19 जुलाई 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: भांग, चंदन, सिंदूर से बाबा महाकाल का भव्य शृंगार, हजारों श्रद्धालु उमड़े

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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: भांग, चंदन, सिंदूर से बाबा महाकाल का भव्य शृंगार, हजारों श्रद्धालु उमड़े

सारांश

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार को भस्म आरती का अलौकिक दृश्य — भांग, चंदन, सिंदूर और रजत आभूषणों से सजे बाबा महाकाल के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु रात से ही कतार में खड़े रहे। राज्य सूचना आयुक्त ने 2028 सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों को सराहा।

मुख्य बातें

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 19 जुलाई 2026 (रविवार) को बाबा महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सिंदूर के साथ शेषनाग का रजत मुकुट , रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष माला अर्पित की गई।
अभिषेक में पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर, फलों का रस) का उपयोग किया गया; भस्म अब कपिला गाय के गोबर व औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार होती है।
राज्य सूचना आयुक्त भीमाशंकर पचौरी परिवार सहित दर्शन के लिए पहुँचे; सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों की सराहना की।
भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 19 जुलाई 2026 (रविवार) को बाबा महाकाल की पवित्र भस्म आरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने। भांग, चंदन और सिंदूर से सजे बाबा के दिव्य शृंगार के दर्शन के लिए अनेक भक्त बीती रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतार में खड़े रहे।

मुख्य घटनाक्रम

रविवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक के बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके उपरांत बाबा को भांग, चंदन और सिंदूर अर्पित किए गए।

शृंगार में बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रजत जड़ी रुद्राक्ष माला और सुगंधित पुष्पों की माला अर्पित की गई। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" के उद्घोष, घंटियों की टंकार और शंखध्वनि से गुंजायमान हो उठा।

भस्म आरती की विशेषता

मंदिर परंपरा के अनुसार, पहले महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी। अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई और श्रद्धालुओं ने बाबा की कृपा का अनुभव किया।

विशिष्ट अतिथि के दर्शन

इस अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त भीमाशंकर पचौरी अपने पूरे परिवार के साथ बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुँचे। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं को देखकर स्पष्ट होता है कि सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियाँ अभी से ही अत्यंत प्रभावी ढंग से चल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब 2028 में दुनिया भर से श्रद्धालु यहाँ आएँगे, तो वे निश्चित रूप से बाबा महाकाल की कृपा से धन्य महसूस करेंगे।

पचौरी ने 'विक्रम' नामक रॉकेट के अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक स्थापित होने का भी उल्लेख किया और इसे सम्राट विक्रमादित्य की विरासत से जोड़ते हुए इसे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय बताया।

सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की भीड़

बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में विख्यात है और इसे देखने के लिए जनसामान्य से लेकर著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंदिर परिसर के आसपास बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।

यह ऐसे समय में आया है जब उज्जैन प्रशासन 2028 के सिंहस्थ कुंभ को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के बुनियादी ढाँचे को और अधिक सुदृढ़ करने में जुटा है, ताकि लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन की सुविधा मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान का केंद्र बिंदु है। गौरतलब है कि 2028 के सिंहस्थ कुंभ को देखते हुए प्रशासन की तैयारियाँ अभी से तेज हो गई हैं — यह सकारात्मक संकेत है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब करोड़ों श्रद्धालु एक साथ उज्जैन पहुँचेंगे। भस्म की परंपरा में श्मशान राख से कपिला गोबर-भस्म की ओर बदलाव धार्मिक संवेदनशीलता और व्यावहारिकता का संतुलन दर्शाता है — यह बदलाव मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखा रह जाता है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला एक अनूठा अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल का विशेष भस्म से शृंगार कर आरती की जाती है। यह भस्म अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार की जाती है।
19 जुलाई 2026 की भस्म आरती में बाबा महाकाल को क्या अर्पित किया गया?
बाबा महाकाल को भांग, चंदन और सिंदूर अर्पित किए गए। इसके अलावा शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रजत जड़ी रुद्राक्ष माला और सुगंधित पुष्पों की माला भी चढ़ाई गई। अभिषेक पंचामृत से किया गया।
भस्म आरती के दर्शन के लिए क्या नियम हैं?
भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। दर्शनार्थियों को मंदिर की पोशाक-संहिता का पालन करना होता है।
सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियाँ उज्जैन में कैसी हैं?
राज्य सूचना आयुक्त भीमाशंकर पचौरी के अनुसार, 2028 के सिंहस्थ कुंभ की तैयारियाँ अभी से बहुत प्रभावी ढंग से चल रही हैं। उन्होंने मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालु बाबा महाकाल की कृपा से धन्य महसूस करेंगे।
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म में पहले और अब क्या अंतर है?
पहले बाबा महाकाल को श्मशान की राख से बनी भस्म अर्पित की जाती थी। अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है, जो परंपरा और आधुनिक व्यावहारिकता का संगम है।
राष्ट्र प्रेस
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