लाख से अधिक दर्शनार्थियों का अनुमान यह भी दर्शाता है कि धार्मिक पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी ताकत है, जिस पर नीतिगत ध्यान आवश्यक है। साथ ही यह सवाल भी उठता है कि इतनी विशाल भीड़ के बीच सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं का पर्याप्त ढाँचा कितना तैयार है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन के पहले सोमवार पर महाकाल मंदिर में क्या विशेष हुआ?
3 अगस्त 2026 को सावन के पहले सोमवार पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के ढाई बजे पट खोले गए और बाबा महाकाल का भांग तथा सूखे मेवों से विशेष श्रृंगार किया गया। पंचामृत अभिषेक, भस्म अर्पण और भव्य महाआरती के साथ हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
'चलित भस्म आरती' क्या है और यह किसके लिए है?
'चलित भस्म आरती' मंदिर समिति द्वारा उन श्रद्धालुओं के लिए की गई विशेष व्यवस्था है जिन्हें भस्म आरती की अग्रिम बुकिंग नहीं मिल सकी। इस व्यवस्था के तहत बिना पूर्व बुकिंग के भी भक्त आरती में शामिल हो सकते हैं, ताकि कोई भी दर्शन से वंचित न रहे।
उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में सावन सोमवार को कितने श्रद्धालु आते हैं?
प्रशासन के अनुसार रविवार 2 अगस्त को 4 लाख 19 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। सावन के पहले सोमवार 3 अगस्त को 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद के मद्देनजर व्यापक प्रबंध किए गए।
बाबा महाकाल का भांग से श्रृंगार क्यों किया जाता है?
भगवान शिव को भांग अत्यंत प्रिय मानी जाती है और सावन के विशेष अवसरों पर उनका भांग तथा सूखे मेवों से श्रृंगार करना वैदिक परंपरा का हिस्सा है। यह श्रृंगार बाबा के 'निराकार से साकार' रूप में दर्शन देने की मान्यता से जुड़ा है।
महाकाल की सवारी कब निकलती है और इस बार क्या व्यवस्था है?
सावन के सोमवारों पर परंपरागत रूप से बाबा महाकाल की सवारी निकाली जाती है। जिला कलेक्टर रोशन कुमार सिंह के अनुसार इस बार भी सवारी धूमधाम से निकलेगी और प्रशासन ने इसके लिए पूर्ण व्यवस्थाएँ कर ली हैं।
राष्ट्र प्रेस
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