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उज्जैन: भाद्रपद दशमी पर बाबा महाकाल का राजसी-रौद्र शृंगार, भस्म आरती में उमड़े हजारों श्रद्धालु

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उज्जैन: भाद्रपद दशमी पर बाबा महाकाल का राजसी-रौद्र शृंगार, भस्म आरती में उमड़े हजारों श्रद्धालु

सारांश

भाद्रपद शुक्ल दशमी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। भांग, चंदन और भस्म से सजे बाबा महाकाल के राजसी-रौद्र स्वरूप के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध रहे।

मुख्य बातें

21 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को भांग, चंदन और भस्म से राजसी व रौद्र स्वरूप में सजाया गया।
पंचामृत अभिषेक (दूध, दही, घी, शहद, फलों का रस) के पश्चात कपूर आरती और भस्म आरती की गई।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार भस्म आरती अर्पित की गई; भस्म के बाद बाबा साकार रूप में दर्शन देते हैं — यह मान्यता श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य वेशभूषा है।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 21 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक अवसर पर भांग, चंदन और भस्म से बाबा को राजसी व रौद्र स्वरूप में सजाया गया, जिसके दर्शन के लिए मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए।

भोर से आरंभ हुआ दिव्य अनुष्ठान

सोमवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शहद एवं फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। पूजा के प्रारंभ में घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया, तत्पश्चात कपूर आरती के उपरांत बाबा ने मुकुट धारण किया।

भस्म आरती और दिव्य शृंगार

झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ विधिपूर्वक भस्म आरती की गई। बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग पर भांग, चंदन और भस्म के माध्यम से विशेष शृंगार किया गया। इस दौरान बाबा को बड़ी और जीवंत आंखें, लाल-काली भौंहें और विशेष रूप से आकर्षित करने वाली मूंछें प्रदान की गईं, जिससे उनका राजसी व रौद्र स्वरूप और अधिक दिव्य प्रतीत हुआ।

श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब

जैसे ही भस्म आरती और शृंगार के पश्चात श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से वातावरण आस्था से भर गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध होकर इस अलौकिक दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे।

परंपरा और नियम

परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुष श्रद्धालुओं को पारंपरिक धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। यह पावन नगरी उज्जैन देश-विदेश के श्रद्धालुओं को प्रतिदिन अपनी ओर आकर्षित करती है, और विशेष तिथियों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का आधार स्तंभ है, जो लाखों श्रद्धालुओं को प्रतिवर्ष देश के कोने-कोने से खींच लाती है। विशेष तिथियों पर यह आयोजन उज्जैन के धार्मिक पर्यटन को भी गति देता है, जो मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। हालाँकि, बढ़ती भीड़ के प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना मंदिर प्रशासन के लिए निरंतर चुनौती बनी रहती है, जिस पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाली विशेष पूजा है, जिसमें बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग पर भस्म अर्पित कर आरती की जाती है। मान्यता है कि इस आरती के पश्चात बाबा निराकार से साकार रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं।
भस्म आरती में कौन अर्पित करता है भस्म?
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।
भस्म आरती में श्रद्धालुओं के लिए वेशभूषा नियम क्या हैं?
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की पवित्रता और परंपरा को बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
21 सितंबर 2026 की भस्म आरती किस तिथि को हुई?
21 सितंबर 2026 की भस्म आरती भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि, सोमवार को संपन्न हुई। सोमवार शिव का विशेष दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन श्रद्धालुओं की संख्या विशेष रूप से अधिक रहती है।
बाबा महाकाल का शृंगार किस प्रकार किया जाता है?
भस्म आरती में बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग पर भांग, चंदन और भस्म के माध्यम से दिव्य शृंगार किया जाता है। इसमें बाबा को बड़ी जीवंत आंखें, लाल-काली भौंहें और विशेष मूंछें बनाई जाती हैं, जिससे उनका राजसी व रौद्र स्वरूप प्रकट होता है।
राष्ट्र प्रेस
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