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उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर: ज्येष्ठ दशमी पर पंचामृत, भांग-चंदन और रुद्राक्ष से बाबा महाकाल का राम मय शृंगार

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उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर: ज्येष्ठ दशमी पर पंचामृत, भांग-चंदन और रुद्राक्ष से बाबा महाकाल का राम मय शृंगार

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ शुक्ल दशमी पर बाबा महाकाल का राम मय शृंगार हुआ — भांग, चंदन, पुष्प और रुद्राक्ष माला से सजे बाबा के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु रात से ही पंक्तिबद्ध रहे। पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।

मुख्य बातें

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 24 जून को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी पर भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का राम मय शृंगार — भांग, चंदन, पुष्प और रुद्राक्ष की माला से — भव्य रूप से किया गया।
दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया।
भस्म आरती में अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है।
भस्म आरती के दौरान पुरुषों को धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है।
मंदिर परिसर में सुरक्षा हेतु बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मी तैनात रहे।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी, बुधवार 24 जून को बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अवसर पर बाबा का राम मय दिव्य शृंगार देखकर देर रात से पंक्तिबद्ध खड़े हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा।

कपाट खुलने की विधि और पूजन क्रम

तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और उसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। घंटाल बजाकर बाबा को हरि ओम का जल अर्पित किया गया।

राम मय शृंगार की भव्यता

इस विशेष अवसर पर बाबा महाकाल को भांग, चंदन, पुष्प और रुद्राक्ष की माला से सुसज्जित किया गया। राम मय स्वरूप में सजे बाबा के दर्शन पाकर श्रद्धालु उत्साह और श्रद्धा से भर उठे। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त सम्मिलित हुए।

भस्म आरती की परंपरा और विशेषता

जानकारी के अनुसार, पूर्व में महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है — यह परंपरा मंदिर की गरिमा और पवित्रता को बनाए रखती है।

देश-विदेश से उमड़ते हैं श्रद्धालु

बाबा महाकाल की भस्म आरती की ख्याति देश की सीमाओं से परे है। इसे देखने के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर著名 हस्तियाँ तक उज्जैन पहुँचती हैं। मंदिर परिसर और उसके आसपास व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाती है। गौरतलब है कि महाकालेश्वर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं और उज्जैन की धार्मिक पहचान का केंद्र बिंदु हैं।

आगे की आस्था-यात्रा

ज्येष्ठ मास में महाकाल के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है और इस माह भर भक्तों की संख्या सामान्य से अधिक रहती है। मंदिर प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की सुविधा और अनुशासित दर्शन-व्यवस्था के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का आधार-स्तंभ भी है। ज्येष्ठ मास जैसे विशेष अवसरों पर हजारों श्रद्धालुओं का उमड़ना यह दर्शाता है कि धार्मिक पर्यटन मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ी संभावना है। साथ ही यह प्रश्न भी उठता है कि बढ़ती भीड़ के बीच मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षा और अनुभव की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित करता है — विशेषकर जब देश-विदेश से हस्तियाँ भी यहाँ दर्शन को आती हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला एक अनूठा अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल को विशेष भस्म अर्पित की जाती है। यह भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर की सबसे प्रतिष्ठित पूजा-विधि मानी जाती है और देश-विदेश से श्रद्धालु इसके दर्शन के लिए आते हैं।
भस्म आरती में किस भस्म का उपयोग होता है?
जानकारी के अनुसार, पहले श्मशान की राख उपयोग की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह परिवर्तन परंपरा को बनाए रखते हुए स्वच्छता और शुद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।
भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को क्या पहनना होता है?
भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की पवित्रता और गरिमा को बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
24 जून को बाबा महाकाल का शृंगार किस प्रकार किया गया?
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी, 24 जून को बाबा महाकाल का राम मय शृंगार भांग, चंदन, पुष्प और रुद्राक्ष की माला से किया गया। इससे पहले दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया।
महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए कब से लाइन लगानी पड़ती है?
भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालु प्रायः देर रात से ही पंक्तिबद्ध होना शुरू कर देते हैं। 24 जून को भी बड़ी संख्या में भक्त रात से ही लाइन में खड़े रहे। मंदिर परिसर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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