13 अगस्त 2026
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श्रावण में भांग से सजे बाबा महाकाल, उज्जैन भस्म आरती में उमड़े हजारों श्रद्धालु

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श्रावण में भांग से सजे बाबा महाकाल, उज्जैन भस्म आरती में उमड़े हजारों श्रद्धालु

सारांश

श्रावण शुक्ल प्रथमा पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का भांग से शृंगार, मस्तक पर चंद्रमा और पंचामृत अभिषेक के साथ भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। हजारों श्रद्धालु रात से कतार में खड़े रहे — श्रावण मास में महाकाल की भक्ति का यह अद्वितीय दृश्य हर वर्ष लाखों को उज्जैन खींच लाता है।

मुख्य बातें

13 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि पर महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का भांग से विशेष शृंगार किया गया; मस्तक पर चंद्रमा और गले में राम नाम की माला सुशोभित।
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, फलों का रस) से अभिषेक के बाद नवीन मुकुट धारण कराया गया।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य परंपरा।
हजारों श्रद्धालु बीती रात से कतारबद्ध होकर दर्शन के लिए प्रतीक्षारत रहे।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 13 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक अनुष्ठान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे।

कपाट खुलते ही गूंजा 'जय श्री महाकाल'

गुरुवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। जैसे ही दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टनकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

पंचामृत अभिषेक और भांग का विशेष शृंगार

मंदिर के कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। श्रावण मास की परंपरा के अनुसार बाबा का भांग से विशेष शृंगार किया गया। बाबा महाकाल के मस्तक पर चंद्रमा और गले में राम नाम की माला सुशोभित की गई।

भस्म आरती का क्रम और परंपरा

पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात बाबा ने नवीन मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की मधुर ध्वनि के बीच भस्म आरती की गई। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। गौरतलब है कि भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

श्रावण मास में महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। अपने आराध्य के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध थे। यह ऐसे समय में आया है जब श्रावण के पवित्र महीने में देशभर से भक्त उज्जैन की ओर उमड़ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का केंद्रबिंदु है जो श्रावण मास में और भी प्रखर हो जाती है। यह ध्यान देने योग्य है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या मंदिर प्रशासन के लिए व्यवस्था और सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ी जिम्मेदारी भी बनती जा रही है। परंपरा और आधुनिक भीड़-प्रबंधन के बीच संतुलन बनाना आने वाले वर्षों में तीर्थ प्रशासन की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकाल की भस्म आरती क्या होती है और यह कब होती है?
भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में प्रतिदिन तड़के होने वाला सबसे पवित्र अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित कर आरती की जाती है। श्रावण मास में यह आरती विशेष महत्व रखती है और लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ते हैं।
श्रावण में महाकाल का भांग से शृंगार क्यों किया जाता है?
शैव परंपरा में भगवान शिव को भांग अत्यंत प्रिय मानी जाती है, इसलिए श्रावण मास में बाबा महाकाल का भांग से विशेष शृंगार किया जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और महाकालेश्वर मंदिर की विशिष्ट पूजा पद्धति का अभिन्न हिस्सा है।
भस्म आरती में दर्शन के लिए क्या पहनावा अनिवार्य है?
भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की पवित्रता और परंपरा को बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
13 अगस्त 2026 की भस्म आरती में क्या विशेष था?
श्रावण शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि पर बाबा महाकाल का भांग से शृंगार, मस्तक पर चंद्रमा, गले में राम नाम की माला और पंचामृत अभिषेक के साथ भव्य आरती हुई। हजारों श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध थे और कपाट खुलते ही 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दर्शन कैसे करें?
महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भस्म आरती के लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य है और निर्धारित पारंपरिक पहनावे में ही प्रवेश मिलता है। श्रावण मास में भीड़ अत्यधिक होती है, इसलिए श्रद्धालुओं को रात से ही कतार में आना पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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