महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: भांग, चंदन, सिंदूर से बाबा महाकाल का भव्य शृंगार, हजारों श्रद्धालु उमड़े
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 19 जुलाई 2026 (रविवार) को बाबा महाकाल की पवित्र भस्म आरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने। भांग, चंदन और सिंदूर से सजे बाबा के दिव्य शृंगार के दर्शन के लिए अनेक भक्त बीती रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतार में खड़े रहे।
मुख्य घटनाक्रम
रविवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक के बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके उपरांत बाबा को भांग, चंदन और सिंदूर अर्पित किए गए।
शृंगार में बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रजत जड़ी रुद्राक्ष माला और सुगंधित पुष्पों की माला अर्पित की गई। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" के उद्घोष, घंटियों की टंकार और शंखध्वनि से गुंजायमान हो उठा।
भस्म आरती की विशेषता
मंदिर परंपरा के अनुसार, पहले महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी। अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई और श्रद्धालुओं ने बाबा की कृपा का अनुभव किया।
विशिष्ट अतिथि के दर्शन
इस अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त भीमाशंकर पचौरी अपने पूरे परिवार के साथ बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुँचे। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं को देखकर स्पष्ट होता है कि सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियाँ अभी से ही अत्यंत प्रभावी ढंग से चल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब 2028 में दुनिया भर से श्रद्धालु यहाँ आएँगे, तो वे निश्चित रूप से बाबा महाकाल की कृपा से धन्य महसूस करेंगे।
पचौरी ने 'विक्रम' नामक रॉकेट के अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक स्थापित होने का भी उल्लेख किया और इसे सम्राट विक्रमादित्य की विरासत से जोड़ते हुए इसे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय बताया।
सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की भीड़
बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में विख्यात है और इसे देखने के लिए जनसामान्य से लेकर著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंदिर परिसर के आसपास बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
यह ऐसे समय में आया है जब उज्जैन प्रशासन 2028 के सिंहस्थ कुंभ को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के बुनियादी ढाँचे को और अधिक सुदृढ़ करने में जुटा है, ताकि लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन की सुविधा मिल सके।