श्रावण में भांग से सजे बाबा महाकाल, उज्जैन भस्म आरती में उमड़े हजारों श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 13 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक अनुष्ठान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे।
कपाट खुलते ही गूंजा 'जय श्री महाकाल'
गुरुवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। जैसे ही दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टनकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
पंचामृत अभिषेक और भांग का विशेष शृंगार
मंदिर के कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। श्रावण मास की परंपरा के अनुसार बाबा का भांग से विशेष शृंगार किया गया। बाबा महाकाल के मस्तक पर चंद्रमा और गले में राम नाम की माला सुशोभित की गई।
भस्म आरती का क्रम और परंपरा
पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात बाबा ने नवीन मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की मधुर ध्वनि के बीच भस्म आरती की गई। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। गौरतलब है कि भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
श्रावण मास में महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। अपने आराध्य के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध थे। यह ऐसे समय में आया है जब श्रावण के पवित्र महीने में देशभर से भक्त उज्जैन की ओर उमड़ रहे हैं।